Wednesday, October 29, 2014

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Sunday, October 26, 2014

हॉन्टेड विलेज "कुलधरा"(Haunted Village Kuldhara) - एक श्राप के कारण 170 सालों से हैं वीरान - रात को रहता है भूत प्रेतों का डेरा

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 हॉन्टेड विलेज "कुलधरा"(Haunted Village Kuldhara) - एक श्राप के कारण 170 सालों से हैं वीरान - रात को रहता है भूत प्रेतों का डेरा







हमारे देश भारत के कई शहर अपने दामन में कई रहस्यमयी घटनाओ को समेटे हुए है ऐसी ही एक घटना हैं राजस्थान के जैसलमेर जिले के कुलधरा(Kuldhara) गाँव कि, यह गांव पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा हैं।कुलधरा(Kuldhara) गाँव के हज़ारों लोग एक ही रात मे इस गांव को खाली कर के चले गए थे  और जाते जाते श्राप दे गए थे कि यहाँ फिर कभी कोई नहीं बस पायेगा। तब से गाँव वीरान पड़ा


जैसलमेर से 15 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव अब एक बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है और हर रोज सैकड़ों सैलानी यहां आते हैं। आज से लगभग 170 साल पहले कुलधरा गांव में बसे सैकड़ों लोग अपना घरबार छोड़कर रातों-रात ऐसे गायब हुए कि उनका नामो-निशान नहीं मिला।

यह गांव रातों रात क्यों खाली हुआ, किस समाज के लोग यहां रहते थे, आखिर इस गांव के लोग कहां चले गए। आज तक यह गांव दुबारा क्यों नही बस सका? ऐसे सैकड़ों सवाल आपके जेहन में भी कौंध रहे होंगे। चलो अब हम इस गांव से जुड़ी एक-एक कहानी को आपसे साझा करते हैं।

कुलधरा के वीरान होने कि कहानी (Story of Kuldhara) :
जो गाँव इतना विकसित था तो फिर क्या वजह रही कि वो गाँव रातों रात वीरान हो गया। इसकी वजह था गाँव   का अय्याश दीवान सालम सिंह जिसकी गन्दी नज़र गाँव कि एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गयी थी। दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि बस किसी तरह से उसे पा लेना चाहता था। उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि यदि अगले पूर्णमासी तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके लड़की को उठा ले जाएगा। गांववालों के लिए यह मुश्किल की घड़ी थी। उन्हें या तो गांव बचाना था या फिर अपनी बेटी। इस विषय पर निर्णय लेने के लिए सभी 84 गांव वाले एक मंदिर पर इकट्ठा हो गए और पंचायतों ने फैसला किया कि कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस दीवान को नहीं देंगे।
फिर क्या था, गांव वालों ने गांव खाली करने का निर्णय कर लिया और रातोंरात सभी 84 गांव आंखों से ओझल हो गए। जाते-जाते उन्होंने श्राप दिया कि आज के बाद इन घरों में कोई नहीं बस पाएगा। आज भी वहां की हालत वैसी ही है जैसी उस रात थी जब लोग इसे छोड़ कर गए थे।


कहा जाता है कि यह गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में हैं :
आज भी है श्राप का असर:
पालीवाल ब्राह्मणों के श्राप का असर यहां आज भी देखा जा सकता है। जैसलमेर के स्थानीय निवासियों की मानें तो कुछ परिवारों ने इस जगह पर बसने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। स्थानिय लोगों का तो यहां तक कहना है कि कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो वहां गए जरूर लेकिन लौटकर नहीं आए। उनका क्या हुआ, वे कहां गए कोई नहीं जानता



एक बेटी की इज्जत के लिए उजड़ गया पूरा गांव !

kuldhara_haunted_village_1सबसे ज्यादा प्रचलित कहानी के दौरान राजस्थान के कुलधरा गांव के रातों-रात खाली होने के पीछे यह दावा किया जा रहा है कि इस गांव के लोग अपनी बेटी की इज्जत बचाने के लिए रातों-रात गायब हो गए थे। ऐसा माना जाता है कि गांव के खाली होने के पीछे सबसे बड़ा कारण एक सिरफिरा दीवान था, जिसकी नीयत गांव की लड़की पर बिगड़ गई थी।

मान्यता के अनुसार कुलधरा गांव में पालीवाल ब्राह्मण रहा करते थे। ऐसा कहा जाता है कि गांव को यहां के अय्याश दीवान सालम सिंह की बुरी नजर गांव के ही एक ब्राह्मण की लड़की पर पड़ी। दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि किसी भी कीमत पर उसे पा लेना चाहता था। उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

kuldhara-village-jaisalmer-ruins-and-remainsहद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि यदि अगली पूर्णमासी तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके लड़की को उठा ले जाएगा। ग्रामीणों के लिए यह मुश्किल की घड़ी थी। उन्हें या तो गांव बचाना था या फिर अपनी बेटी।

इस विषय पर निर्णय लेने के लिए सभी ग्रामीण एक मंदिर में एकत्र हो गए और पंचायतों ने फैसला किया कि कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस अय्याश दीवान को नहीं सौंपेंगे। फिर क्या था, गांव वालों ने गांव खाली करने का निर्णय कर लिया और रातों-रात सभी ग्रामीण गांव छोड़ कर चले गए।

ग्रामीणों ने ही दिया श्राप अपने गांव को दीवान के खौफ और अत्याचार के कारण अपना गांव तो छोड़कर ग्रामीण चले गए, लेकिन जाते-जाते उन्होंने अपने गांव को श्राप दिया कि आज के बाद यहां के घरों में कोई नहीं बस पाएगा। 170 साल बीतने के बाद भी आज भी इस गांव की हालत वैसी ही है जैसी उस रात थी, जब ग्रामीण इसे छोड़ कर गए थे।

kuldhara-village-jaisalmer-stairs-to-terrace-rebuilt-house

राजा के अत्याचार के कारण भी गांव छोड़ने की कहानी

एक अन्य मान्यता के अनुसार कुलधरा गांव पर शासन करने वाला राजा गांव के पालीवाल ब्राह्मणों को खत्म कर देना चाहते था। वह आए दिन इन ब्राह्मणों पर अत्याचार करता था। राजा के ब्राह्मणों से क्रूर व्यवहार तो करता ही था, साथ ही उन्हें गुलाम बनाकर रखना चाहता था।

इसी कारण गांव के लोगों ने यह निर्णय लिया कि वे इस जगह को छोड़ देंगे और जाते समय उन्होंने इस गांव को शापित कर दिया कि उनके बाद यहां पर कोई बस नहीं सकेगा।

रुहानी ताकतों का हर कदम पर होता है आभास

कुलधरा गांव आज एक बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है और हर रोज सैकड़ों सैलानी यहां आते हैं। kuldhara-village-jaisalmer-temple-steepleअधिकतर सैलानी दावा करते हैं कि उन्हें यहां कदम-कदम पर रुहानी ताकतों के होने का आभास होता है। 170 साल पहले जैसलमेर के पास बसे इस गांव में एक रात में ही ऐसी वीरानी छा गई, जो आज तक कायम है। गांव के लोग कहां गए और कैसे गए, यह सवाल आज भी एक रहस्य बना हुआ है।

