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Saturday, October 8, 2016

must read full story​ कछुआ और खरगोश की नयी कहानी जो आपने कभी नहीं सुनी होगी ।


must read full story​
कछुआ और खरगोश की नयी कहानी जो आपने कभी नहीं सुनी होगी ।
आपने कछुए और खरगोश की कहानीज़रूर सुनी होगी, just to remind you; short में यहाँ बता देता हूँ:
एक बार खरगोश को अपनी तेज चाल पर घमंड हो गया और वो जो मिलता उसे रेस लगाने के लिए challenge करता रहता।
कछुए ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली। रेस हुई। खरगोश तेजी से भागा और काफी आगे जाने पर पीछे मुड़ कर देखा, कछुआ कहीं आता नज़र नहीं आया, उसने मन ही मन सोचा कछुए को तो यहाँ तक आने में बहुत समय लगेगा, चलो थोड़ी देर आराम कर लेते हैं, और वह एक पेड़ के नीचे लेट गया। लेटे-लेटे कब उसकी आँख लग गयी पता ही नहीं चला।
उधर कछुआ धीरे-धीरे मगर लगातार चलता रहा। बहुत देर बाद जब खरगोश की आँख खुली तो कछुआ फिनिशिंग लाइन तक पहुँचने वाला था। खरगोश तेजी से भागा,
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कछुआ रेस जीत गया।
_Moral of the story: Slow and steady wins the race_
_धीमा और लगातार चलने वाला रेस जीतता है_
ये कहानी तो हम सब जानते हैं, अब आगे की कहानी देखते हैं:
रेस हारने के बाद खरगोश निराश हो जाता है, वो अपनी हार पर चिंतन करता है और उसे समझ आता है कि वो over-confident होने के कारण ये रेस हार गया…उसे अपनी मंजिल तक पहुँच कर ही रुकना चाहिए था।अगले दिन वो फिर से कछुए को दौड़ की चुनौती देता है। कछुआ पहली रेस जीत कर आत्मविश्वाश से भरा होता है और तुरंत मान जाता है।
रेस होती है, इस बार खरगोश बिना रुके अंत तक दौड़ता जाता है, और कछुए को एक बहुत बड़े अंतर से हराता है।
_Moral of the story: Fast and consistent will always beat the slow and steady_
_तेज और लगातार चलने वाला धीमे और लगातार चलने वाले से हमेशा जीत जाता है।_
*यानि slow and steady होना अच्छा है लेकिन fast and consistent होना और भी अच्छा है*
कहानी अभी बाकी है जी….
इस बार कछुआ कुछ सोच-विचार करता है और उसे ये बात
समझ आती है कि जिस तरह से अभी रेस हो रही है वो
कभी-भी इसे जीत नहीं सकता।
वो एक बार फिर खरगोश को एक नयी रेस के लिए चैलेंज
करता है, पर इस बार वो रेस का रूट अपने मुताबिक रखने
को कहता है। खरगोश तैयार हो जाता है।
रेस शुरू होती है। खरगोश तेजी से तय स्थान की और
भागता है, पर उस रास्ते में एक तेज धार नदी बह रही होती
है, बेचारे खरगोश को वहीँ रुकना पड़ता है। कछुआ धीरे-
धीरे चलता हुआ वहां पहुँचता है, आराम से नदी पार करता
है और लक्ष्य तक पहुँच कर रेस जीत जाता है।
_Moral of the story: Know your core competencies and work accordingly to succeed_
_पहले अपनी strengths को जानो और उसके मुताबिक काम करो जीत ज़रुर मिलेगी_
कहानी अभी भी बाकी है जी …..
इतनी रेस करने के बाद अब कछुआ और खरगोश अच्छे दोस्त
बन गए थे और एक दुसरे की ताकत और कमजोरी समझने लगे
थे। दोनों ने मिलकर विचार किया कि अगर हम एक दुसरे
का साथ दें तो कोई भी रेस आसानी से जीत सकते हैं।
इसलिए दोनों ने आखिरी रेस एक बार फिर से मिलकर
दौड़ने का फैसला किया, पर इस बार as a competitor
नहीं बल्कि संघठित होकर काम करने का निश्चय लिया।
दोनों स्टार्टिंग लाइन पे खड़े हो गए….get set go…. और
तुरंत ही खरगोश ने कछुए को ऊपर उठा लिया और तेजी से
दौड़ने लगा। दोनों जल्द ही नहीं के किनारे पहुँच गए। अब
कछुए की बारी थी, कछुए ने खरगोश को अपनी पीठ
बैठाया और दोनों आराम से नदी पार कर गए। अब एक
बार फिर खरगोश कछुए को उठा फिनिशिंग लाइन की
ओर दौड़ पड़ा और दोनों ने साथ मिलकर रिकॉर्ड टाइम
में रेस पूरी कर ली। दोनों बहुत ही खुश और संतुष्ट थे, आज से
पहले कोई रेस जीत कर उन्हें इतनी ख़ुशी नहीं मिली थी।
_Moral of the story:
संगठित कार्य हमेशा व्यक्तिगत प्रदर्शन से बेहतर होता है_
*Individually चाहे आप जितने बड़े performer हों लेकिन अकेले दम पर हर मैच नहीं जीता सकते अगर लगातार जीतना है तो आपको संघठन में काम करना सीखना होगा, आपको अपनी काबिलियत के आलावा दूसरों की ताकत को भी समझना होगा। और जब जैसी situation हो, उसके हिसाब से संघठन की strengths को use करना होगा*