चूड़ियों की खनक और पायल की झनकार देती है सुनाई

टूरिस्ट प्लेस में बदल चुके कुलधरा गांव घूमने आने वालों के अनुसार यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मण परिवारों की महिलाओं की उपस्थिति आज भी महसूस होती है।

इन महिलाओं की चूड़ियों की खनक यहां आने वाले कई सैलानियों को सुनाई दी हैं। इन सैलानियों को यहां हरपल ऐसा आभास होता है कि उनके आसपास कोई चल रहा है। गांव के उजाड़ पड़े बाजार में भी चहल-पहल की आवाजें आती हैं, साथ ही महिलाओं के बात करने, उनकी पायलों की छन-छन की आवाज माहौल को डरावना बना देती हैं, जबकि यह गांव पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है और सुनसान है।

kuldhara-village-jaisalmer-umbrella  हर मौसम में अनुकूल था कुलधरा

खंडहर में तब्दील हो चुके इस गांव का गहन अध्ययन करने वालों का कहा है कि रेगिस्तान में बसे इस गांव के निर्माण में पूरी वैज्ञानिक तरीके का इस्तेमाल किया गया थ। झुलसा देने वाली भयंकर गर्मी में भी यहां के मकान ऐसे ठंडे रहते थे, जैसे एयरकंडीशनर चल रहा हो, साथ ही सर्दी के मौसम में इन घरों का तापमान सामान्य बना रहता था। गर्मी के मौसम में हवा दीवारों से टकराती हुई हर घर के भीतर होकर गुजरती थी। घरों के बीच फासले को कम करने के लिए झरोखों की मदद ली गई थी। ईंट-पत्थर से बने इस गांव की बनावट ऐसी थी कि यहां कभी गर्मी का अहसास नहीं होता था।

श्राप का असर है आज भी कायम

पालीवाल ब्राह्मणों के श्राप का असर यहां आज भी देखा जा सकता है। जैसलमेर के स्थानीय निवासियों की मानें तो कुछ परिवारों ने इस जगह पर बसने की कोशिश की थी, लेकिन अलौकिक शक्तियों के प्रकोप के कारण उलटे पांव उन्हें इस गांव से भागना पड़ा। जैसलमेर के स्थानीय निवासियों का तो यहां तक कहना है कि कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो कुलधरा गांव में बसने के लिए गए जरूर थे, लेकिन वे कभी लौटकर नहीं आए। उनका क्या हुआ, वे कहां गए, इस बारे में कोई नहीं जानता। नहीं लगते थे घरों दरवाजों पर ताले जैसलमेर के आसपास बसे लगभग 84 गांवों में से केवल कुलधरा गांव ही ऐसा था, जिसके घरों के दरवाजों पर कभी ताला नहीं लगाया जाता था। इस गांव की एक और यह खासियत थी कि इसके दो घरों के बीच काफी दूरी होती थी, लेकिन इसके बावजूद जैसे ही कोई इंसान गांव के मुख्य द्वार पर आता था उसके चलने की आवाज गांव के हर घर में सुनाई देती थी।

सोने की चाह में जगह-जगह हो चुकी है खुदाई

देश-विदेश से यहां लोग जहां पुरा महत्व की चीजों को समझने के लिए आते हैं, वहीं कई लोग यहां जमीन में दबे सोने की खोज में खाक छानते हैं।इतिहासकारों के अनुसार पालीवाल ब्राह्मणों ने अपनी संपत्ति, जिसमें भारी मात्रा में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात थे, उसे जमीन के अंदर दबा रखा था। यही कारण है कि जो कोई भी यहां आता है, वह जगह-जगह खुदाई करने लग जाता है। इस उम्मीद से कि शायद वह सोना उनके हाथ लग जाए। यह गांव आज भी जगह-जगह से खुदा हुआ मिलता है


पेरानार्मल सोसायटी की टीम ने कि कुलधरा में पड़ताल :-
मई 2013 मे दिल्ली से आई भूत प्रेत व आत्माओं पर रिसर्च करने वाली पेरानार्मल सोसायटी की टीम ने कुलधरा(Kuldhara) गांव में बिताई रात। टीम ने माना कि यहां कुछ न कुछ असामान्य जरूर है। टीम के एक सदस्य ने बताया कि विजिट के दौरान रात में कई बार मैंने महसूस किया कि किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा, जब मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था। पेरानॉर्मल सोसायटी के उपाध्यक्ष अंशुल शर्मा ने बताया था कि हमारे पास एक डिवाइस है जिसका नाम गोस्ट बॉक्स है। इसके माध्यम से हम ऐसी जगहों पर रहने वाली आत्माओं से सवाल पूछते हैं। कुलधरा में भी ऐसा ही किया जहां कुछ आवाजें आई तो कहीं असामान्य रूप से आत्माओं ने अपने नाम भी बताए। शनिवार चार मई की रात्रि में जो टीम कुलधरा गई थी उनकी गाडिय़ों पर बच्चों के हाथ के निशान मिले। टीम के सदस्य जब कुलधरा गांव में घूमकर वापस लौटे तो उनकी गाडिय़ों के कांच पर बच्चों के पंजे के निशान दिखाई दिए। (जैसा कि कुलधरा(Kuldhara) गई टीम के सदस्यों ने मीडिया को बताया )

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कुलधरा पालीवालों ब्राह्मणो का गांव था और एक दिन अचानक यहां फल-फूल रहे पालीवाल ब्राह्मण अपनी इस सरज़मीं को छोड़कर अन्‍यत्र चले गये । उसके बाद से कुलधरा पर कोई बस नहीं सका । कोशिशें बहुत हुईं पर नाकाम हो गयीं । कुलधरा के अवशेष आज भी विशेषज्ञों और पुरातत्‍वविदों के अध्‍ययन का केंद्र हैं । कई मायनों में पालीवालों ब्राह्मणो ने कुलधरा को वैज्ञानिक आधार पर विकसित किया था ।

कुलधरा जैसलमेर से लगभग अठारह किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है ।कहते हैं कि पालीवाल समुदाय के इस इलाक़े में चौरासी गांव थे और यह उनमें से एक था । मेहनती और रईस पालीवाल ब्राम्‍हणों की कुलधार शाखा ने सन 1291 में तकरीबन छह सौ घरों वाले इस गांव को बसाया था । पालीवाल नाम दरअसल इसलिए पड़ा क्‍योंकि वो राजस्‍थान के पाली इलाक़े के रहने वाले थे । पालीवाल ब्राम्‍हण होते हुए भी बहुत ही उद्यमी समुदाय था । अपनी बुद्धिमत्‍ता, अपने कौशल और अटूट परिश्रम के रहते पालीवालों ने धरती पर सोना उगाया था । हैरत की बात ये है कि पाली से कुलधरा आने के बाद पालीवालों ने रेगिस्‍तानी सरज़मीं के बीचोंबीच इस गांव को बसाते हुए खेती पर केंद्रित समाज की परिकल्‍पना की थी । रेगिस्‍तान में खेती । पालीवालों के समृद्धि का रहस्‍य था । जिप्‍सम की परत वाली ज़मीन को पहचानना और वहां पर बस जाना । पालीवाल अपनी वैज्ञानिक सोच, प्रयोगों और आधुनिकता की वजह से उस समय में भी इतनी तरक्‍की कर पाए थे ।
पालीवाल समुदाय आमतौर पर खेती और मवेशी पालने पर निर्भर रहता था । और बड़ी शान से जीता था । जिप्‍सम की परत बारिश के पानी को ज़मीन में अवशोषित होने से रोकती और इसी पानी से पालीवाल खेती करते । और ऐसी वैसी नहीं बल्कि जबर्दस्‍त फसल पैदा करते । पालीवालों के जल-प्रबंधन की इसी तकनीक ने थार रेगिस्‍तान को इंसानों और मवेशियों की आबादी या तादाद के हिसाब से दुनिया का सबसे सघन रेगिस्‍तान बनाया । पालीवालों ने ऐसी तकनीक विकसित की थी कि बारिश का पानी रेत में गुम नहीं होता था बल्कि एक खास गहराई पर जमा हो जाता था ।गांव के तमाम घर झरोखों के ज़रिए आपस में जुड़े थे इसलिए एक सिरे वाले घर से दूसरे सिरे तक अपनी बात आसानी से पहुंचाई जा सकती थी । घरों के भीतर पानी के कुंड, ताक और सीढि़यां कमाल के हैं । कहते हैं कि इस कोण में घर बनाए गये थे कि हवाएं सीधे घर के भीतर होकर गुज़रती थीं । कुलधरा के ये घर रेगिस्‍तान में भी वातानुकूलन का अहसास देते थे ।

ऐसा उन्नत और विकसित गांव एक दिन अचानक खाली कैसे हो गया ?

मिसालें तो बहुत मिलती हैं ,पर कुछ मिसालें याद की जाती हैं । क्योंकि वो अनोखी होती हैं । मिसाल सिर्फ एक शख्स की नही ,एक घर की नही , एक कुनबे की नही , एक गाँव की भी नही यह मिसाल है 84 गांवों के हजारों लोगों की है ।एक तरफ लड़की की इज्ज़त और दूसरी तरफ हज्जारों लोग ।गाँव के हज्जारो ब्राह्मणो के पास समय था तो सिर्फ एक रात का एक रात मे ही उनको यह तय करना था की या अपनी लड़की की इज्जत का सोदा कर लो या सजा के लिए तैयार रहो । सजा भी एसी की खुद सजा भी काँप जाए । परंतु उन ब्राह्मणो ने रातो-रात एक फैसला किया और पूरे 84 गाँव के हज्जारो ब्राह्मणो ने रातो-रात गाव खाली कर जो बलिदान दिया ऊस की मिसाल दूसरी कोई नही हो सकती । असली मे इस गांव को गाँव के दीवान सालम सिंह की नजर लग गई । सालम सिंह एक अय्याश दीवान था । वो था तो सिर्फ एक दीवान परंतु बड़ों का मुह लगा था । इस दीवान की नजर ब्राह्मणो की एक लड़की पर पड गई । वो इस तरह उतावला हुआ की सब भूल गया । और किसी भी तरह उसको पा लेना चाहता था । उसने ब्राह्मणो पर दबाव बनाना शुरू कर दिया नही मानने पर मनमाने कर लगा दिये इसके बाद भी बस न चलने पर उस लड़की के घर संदेशा भिजवा दिया की अगली पूर्णमासी तक या तो लड़की दे दो नही तो सुबह होते ही गाँव पर धावा बोल कर लड़की को उठा ले जाएगा । गाँव के ब्राह्मणो ने दिये गए समय पर ध्यान नही दिया ,ध्यान दिया तो दी गई धमकी पर । 84 गांवों के ब्राह्मणो ने मिलकर एक जगह बैठक की जंहा

माता का मंदिर था । सभी 84 गाँव वाले मंदिर के पास इकट्ठा हो गए । ब्राह्मणो की पंचायत मे एक आव3आज पर फैसला हुआ की कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस दीवान को नही देंगे । यह अत्याचार के खिलाफ न झुकने की जिद के साथ-साथ एक वर्ण संकर संतान के जन्म और एक एसी संतान जो कलंकित भी होती और उसके कलंकित भविष्य का विषय भी था । गाँव वालों ने रातों-रात 84 गाँव खाली कर दिये । और जाते-जाते दे गए एक श्राप की दोबारा इन घरों मे कोई बस नही पाएगा । वो गए तो लौट कर कभी नही आए ?

समय बीतने के साथ-साथ कई लोगों और सरकार ने भी इन गांवों को बसाने की कोशिश की परंतु कामयाब नही हो सके । जो भी उन घरो मे रहने की कोशिश करता बर्बाद हो जाता या एसी मुसीबत आती की किसी न किसी की जान लेकर ही जाती ।

सरकार की यह कोशिश तो असफल रही पर दूसरी कोशिश जरूर शुरू कर दी । इन तमाम गांवों की घेराबंदी कर दी और मुख्य द्वार पर एक चौकीदार को बैठा दिया । गाँव न तो कभी आबाद हुआ न ही कभी आबाद होगा , परंतु उजड़ने के बाद भी यह गाँव पर्यटकों की जेब से पैसे निकालकर सरकार की झोली जरूर भरता रहा । घर की बहू बेटी की इज्ज़त की खातिर इन पत्थर के घरो मे रहने वालों ने जो बलिदान दिया वो कोई दूसरा नही दे सकता । यह पत्थर बिखरा तो है परंतु टूटा अब भी नही है



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Gautam Budda Prerak Prasang

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 Gautam Budda Prerak Prasang
 
एक बार वैशाली के बाहर जाते धम्म प्रचार के लिए जाते हुए गौतम बुद्ध ने देखा कि कुछ सैनिक तेजी से भागती हुयी एक लड़की का पीछा कर रहे हैं। वह डरी हुई लड़की एक कुएं के पास जाकर खड़ी हो गई। वह हांफ रही थी और प्यासी भी थी। बुद्ध ने उस बालिका को अपने पास बुलाया और कहा कि वह उनके लिए कुएं से पानी निकाले, स्वयं भी पिए और उन्हें भी पिलाये। इतनी देर में सैनिक भी वहां पहुँच गये। बुद्ध ने उन सैनिकों को हाथ के संकेत से रुकने को कहा।

उनकी बात पर वह कन्या कुछ झेंपती हुई बोली ‘महाराज! मै एक अछूत कन्या हूँ। मेरे कुएं से पानी निकालने पर जल दूषित हो जायेगा।’

बुद्ध ने उस से फिर कहा ‘पुत्री, बहुत जोर की प्यास लगी है, पहले तुम पानी पिलाओ।’