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Monday, July 25, 2016

कोई व्यक्ति… एक बार गलती करें तो – कोई बात नहीं!!


कोई व्यक्ति…
एक बार गलती करें तो – कोई बात नहीं!!
दो बार गलती करें तो – होता है, इंसान है!!
तीसरी बार गलती करें तो – इनसे दूर ही रहना!!
क्योकि ये उसकी गलती नहीं आदत है!



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Thursday, July 14, 2016

अज्ञानता

अज्ञानता


एक जौहरी था उसके देहांत के बाद उसके परिवार पर बहुत बड़ा सन्कट आ गया।
खाने के भी लाले पड गए एक दिन उसकी पत्नी न अपने बेटे को एक नीलम का हार दे कर कहा बेटा इसे अपने चाचा की दुकान पर लेकर जाओ और कहना कि इसे बेच कर कुछ रुपए दो वह उस हार को लेकर चाचा जी के पास गया।
चाचा जी ने हार को अच्छी तरह से देख परख कर कहा कि बेटा अपनी माँ से कहना कि अभी बाज़ार बहुत मन्दा हैं थोड़ा रुककर बेचना अच्छे दाम मिलेगे और थोड़े से रुपये देकर कहा कि तुम कल से दुकान पर आ कर बैठना। अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान पर जाने लगा और वहां पर हीरो की परख करने लगा एक दिन वह हीरो का बहुत बड़ा पारखी बन गया लोग दूर दूर से अपने हीरो की परख कराने आने लगे।एक दिन उसके चाचा जी ने कहा कि बेटा अपनी माँ से वह हार लेकर आना और कहना कि अब बाज़ार बहुत तेज है उसके अब अच्छे दाम मिल जाएगे ।बेटा हार लेने घर गया और मा से हार लेकर परख कर देखा कि यह तो artificial हैं और उसको घर पर ही छोड़ कर वापस लौट आया तो चाचा जी ने पूछा कि हार नहीं लाए तो उसने कहा कि वह हार तो नकली था। तब चाचा जी ने कहा कि जब पहली बार लेकर आए थे अगर मैं उस समय हार को नकली बताता तो तुम सोचते कि आज हम पर बुरा वक्त आया तो हमारी चीज़ को नकली बताने लगे आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो पता चल गया कि यह नकली हैं इससे हमें यही शिक्षा मिलती है कि ज्ञान के बिना इस सन्सार मे हम जो भी सोचते हैं देखते हैं जानते हैं सब गलत है अगर हम दुखि हैं या अभाव ग्रस्त है तो इसका एक ही कारण है अज्ञानता अज्ञान के ही कारण डर हैं सब कुछ पाना आसान है दुर्लभ है सन्सार मे एक यथार्थ ज्ञान।



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Friday, April 22, 2016

Must Read Story एक पिता अपने बेटे के साथ पहाड़ों की सैर पर निकला। अचानक बेटा गिर गया। चोट लगने पर उसके मुंह से निकला , ' आह !