इतने में वैशाली नरेश भी वहां आ पहुंचे। उन्हें बुद्ध को नमन किया और सोने के बर्तन में केवड़े और गुलाब का सुगन्धित पानी पानी पेश किया। बुद्ध ने उसे लेने से इंकार कर दिया। बुद्ध ने एक बार फिर बालिका से अपनी बात कही। इस बार बालिका ने साहस बटोरकर कुएं से पानी निकल कर स्वयं भी पिया और गौतम बुद्ध को भी पिलाया। पानी पीने के बाद बुद्ध ने बालिका से भय का कारण पूछा। कन्या ने बताया मुझे संयोग से राजा के दरबार में गाने का अवसर मिला था। राजा ने मेरा गीत सुन मुझे अपने गले की माला पुरस्कार में दी। लेकिन उन्हें किसी ने बताया कि मै अछूत कन्या हूँ। यह जानते ही उन्होंने अपने सिपाहियों को मुझे कैद खाने में डाल देने का आदेश दिया। मै किसी तरह उनसे बचकर यहाँ तक पहुंची थी।

इस पर बुद्ध ने कहा, सुनो राजन! यह कन्या अछूत नहीं है, आप अछूत हैं। जिस बालिका के मधुर कंठ से निकले गीत का आपने आनंद उठाया, उसे पुरस्कार दिया, वह अछूत हो ही नहीं सकती। गौतम बुद्ध के सामने वह राजा लज्जित ही हो सकते थे


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स्वस्तिक , पिरामिड और पुनर्जन्म के रहस्य (Mystery of the Swastika, Pyramids and Reincarnation)

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स्वस्तिक , पिरामिड और पुनर्जन्म के रहस्य (Mystery of the Swastika, Pyramids and Reincarnation)


स्वस्तिक पूरी विश्व में प्रसिद्ध हुआ जब हिटलर ने इसे अपने झंडे पर nazi की निशानी के रूप में रखा |
इसके साथ ही स्वस्तिक को आर्य सभ्यता से जोड़ा जाने लगा और तब खोज शुरू हुई की स्वस्तिक की उपत्ति आखिर कहा हुई |
कुछ वर्ष पहले सबसे प्राचीनतम स्वस्तिक के साबुत यूरोप में विंका सभ्यता में मिले पर हाल ही में दक्षिण भारत की गुफाओ में विंका से भी पुराने साबुत मिले है जो साबित करती है की स्वस्तिक की उपत्ति भारत में हुई |

स्वस्तिक पर लेख ज्यादातर भारत मे ही मिले है ,बोद्ध धर्म के चीन और जापान में फैलने के बाद वहा भी स्वस्तिक के बारे में लिखा गया पर विदेशो में स्वस्तिक ज्यादातर केवल एक आकार भर था जिसे वे सजावट आदि के लिए इस्तेमाल करते |
स्वस्तिक को अपने देश का और इसे आर्य प्रतिक घोषित करने के लिए कई कहानियाँ बने जा रही है जैसे
यूनान या ग्रीस के लोग इन्टरनेट पर यह गलत्फैमी फैला रहे है की स्वस्तिक ज़ीउस (zeus) का प्रतिक है जबकि प्राचीन यूनान में स्वस्तिक पर कोई ऐसा लेख नहीं |
कुछ लोग कह रहे है की स्वस्तिक की उपत्ति बल्गेरिया में हुई थी
कुछ से द्रविड़ो का प्रतिक बता रहे है |
स्वस्तिक केवल आर्य प्रतिक है और आप इसके कई प्रकार अर्यो के सभ्यताओ में देख सकते है |



युगों  का चक्कर दर्शाता स्वस्तिक




स्वस्तिक युगों का चक्कर भी समझाता है |
चलिए मानले की जहा सत्य युग है वाही से शुरुआत है तो उस जगह को no. 1 दे और यदि स्वस्तिक को घुमाये तो no. 1 की जगह पर त्रेता युग आयेंगा ,इसिकादर आखिर में कलयुग और फिर विनाश ,तब फिर से ब्रह्माण्ड की उपत्ति होगी और फिर सत्य युग आयेंगा |



स्वस्तिक एक सुन्दर प्रतिक है जो नाही आर्य या किसी जाती का प्रतिक है बल्कि यह तो पुनर्जन्म और ब्रह्माण्ड के जन्म और विनाश के चक्र को दर्शाता है साथ ही यह शुभ शुरुआत का भी प्रतिक है |
निचे कुछ आर्य सभ्यताए और अर्यो के विविध धर्मो में आप स्वस्तिक पाएंगे |
स्वस्तिक के अर्थ अलग अलग सभ्यता अनुसार

Celt



प्राचीन यूरोप में Celt नामक एक सभ्यता थी जो जर्मनी से इंग्लैंड तक फैली थी |उप्पर का चित्र असल में celt लोगो का स्वस्तिक है जोकि सूर्य देव का प्रतिक था |यह यूरोप के चारो मौसमो को भी दर्शाता था ,बाद में यह चक्र या स्वस्तिक ईसायत ने अपनाया और इसके बिच में येसु को लगा दिया जिससे लगता की येसु को सूली पर धिकने की प्रथा ऐसे ही शुरू हुई या सूली यही से ही ली गयी थी



Christinity (

अब्रहमी धर्म वो धर्म होते है जिनमे अह्ब्रहम पैगम्बर के एक इश्वर को पूजा जाता है ,इसमें ईसायत,इस्लाम आदि धर्म आते है ,इनमे पुनर्जन्म को नहीं माना जाता पर ईसायत और कुछ अन्य अब्राह्मी धर्म पुनर्जन्म को मान्यता देते है |
अगर सबसे प्राचीन बाइबिल पड़े तो यह सामने आता है की येसु तिन दिन बाद जिन्दा होकर वापस नहीं आता और उसे सूली के साथ बताने की प्रथा बाद में आई |
मेरा मानना है की स्वस्तिक पुनर्जन्म दर्शाता है और इसीलिए येसु को स्वस्तिक या सूली के साथ दिखाया जाता है जिसका अर्थ है की येसु वापस लौटेंगे
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मिस्र और अमेरिका
मिस्र के पिरामिड


अमेरिका के पिरामिड
मिस्र और अमेरिका में स्वस्तिक का काफी प्रभुत्व रहा ,इन दोनों जगह के लोगो ने पिरामिड क्यों बनाये ये कोई नहीं जनता पर यह बात पता है की मिस्र और अमेरिका के लोग पिरामिड को पुनर्जन्म  से जोड़कर देखा करते थे |



प्राचीन मिस्र में ओसिरिस को पुनर्जन्म का देवता माना जाता था और हमेशा उसे चार हाथ वाले तारे के रूप में बताते साथ ही पिरामिड को सूली लिखकर दर्शाते


यह video देख आप समझ जायेंगे की पिरामिड असल में स्वस्तिक ही है

विडियो में आप पाएंगे की अगर आप स्वस्तिक के चारो हाथ जोड़ दे तो यह पिरामिड बनायेंग ,काफी चतुराई से मिस्र और अमेरिका के लोगो ने इसका उपयोग किया है |
आप ही सोचिये अगर पिरामिड स्वस्तिक नहीं होता तो मिस्र के लोग पिरामिड के लिए सूली या क्रॉस क्यों उपयोग करते ?

हिन्दू धर्म
मध्य से हर तरफ फैलती ब्रह्माण्ड की उर्जा















हिंदुत्व ,जैन और बोद्ध धर्म ये तीनो ही धार्मिक धर्मो में गिने जाते है और तीनो में स्वस्तिक महत्वपूर्ण है |
स्वस्तिक एक साथ कई बातें दर्शाता है हिंदुत्व में |
यह Celt सभ्यता की तरह ही सूर्य और चार मौसम दर्शाता है |
अगर गौर करे तो यह इस ब्रह्माण्ड के फैलाव को भी दर्शाता है साथ ही ब्रह्माण्ड के जन्म को जो की शुभ है |

We are collecting more info on Swastik.
As the whole world filled with this AMAZING SIGN.


Information Sabhaar : http://prachinsabyata.blogspot.in/2013/06/mystery-of-swastika-pyramids-and.html



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अदभूत व स्मरण्ीय विचित्र है चीन की विशाल दीवार

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 अदभूत व स्मरण्ीय विचित्र है चीन की विशाल दीवार (Wall of China - Wonders of Worls)

चीन की विशाल दीवार मिट्टी और पत्थर से बनी एक किलेनुमा दीवार है जिसे चीन के विभिन्न शासकों के द्वारा उत्तरी हमलावरों से रक्षा के लिए पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर सोलहवी शताब्दी तक बनवाया था।





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अजब गजब संसार (Ajab Gajab Sansaar)

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अजब गजब संसार (Ajab Gajab Sansaar)

विचित्र प्रकार के हवा में उडने वाले सांप,हरे रंग के सांप

मैंने आज जब प्रातः अपनी दुकान खोली तो मैने देखा मेरी दुकान के नजदीक ही एक जगह कुछ लोग घेरा लगाये हुए खड़े थे मुझ से भी रहा न गया में भी वहा देखने चला गया कि क्या हुआ क्या बात हुई वहां जाकर देखा तो पता चला वहां तो एक बंगाली बाबू अपनी जड़ीबुटियों से बनी दवाईयां बेच रहा था इन लोगों के पास अपनी दवाइय बेचने का तरीका बहुत ही लाजवाब होता है इनको पता है वैसे तो इनके पास लोग ठहरने वाले नहीं हैं इसलिए तो ये लोगों के अपनी  जादुई बातों में उलझाये रखते है। और दूसरे ये कुछ इस प्रकार कुछ विचित्र जीव जन्तु अपने साथ रखते जिन्हें दिखाकर ये लोगों की भीड़ इकट्ठा कर सके उस बंगाली बाबू के पास भी ऐसा ही मिला लेकिन उसके पास जो जीव थे वे वास्तव में ही अजीबोगरीब थे।


           मैने देखा तो मुझ से रहा नहीं गया मैने तुरन्त अपनी दुकान से कैमरा निकाला और उनके फोटो खिंच लिए आपके साथ शेयर करने के लिए।ये जीव थे दो प्रकार के सांप
एक हरे रंग के सांप
और दूसरा भुरे रंग का सांप 
उडने वाला सांप

वो लोगों को इन सोपों की ख़ासियत बता रहा था इनमें हरे रंग का साप बहुत ही सुन्दर लंग रहा था और इसकी खासियत भी बहुत ही अजीबो गरीब थी उसके बताये अनुसार यह सांप बंगाल,हेदराबाद,आसाम के जंगलों में पाया जाता है। और वहां के हरे घास और कटिली झाड़ियो में छुपा रहता है। और यह सांप आवश्यकतानुसार अपना रंग भी बदल सकता है। तथा बहुत ही जहरीला होता है। ये सांप बहुत ही पतला था और ये अपनी पूंछ के बल पर तीन फिट तक खड़ा हो सकता है। ये वहां हरी घास में छुपा रहता है और किसी इंसान या जानवर द्वारा दब जाने  या छेड़े जाने वर उसे काट लेता है। और काटा गया जीव या इंसान तुरन्त मर जाता है।
आपने शायद कभी हपले हरा सांप देखा हो लेकिन मैने तो ये इस प्रकार का हरा सांप पहली बार देखा था इसलिए मुझ से रहा नहीं गया मैने तुंरन्तइनके फोटो खिंच लिए ताकि मेरी तरह अगर किसी भाई ने न देखे हो उनके साथ शैयर कर दिखा सकूं।
 उसके पास पहाड़ी बिच्छू भी थे जो बहुत ही जहरीले होते है। उनके भी फोटो दिखाये गये है।

दूसरी अजीबो गरीब चीज थी उसके पास ये उडने वाला सांप जिसका नाम वह पदम सांप बता रहा था
जी उसने बताय कि ये सांप हवा में खुले वातावरण में उड भी सकता हैं और उड कर ही अपना शिकार कर अपना पेट भरता है। ये ज्यादा तर आसाम और पहाड़ी इलाके में पाया जाता है। ये अत्यधीक जहरीला होता हे। इसके काटने पर व्यक्ति पानी भी नहीं मांगता ऐसा कहा जाता हैं इसके बारे में ये कितना सच है ये तो मैं नहीं जानता लेकिन मैं उसके बताये अनुसार ही आपको बता रहा हू।
कुल मिलाकर उसका ये हरा और उडने वाला सांप लोगों के कोतुहल का कारण बना हुआ था हरे रंग के सांप के उपर अजगर जैसी धारियां बनी हुई है। और एक सांप तो उसके पास बहुत ही बारिक है। जो हल्के भूरे रंग का है। उसे बहुत ही गोर करके देखने पर ही दिखाई देता है।
बाकि उसके पास जड़ी बुटियों से बनी दवाइयाँ थी और उन्ही जड़िबुटियों से बना तेला था जो वह बेच रहा था मै। तो इन सब दवाओं में विश्वास नहीं करता इसलिए मैने उनकी तरफ ज्यादा ध्यान न  देकर उन जन्तुओं की

तरफ ही ज्यादा ध्यान दिया
हालाकि बहुत से लोगों ने वो तेल खरीदा भी मेरा तो मानना है कि इस प्रकार किसी अनजान बीना जानकारी के खेल दिखाने वाले व्यक्ति से ये दवाइयाँ लेना एक मूर्खता का काम है। 