Must Read Story

एक पिता अपने बेटे के साथ पहाड़ों की सैर पर निकला। अचानक बेटा गिर गया।
चोट लगने पर उसके मुंह से निकला , ' आह !!!'
तुरंत पहाड़ों में से कहीं - से आवाज आई - ' आह !!!'

बेटा अचरज में रह गया। उसने फौरन पूछा - तुम कौन हो ?
 सामने से वही सवाल आया , ' तुम कौन हो ?'

 बेटा चिल्लाया , ' मैं तुम्हारी तारीफ करता हूं !'

पहाड़ों से जवाब आया , ' मैं तुम्हारी तारीफ करता हूं !'

अपनी बात की नकल करते देखकर बेटा गुस्से में चिल्लाया , 'डरपोक !'
जवाब मिला , ' डरपोक !'

उसने पिता की ओर देखा और पूछा , ' यह क्या हो रहा है ?'

पिता ने मुस्कुराते हुए कहा ,' बेटा , जरा ध्यान दो। '

इसके बाद पिता चिल्लाया , ' तुम चैंपियन हो !'

जवाब मिला , ' तुम चैंपियन हो !'
बेटे को हैरानी हुई लेकिन वह कुछ समझ नहीं सका।

इस पर पिता ने उसे समझाया , ' लोग इसे गूंज ( इको ) कहते हैं , लेकिन वास्तव में यह जिंदगी है। '

यह आपको हर चीज़ वापस लौटाती है , जो आप कहते हैं या करते हैं।

हमारी जिंदगी हमारे कामों का ही प्रतिबिंब है। अगर आप दुनिया में ज्यादा प्यार पाना चाहते हैं तो अपने दिल में ज्यादा #प्यार पैदा करें। अगर अपनी टीम में ज्यादा काबिलियत चाहते हैं
तो अपनी काबिलियत को बढ़ाएं। यह संबंध जिंदगी के हर पहलू , हर चीज में नजर आता है



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Sunday, November 29, 2015

माला की तारीफ़ तो करते हैं सब, क्योंकि मोती सबको दिखाई देते हैं..

माला की तारीफ़ तो करते हैं सब,
क्योंकि मोती सबको दिखाई देते हैं..
काबिले तारीफ़ धागा है जनाब जिसने सब को जोड़ रखा है.,,







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Wednesday, September 9, 2015

एक दर्जी का बेटा एक दिन अपने अपने पिता की दुकान पर चला गया

एक दर्जी का बेटा एक दिन अपने अपने पिता की दुकान
पर चला गया
वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पिता को काम करते
हुए देखने लगा...
उसने देखा कि उसके पिता कैंची से कपड़े को काटते हैं
और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं ..
फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सुई
को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं ।जब उसने
इसी क्रिया को चार-पाँच बार देखा तो उससे
रहा नहीं गया, तो उसने अपने पिता से कहा कि वह एक
बात उनसे पूछना चाहता है?
पिता ने कहा-बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो ?
बेटा बोला- मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं , आप जब
भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे
दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर
लगा लेते हैं, ऐसा क्यों ?
इसका जो उत्तर पिता ने दिया- उन दो पंक्तियों में
मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया ..
उत्तर था- ” बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और
सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह
हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह
हमेशा ऊपर होती है यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर
लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं.,.................



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Wednesday, March 18, 2015

UNITY IS STRENGTH

#UNITY IS STRENGTH
EKTA MEIN SAKTI HAI






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Friday, February 13, 2015

#FACT #USEFUL #MORAL BREAVEST STRONGEST HAPPIEST

#FACT #USEFUL #MORAL BREAVEST STRONGEST HAPPIEST




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Sunday, October 26, 2014

Gautam Budda Prerak Prasang

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 Gautam Budda Prerak Prasang
 
एक बार वैशाली के बाहर जाते धम्म प्रचार के लिए जाते हुए गौतम बुद्ध ने देखा कि कुछ सैनिक तेजी से भागती हुयी एक लड़की का पीछा कर रहे हैं। वह डरी हुई लड़की एक कुएं के पास जाकर खड़ी हो गई। वह हांफ रही थी और प्यासी भी थी। बुद्ध ने उस बालिका को अपने पास बुलाया और कहा कि वह उनके लिए कुएं से पानी निकाले, स्वयं भी पिए और उन्हें भी पिलाये। इतनी देर में सैनिक भी वहां पहुँच गये। बुद्ध ने उन सैनिकों को हाथ के संकेत से रुकने को कहा।

उनकी बात पर वह कन्या कुछ झेंपती हुई बोली ‘महाराज! मै एक अछूत कन्या हूँ। मेरे कुएं से पानी निकालने पर जल दूषित हो जायेगा।’

बुद्ध ने उस से फिर कहा ‘पुत्री, बहुत जोर की प्यास लगी है, पहले तुम पानी पिलाओ।’

इतने में वैशाली नरेश भी वहां आ पहुंचे। उन्हें बुद्ध को नमन किया और सोने के बर्तन में केवड़े और गुलाब का सुगन्धित पानी पानी पेश किया। बुद्ध ने उसे लेने से इंकार कर दिया। बुद्ध ने एक बार फिर बालिका से अपनी बात कही। इस बार बालिका ने साहस बटोरकर कुएं से पानी निकल कर स्वयं भी पिया और गौतम बुद्ध को भी पिलाया। पानी पीने के बाद बुद्ध ने बालिका से भय का कारण पूछा। कन्या ने बताया मुझे संयोग से राजा के दरबार में गाने का अवसर मिला था। राजा ने मेरा गीत सुन मुझे अपने गले की माला पुरस्कार में दी। लेकिन उन्हें किसी ने बताया कि मै अछूत कन्या हूँ। यह जानते ही उन्होंने अपने सिपाहियों को मुझे कैद खाने में डाल देने का आदेश दिया। मै किसी तरह उनसे बचकर यहाँ तक पहुंची थी।

इस पर बुद्ध ने कहा, सुनो राजन! यह कन्या अछूत नहीं है, आप अछूत हैं। जिस बालिका के मधुर कंठ से निकले गीत का आपने आनंद उठाया, उसे पुरस्कार दिया, वह अछूत हो ही नहीं सकती। गौतम बुद्ध के सामने वह राजा लज्जित ही हो सकते थे


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Tuesday, February 4, 2014

मजदूर पत्थर के खंभे बना रहे थे

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एक गांव में कुछ मजदूर पत्थर के खंभे बना रहे थे। उधर से एक साधु गुजरे।
उन्होंने एक मजदूर से पूछा- यहां क्या बन
रहा है?
उसने कहा- देखते नहीं पत्थर काट रहा हूं?
साधु ने कहा- हां, देख तो रहा हूं। लेकिन
यहां बनेगा क्या?
मजदूर झुंझला कर बोला- मालूम नहीं।
यहां पत्थर तोड़ते- तोड़ते जान निकल रही है
और इनको यह चिंता है कि यहां क्या बनेगा।
साधु आगे बढ़े। एक दूसरा मजदूर मिला। साधु
ने पूछा- यहां क्या बनेगा? मजदूर बोला-
देखिए साधु बाबा, यहां कुछ भी बने। चाहे
मंदिर बने या जेल, मुझे क्या। मुझे तो दिन भर
की मजदूरी के रूप में १०० रुपए मिलते हैं। बस
शाम को रुपए मिलें और मेरा काम बने। मुझे
इससे कोई मतलब नहीं कि यहां क्या बन
रहा है।
साधु आगे बढ़े तो तीसरा मजदूर मिला। साधु
ने उससे पूछा- यहां क्या बनेगा? मजदूर ने
कहा- मंदिर। इस गांव में कोई बड़ा मंदिर
नहीं था। इस गांव के लोगों को दूसरे गांव में
उत्सव मनाने जाना पड़ता था। मैं
भी इसी गांव का हूं। ये सारे मजदूर इसी गांव
के हैं।
मैं एक- एक छेनी चला कर जब
पत्थरों को गढ़ता हूं तो छेनी की आवाज में
मुझे मधुर संगीत सुनाई पड़ता है। मैं आनंद में
हूं। कुछ दिनों बाद यह मंदिर बन कर तैयार
हो जाएगा और यहां धूमधाम से पूजा होगी।
मेला लगेगा। कीर्तन होगा। मैं यही सोच कर
मस्त रहता हूं।
मेरे लिए यह काम, काम नहीं है। मैं हमेशा एक
मस्ती में रहता हूं। मंदिर बनाने की मस्ती में।
मैं रात को सोता हूं तो मंदिर की कल्पना के
साथ और सुबह जगता हूं तो मंदिर के
खंभों को तराशने के लिए चल पड़ता हूं। बीच-
बीच में जब ज्यादा मस्ती आती है तो भजन
गाने लगता हूं। जीवन में इससे ज्यादा काम
करने का आनंद कभी नहीं आया।
साधु ने कहा- यही जीवन का रहस्य है मेरे
भाई। बस नजरिया का फर्क है। कोई काम
को बोझ समझ रहा है और पूरा जीवन
झुंझलाते और हाय- हाय करते बीत जाता है।
लेकिन कोई काम को आनंद समझ कर जीवन
का लुत्फ ले रहा है। जैसे तुम
 