बस इतना ही आगे फिर मिलते है। कही नहीं जाइयेगा पढ्रते रहिएगा

Source : sbhamboo. blogspot.in




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Saturday, October 18, 2014

SCIENCE HINDU RELIGION

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SCIENCE HINDU RELIGION

Mysteries Explored:
Shocking science behind Hindu traditions:
Courtesy - Aryavart
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Indian Customs Vs Scientific Reasons Traditions in Hinduism were considered mainly as superstitions, but with the advent of science, it is becoming evident that these traditions are based on some scientific knowledge and moved from generations to generations as traditions. Though the common people did not know science in it, they were following it very faithfully over the years. This blog is an attempt to bring forward the science involved in these traditions and rituals...
1. Throwing Coins into a River: The general reasoning given for this act is that it brings Good Luck. However, scientifically speaking, in the ancient times, most of the currency used was made of copper unlike the stainless steel coins of today. Copper is a vital metal very useful to the human body. Throwing coins in the river was one way our fore-fathers ensured we intake sufficient copper as part of the water as rivers were the only source of drinking water. Making it a custom ensured that all of us follow the practice.
2. Joining Both Palms together to Greet: In Hindu culture, people greet each other by joining their palms - termed as “Namaskar.” The general reason behind this tradition is that greeting by joining both the palms means respect. However, scientifically speaking, joining both hands ensures joining the tips of all the fingers together; which are denoted to the pressure points of eyes, ears, and mind. Pressing them together is said to activate the pressure points which helps us remember that person for a long time. And, no germs since we don’t make any physical contact!
3. Why do Indian Women wear Toe Ring: Wearing toe rings is not just the significance of married women but there is science behind it. Normally toe rings are worn on the second toe. A particular nerve from the second toe connects the uterus and passes to heart. Wearing toe ring on this finger strengthens the uterus. It will keep it healthy by regulating the blood flow to it and menstrual cycle will be regularized. As Silver is a good conductor, it also absorbs polar energies from the earth and passes it to the body.
4. Applying Tilak on the Forehead: On the forehead, between the two eyebrows, is a spot that is considered as a major nerve point in human body since ancient times. The Tilak is believed to prevent the loss of "energy", the red 'kumkum' between the eyebrows is said to retain energy in the human body and control the various levels of concentration. While applying kumkum the points on the mid-brow region and Adnya-chakra are automatically pressed. This also facilitates the blood supply to the face muscles.
5. Why do Temples have Bells: People who are visiting the temple should and will Ring the bell before entering the inner sanctum (Garbhagudi or Garbha Gruha or womb-chamber) where the main idol is placed. According to Agama Sastra, the bell is used to give sound for keeping evil forces away and the ring of the bell is pleasant to God. However, the scientific reason behind bells is that their ring clears our mind and helps us stay sharp and keep our full concentration on devotional purpose. These bells are made in such a way that when they produce a sound it creates a unity in the Left and Right parts of our brains. The moment we ring the bell, it produces a sharp and enduring sound which lasts for minimum of 7 seconds in echo mode. The duration of echo is good enough to activate all the seven healing centres in our body. This results in emptying our brain from all negative thoughts.
6. Why do we have Navratras: Our living style has drastically changed if we compare it to the society hundreds & thousands of years ago. The traditions which we follow in present are not establishments of today but of the past. Ever thought, why do we have Navratras twice a year unlike other festivals like Deepawali or Holi? Well, both these months are the months of changing seasons and the eating habits of both the seasons are quite different from each other. Navratras give enough time to the body to adjust and prepare itself for to the changing season. These nine days were marked as a period when people would clean their body system by keeping fasts by avoiding excessive salt and sugar, meditate, gain a lot of positive energy, gain a lot of self confidence & increase the self determination power (fasts are a medium to improve our will power and self determination) and finally get ready for the challenges of the changed season.
7. Why do we worship Tulsi Plant: Hindu religion has bestowed ‘Tulsi’, with the status of mother. Also known as ‘Sacred or Holy Basil’, Tulsi, has been recognized as a religious and spiritual devout in many parts of the world. The vedic sages knew the benefits of Tulsi and that is why they personified it as a Goddess and gave a clear message to the entire community that it needs to be taken care of by the people, literate or illiterate. We try to protect it because it is like Sanjeevani for the mankind. Tulsi has great medicinal properties. It is a remarkable antibiotic. Taking Tulsi everyday in tea or otherwise increases immunity and help the drinker prevent diseases, stabilize his or her health condition, balance his or her body system and most important of all, prolong his or her life. Keeping Tulsi plant at home prevents insects and mosquitoes from entering the house. It is said that snakes do not dare to go near a Tulsi plant. Maybe that is why ancient people would grow lots of Tulsi near their houses.
8. Why do we worship Peepal Tree: ‘Peepal’ tree is almost useless for an ordinary person, except for its shadow. ‘Peepal’ does not a have a delicious fruit, its wood is not strong enough for any purpose then why should a common villager or person worship it or even care for it? Our ancestors knew that ‘Peepal’ is one of the very few trees (or probably the only tree) which produces oxygen even at night. So in order to save this tree because of its unique property they related it to God/religion.
9. Start with Spice & End with Sweet: Our ancestors have stressed on the fact that our meals should be started off with something spicy and sweet dishes should be taken towards the end. The significance of this eating practice is that while spicy things activate the digestive juices and acids and ensure that the digestion process goes on smoothly and efficiently, sweets or carbohydrates pulls down the digestive process. Hence, sweets were always recommended to be taken as a last item.
10. Choti on the Male Head: Sushrut rishi, the foremost surgeon of Ayurveda, describes the master sensitive spot on the head as Adhipati Marma, where there is a nexus of all nerves. The shikha protects this spot. Below, in the brain, occurs the Brahmarandhra, where the sushumnã (nerve) arrives from the lower part of the body. In Yog, Brahmarandhra is the highest, seventh chakra, with the thousand-petalled lotus. It is the centre of wisdom. The knotted shikhã helps boost this centre and conserve its subtle energy known as ojas.
11. Applying Mehendi/Henna on the Hand: Besides lending color to the hands, mehndi is a very powerful medicinal herb. Weddings are stressful, and often, the stress causes headaches and fevers. As the wedding day approaches, the excitement mixed with nervous anticipation can take its toll on the bride and groom. Application of mehndi can prevent too much stress because it cools the body and keeps the nerves from becoming tense. This is the reason why mehndi is applied on the hands and feet, which house nerve endings in the body.
12. Celebration & Cleaning During Diwali: Diwali usually falls in October or November which marks the start of winter season and end of rainy season. Rainy season wasn't a good time for everyone back then; many homes needed repair and renovation after a heavy fall. That is why time before diwali was considered the period during which everyone can indulge in cleaning and beautification of their home. And also take out their winter clothes and pack the summer ones.
13. Sitting on the Floor & Eating: This tradition is not just about sitting on floor and eating, it is regarding sitting in the “Sukhasan” position and then eating. Sukhasan is the position we normally use for Yoga asanas. Sitting in this position while eating helps in improving digestion as the circulatory system can focus solely upon digestion and not on our legs dangling from a chair or supporting us while we are standing.
14. Why not to sleep with Your Head towards North: Myth is that it invites ghost or death but science says that it is because human body has its own magnetic field (Also known as hearts magnetic field, because the flow of blood) and Earth is a giant magnet. When we sleep with head towards north, our body's magnetic field become completely asymmetrical to the Earth's Magnetic field. That cause problems related to blood pressure and our heart needs to work harder in order to overcome this asymmetry of Magnetic fields. Apart from this another reason is that Our body have significant amount of iron in our blood. When we sleep in this position, iron from the whole body starts to congregate in brain. This can cause headache, Alzheimer’s Disease, Cognitive Decline, Parkinson disease and brain degeneration.
15. Surya Namaskar: Hindus have a tradition of paying regards to Sun God early in the morning by their water offering ritual. It was mainly because looking at Sun rays through water or directly at that time of the day is good for eyes and also by waking up to follow this routine, we become prone to a morning lifestyle and mornings are proven to be the most effective part of the day.
16. Ear Piercing in Children: Piercing the ears has a great importance in Indian ethos. Indian physicians and philosophers believe that piercing the ears helps in the development of intellect, power of thinking and decision making faculties. Talkativeness fritters away life energy. Ear piercing helps in speech-restraint. It helps to reduce impertinent behaviour and the ear-channels become free from disorders. This idea appeals to the Western world as well, and so they are getting their ears pierced to wear fancy earrings as a mark of fashion.
17. Application of Sindoor or Vermillion: It is interesting to note that that the application of sindoor by married women carries a physiological significance. This is so because Sindoor is prepared by mixing turmeric-lime and the metal mercury. Due to its intrinsic properties, mercury, besides controlling blood pressure also activates sexual drive. This also explains why Sindoor is prohibited for the widows. For best results, Sindoor should be applied right upto the pituitary gland where all our feelings are centered. Mercury is also known for removing stress and strain.
18. The scientific explanation of ouching Feet(charan sparsh): Usually, the person of whose feet you are touching is either old or pious. When they accept your respect which came from your reduced ego (and is called your shraddha) their hearts emit positive thoughts and energy (which is called their karuna) which reaches you through their hands and toes. In essence, the completed circuit enables flow of energy and increases cosmic energy, switching on a quick connect between two minds and hearts. To an extent, the same is achieved through handshakes and hugs. The nerves that start from our brain spread across all your body. These nerves or wires end in the fingertips of your hand and feet. When you join the fingertips of your hand to those of their opposite feet, a circuit is immediately formed and the energies of two bodies are connected. Your fingers and palms become the ‘receptor’ of energy and the feet of other person become the ‘giver’ of energy.
19. Why do we Fast: The underlying principle behind fasting is to be found in Ayurveda. This ancient Indian medical system sees the basic cause of many diseases as the accumulation of toxic materials in the digestive system. Regular cleansing of toxic materials keeps one healthy. By fasting, the digestive organs get rest and all body mechanisms are cleansed and corrected. A complete fast is good for heath, and the occasional intake of warm lemon juice during the period of fasting prevents the flatulence. Since the human body, as explained by Ayurveda, is composed of 80% liquid and 20% solid, like the earth, the gravitational force of the moon affects the fluid contents of the body. It causes emotional imbalances in the body, making some people tense, irritable and violent. Fasting acts as antidote, for it lowers the acid content in the body which helps people to retain their sanity. Research suggests there are major health benefits to caloric restriction like reduced risks of cancer, cardiovascular diseases, diabetes, immune disorders etc.
20. Why Idol Worship: Hinduism propagates idol worship more than any other religion. Researchers say that this was initiated for the purpose of increasing concentration during prayers. According to psychiatrists, a man will shape his thoughts as per what he sees. If you have 3 different objects in front of you, your thinking will change according to the object you are viewing. Similarly, in ancient India, idol worship was established so that when people view idols it is easy for them to concentrate to gain spiritual energy and meditate without mental diversion.
21. Why do Indian Women wear Bangles: Normally the wrist portion is in constant activation on any human. Also the pulse beat in this portion is mostly checked for all sorts of ailments. The Bangles used by women are normally in the wrist part of ones hand and its constant friction increases the blood circulation level. Further more the electricity passing out through outer skin is again reverted to one's own body because of the ring shaped bangles, which has no ends to pass the energy outside but to send it back to the body.
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Friday, October 17, 2014