नफरत

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एक बार एक गुरु ने अपने सभी शिष्यों से
अनुरोध
किया कि
वे कल प्रवचन में आते समय अपने साथ एक
थैली में बड़े-बड़े आलू साथ लेकर आएं। उन
आलुओं पर उस
व्यक्ति का नाम लिखा होना चाहिए,
जिनसे वे
ईर्ष्या करते हैं। जो शिष्य जितने
व्यक्तियों से
ईर्ष्या करता है, वह उतने आलू लेकर आए।
अगले दिन सभी शिष्य आलू लेकर आए।
किसी के
पास
चार आलू थे तो किसी के पास छह। गुरु ने
कहा कि अगले सात दिनों तक ये आलू वे
अपने
साथ
रखें।
जहां भी जाएं, खाते-पीते, सोते-जागते, ये
आलू
सदैव साथ रहने चाहिए।
शिष्यों को कुछ समझ में
नहीं आया, लेकिन वे क्या करते, गुरु
का आदेश
था।
दो-चार दिनों के बाद ही शिष्य आलुओं
की बदबू
से
परेशान हो गए। जैसे-तैसे उन्होंने सात दिन
बिताए और गुरु के पास पहुंचे।
गुरु ने कहा, 'यह सब
मैंने आपको शिक्षा देने के लिए किया था।
जब मात्र सात दिनों में आपको ये आलू बोझ
लगने
लगे, तब सोचिए कि आप जिन व्यक्तियों से
ईर्ष्या करते हैं, उनका कितना बोझ आपके
मन
पर
रहता होगा। यह ईर्ष्या आपके मन पर
अनावश्यक
बोझ डालती है, जिसके कारण आपके मन में
भी बदबू
भर जाती है, ठीक इन आलूओं की तरह।
इसलिए
अपने
मन से गलत भावनाओं को निकाल दो,
यदि किसी से प्यार नहीं कर सकते तो कम
से
कम
नफरत तो मत करो। इससे आपका मन
स्वच्छ
और
हल्का रहेगा।
' यह सुनकर सभी शिष्यों ने आलुओं के
साथ-साथ अपने मन से
ईर्ष्या को भी निकाल
फेंका..
 

Must Read : महिला के बेटे की शादी हुई.

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Must Read : महिला के बेटे की शादी हुई.

एक महिला के बेटे की शादी हुई. शादी के कुछ
महीनों बाद एक दिन पड़ोसन ने उस महिला से
पूछा – “कैसी है तुम्हारी बहू ?”
महिला बोली – “बहुत ही बुरी … रोज़ देर से
सोकर उठती है और मेरा बेटा उसके लिए चाय
बनाता है … घर का कोई काम नहीं करती और
जब देखो मेरे बेटे से बाहर खाना खाने के लिए
कहती रहती है ! मैं तो कहती हूँ ऐसी बहू
किसी को ना मिले !”
.
.
कुछ समय बाद उस
महिला की बेटी की भी शादी हो गई. अबकी बार
पड़ोसन ने पूछा – “कैसा है तुम्हारा दामाद ?”
महिला चहक कर बोली – “दामाद जी तो बहुत
ही अच्छे हैं ! … मेरी बेटी तो मानो राज कर
रही है राज ! … रोज सुबह अपने हाथों से चाय
बनाकर मेरी बेटी को देते हैं और घर का कोई
काम नहीं करने देते…. जब
भी मेरी बेटी का जी चाहे तब बाहर खाना खिलाने
और घुमाने ले जाते हैं … भगवान करे
ऐसा दामाद सबको मिले !!!”