काला धन रखने वालों के नाम नहीं बता सकते: केंद्र

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BLACK MONEY :काला धन रखने वालों के नाम नहीं बता सकते: केंद्र

BLACK MONEY AND CORRUPTION IN INDIA IS WIDE SPREAD, AND GOVT SHOULD TAKE STRONG ACTION ON BLACK MONEY ISSUE.


BLACK MONEY KUCH CHAND LAKH LOGON KE PASS 90% HAI, AUR UN SE START KIYA  JAA SAKTAA HAI.

AGAR TOP 10 HAZAAR LOGON KO HEE PAKAD LIYAA JAYE TO HEE DESH KEE GAREEBEE MIT JAYEGEE



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Blog Vichaar : आखिर काला धन को राष्ट्रिय संपत्ति घोषित करने का कानून क्यों नहीं ?

बाबा रामदेव तो कहते थे कि काला  धन को राष्ट्रिय संपत्ति घोषित करने का कानून बना देना चाहिए,
और इसके लिए उन्होंने अनशन भी राम लीला मैदान में किया ,
वो कहते थे की केंद्र सरकार लिखित में उनको आश्वाशन दे ।

कहते थे की 4 लाख करोड़ से ज्यादा धन विदेशों में जमा  है , और हमें सालों कोई टैक्स नहीं देना पडेगा , और काल धन अगर देश में आ जाये तो देश के गाँव  की  सड़कें भी कोंक्रीट की होंगी , देश जगमगा उठेगा ।

बैंक ट्रांसेक्शन टैक्स की बात कही लेकिन अब तो बदलाव आना चाहिए ।
रामदेव जी कहते थे की हम शर्तों के आधार पर समर्थन दे  रहे हैं

हालाँकि मोदी जी इस समय काफी सारे बेहतरीन काम कर रहे हैं - श्रमेव जयते कार्यक्रम के द्वारा मजदूर वर्ग की सामाजिक सुरक्षा पर जोर दिया है ,
पड़ोसियों से समबन्ध सुधारने और व्यापर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है , आदि आदि
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मोदी सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विदेशी बैंकों में काला धन रखने वाले भारतीय खातेदारों के नाम का खुलासा नहीं किया जा सकता। सरकार का कहना है कि खाताधारकों का नाम सार्वजनिक करना संबंधित देशों के साथ  दोहरे कराधान से बचने के लिए किए गए समझौते का उल्लंघन होगा

इन संधियों के मुताबिक सदस्य देश उन खातेदारों के नाम का खुलासा नहीं कर सकते, जिनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। केंद्र ने मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की पीठ के समक्ष दाखिल अपनी अर्जी में ये बातें कहीं।
सुप्रीम कोर्ट आदेश वापस ले: पिछले दिनों कोर्ट ने सरकार से कहा था कि वह उन लोगों के नाम बताए जिनके खाते स्विस बैंकों में हैं। इसी आदेश को वापस करवाने के लिए सरकार कोर्ट आई है

जेठमलानी का विरोध : याचिकाकर्ता और वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने इस अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार उन लोगों को बचाना चाहती है जिन्होंने विदेशों में काला धन जमा कर रखा है। सुप्रीम कोर्ट केंद्र की अर्जी पर 28 को सुनवाई करेगा।

इसलिए पेच फंसा : अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जर्मन सरकार ने जर्मनी के लींचेंस्टाइन बैंक के खातेदारों के नाम का खुलासा करने का कड़ा विरोध किया है। सरकार दिसंबर में कई अन्य देशों से इस तरह की दोहरी कर बचाव संधि करने जा रही है। यदि ऐसे लोगों के नाम का खुलासा किया गया जिन पर कानूनी कार्रवाई नहीं हो रही है तो सरकार के वे विदेशी स्रोत खत्म हो जाएंगे जो विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन की सूचना देते हैं।




News Sabhaar : livehindustan.com (18.10.14)

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स्विट्जरलैंड काले धन का ब्योरा देने को तैयार

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को बताया कि स्विट्जरलैंड एचएसबीसी और लिस्टनस्टाइन में अवैध धन जमा कराने वाले भारतीयों की सूचनाएं भारत को देने को तैयार है, बशर्ते भारतीय अधिकारी संबंधित मामले में अपनी ओर से जुटाए गए स्वतंत्र साक्ष्य पेश कर सकें। स्विस सरकार भारतीयों के विदेशी खातों पर खुफिया एजेंसियों की ओर से पेश ब्यौरे की 'सत्यता' की पुष्टि को भी तैयार है।

जेटली ने कहा कि भारत सरकार विदेशी सरकारों से टैक्स संबंधी सूचनाएं हासिल करने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। विदेशों में रखा गया काला धन भारत वापस लाया जाएगा। उनके मुताबिक, स्विटजरलैंड और भारत के अधिकारियों की इसी हफ्ते हाई लेवल मीटिंग हुई। जिसके बाद स्विस सरकार ने बैंकिंग सूचनाओं पर भारत की अर्जियों के बारे में प्राथमिकता के आधार पर और समयबद्ध तरीके से मदद करने पर सहमति जताई है। इससे पहले स्विस सरकार ने लिस्ट में उल्लिखित नामों से जुड़ी कोई सूचना देने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि नामों की ये लिस्ट चुराए गए आंकड़ों पर आधारित है। जेटली ने कहा कि ये लिस्ट दरअसल अन्य देशों से समुचित माध्यमों के जरिए प्राप्त की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में पेश रुख पर सफाई देते हुए जेटली ने कहा कि हमें नामों को सार्वजनिक करने में कोई दिक्कत नहीं है

News Sabhaar : navbharattimes.indiatimes.com (18.10.14)
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Information from A Facebook Page :

Swiss bank revealed India has more money than rest of the world.


This is so shocking.. ..If black money deposits was an Olympics event..
India would have won a gold medal hands down. The second best Russia has
4 times lesser deposit. U.S. is not even there in the counting in top five! India has more money in Swiss banks than all the other countries combined!


Recently, due to international pressure, the Swiss government agreed to disclose the names of the account holders only if the respective governments formally asked for it.. Indian government is not asking for the details... ..no marks for guessing why?


We need to start a movement to pressurize the government to do so! This is perhaps the only way, and a golden opportunity, to expose the high and mighty and weed out corruption!

.Please read on..and forward to all the honest Indians to..
like somebody is forwarding to you... and build a ground-swell of support!for action !

.Is India poor, who says? Ask the Swiss banks. With personal account deposit bank of $1,500 billion in foreign reserve which have been misappropriated, an amount 13 times larger than the country's foreign debt, one needs to rethink if India is a poor country?

 DISHONEST INDUSTRIALISTS, scandalous politicians and corrupt IAS, IRS, IPS officers have deposited in foreign banks in their illegal personal accounts a sum of about $1500 billion, which have been misappropriated by them. This amount is about 13 times larger than the country's foreign debt. With this amount 45 crore poor people can get Rs 1,00,000 each.

 This huge amount has been appropriated from the people of India by exploiting and betraying them. Once this huge amount of black money and property comes back to India , the entire foreign debt can be repaid in 24 hours. After paying the entire foreign debt, we will have surplus amount, almost 12 times larger than the foreign debt. If this surplus amount is invested in earning interest, the amount
of interest will be more than the annual budget of the Central government. So even if all the taxes are abolished, then also the Central government will be able to maintain the country very comfortably.

 Some 80,000 people travel to Switzerland every year, of whom 25,000 travel very frequently. 'Obviously, these people won't be tourists..

They must be travelling there for some other reason,' believes an official involved in tracking illegal money.. And, clearly, he isn't referring to the commerce ministry bureaucrats who've
been flitting in and out of Geneva ever since the World Trade Organisation (WTO) negotiations went into a tailspin!

 Just read the following details and note how these dishonest industrialists, scandalous politicians, corrupt officers, cricketers, film actors, illegal trade and protected wildlife operators, to name
just a few, sucked this country's wealth and prosperity.

This may be the picture of deposits in Swiss banks only. What about other international banks ?

Black money in Swiss banks - Swiss Banking Association report, 2006 details bank deposits in the territory of Switzerland by nationals of following countries :

 TOP FIVE
INDIA $1,456 BILLION
RUSSIA $470 BILLION
U.K. $390 BILLION
UKRAINE $100 BILLION
CHINA $96 BILLION



Now do the math's - India with $1,456 billion or $1.4 trillion has more money in Swiss banks than rest of the world combined. Public loot since 1947:

 Can we bring back our money ? It is one of the biggest loots witnessed by mankind - the loot of the Aam Aadmi (common man) since 1947, by his brethren occupying public office. It has been orchestrated by politicians, bureaucrats and some businessmen.


The list is almost all-encompassing. No wonder, everyone in India loots with impunity and without any fear. What is even more depressing in that this ill-gotten wealth of ours has been stashed away abroad into secret bank accounts located in some of the world's best known tax havens. And to that extent the Indian economy has been stripped of its wealth. Ordinary Indians may not be exactly aware of how such secret accounts operate and what are the rules and regulations that go on to govern such tax havens. However, one may well be aware of 'Swiss bank accounts,' the shorthand for murky dealings, secrecy and of course pilferage from developing countries into rich developed ones.

 In fact, some finance experts and economists believe tax havens to be a conspiracy of the western world against the poor countries. By allowing the proliferation of tax havens in the twentieth century, the western world explicitly encourages the movement of scarce capital from the developing countries to the rich. In March 2005, the Tax Justice Network (TJN) published a research finding
demonstrating that $11.5 trillion of personal wealth was held offshore by rich individuals across the globe.

 The findings estimated that a large proportion of this wealth was managed from some 70 tax havens. Further, augmenting these studies of TJN, Raymond Baker - in his widely celebrated book titled
'Capitalism' s Achilles Heel: Dirty Money and How to Renew the Free Market System' - estimates that at least $5 trillion have been shifted out of poorer countries to the West since the mid-1970.

 It is further estimated by experts that one per cent of the world's population holds more than 57 per cent of total global wealth, routing it invariably through these tax havens.

 How much of this is from India is anybody's guess ...????

if India is doing like this the annual tern over will be less and our market will have to close down (BSE\NSE)

we have to trace out the black money when the polities have kept ? where there they use ? but they don't have correct tax details . all are illegal only

Source : facebook.com/notes/i-love-my-india/total-black-money-in-india-must-read-share-on-your-wall/10150217260858658




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Wednesday, October 15, 2014

WALL PAPERS OF LORD KRISHNA

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