 

8 Saal Ke Bachhe Ki Maa

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Ek 8 Saal Ke Bachhe Ki Maa

Mar Jati HaiN.

Ek Din Uske Papa Ne Poocha

Ki Beta Tujhe Apni Nayi Maa

Aur Mari Hui Maa MeiN Kya

Fark Laga,,,,,,,,???

ToH WoH Ladka Bola :

"Meri Nayi Maa Sachhi HaiN

Aur Mari Hui Maa Jhooti

Thi,,,,,,,!!!! "

YeH Sunke Us Aadmi Ko

Jhatka Sa Laga Aur Bola :

" KyuN Beta……Aisa KyuN

Lagta HaiN,,,,,,,,,???? Jisne

Tujhe Janam Diya WoH

Jhooti Aur KaL Aayi Hui

Maa Sachhi Kyu Lagti

HaiN,,,,,???? "

Ladka Bola, :

" Jab MaiN Masti Karta Tha,

Tab Maa Kehti Thi : "Agar Tu

Isi Tarah Masti Karega ToH,

Tujhe Khana NahiN Doongi "

MaiN Fir Bhi Bahut Masti

Karta Rehta Aur Mujhe

Poore Gaon Se Dhund Kar

Laati. Apne Paas Bethakar

Apne HaathoN Se, Khana

Khilati Thi,,,,,,,,!!! "

Aur Yeh Nayi Maa Kehti

Hain Ki : "Agar Tu Isi Tarah

Masti Karega Toh, Tujhe

Khana Nahin Doongi,,,,,,!!! "

AUR

SACH Mein Usne Aaj Mujhe

Teen Din Se Khana Nahin

Diya,,,,,,,!!!! "

Must Share,,,,,,,

MAA Tab Bhi Roti Thi,

Jab Beta Pet MeiN Laat

Maarta Tha,,,,,,

.

MAA Tab Bhi Roti Thi,

Jab Beta Gir Jaata Tha.

.

MAA Tab Bhi Roti Thi,

Jab Beta Bukhaar Ya

Sardi MeiN Tadapta Tha.

.

MAA Tab Bhi Roti Thi,

Jab Beta Khaana NahiN

Khaata Tha,,,,,,

.

Aur,

.

" MAA Aaj Bhi Roti HaiN,

Jab Beta KHAANA NahiN

Deta,,,,,,,!!! "

DostoN,,,,,

Isko Itna forward karo ki

koi MAA kabhi bhuki Na

Soye. Aur Uske Aankh Se

Ek QATRA Paani Na Aaye,,,,,

If You Love Your Mom

Then Forward This.

I LOVE MY MOM.

WoH bhi kya din the

" MUMMY " Ki Godh Aur

" PAPA " Ke Kandhe,,,,,,,,

Na Paise Ki Soch

Na Life Ke Funde,,,,,,

Na KaL Ki Chinta

Na Future Ke Sapne,,,,,,

Ab KaL Ki HaiN Fikar Aur

Adhure HaiN Sapne,,,,,,

MudH Kar Dekha Toh Bahut

Door HaiN Apne,,,,,,,

Manzilo ko dhundte kaha

kho Gaye Hum,

Aakhir, Itne bade kyun Ho

Gaye Hum,,,,,,,,,!!

Din Bhar Kaam Ke Baad

PAPA Poochte HaiN Ki,,,,,,

,,,,,,,,Kitna Kamaya,,,,????

Wife Poochegi,,,,,,

,,,,,,,Kitna Bachaya,,,,,,????

Beta Poochega,,,,,,,

,,,,,,,Kya Laaya,,,,,,???? LekiN

Maa Hi Poochegi :

" Beta Kuch Khaya,,,,????? "

Agar Aap Free Ho

ToH Iss Msg ko Itna

FaeLao Jitna Aap

Apni Maa Se Pyaar Karte

Ho,,,,,,,,!!

Ek Msg Maa Ke NaaM,,,,, :

LOVE U MAA

 

च्चा नयी कार पर पेन से स्क्रेच कर

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एक बच्चा नयी कार पर पेन से स्क्रेच कर
रहा था,
ये देखते ही उसके पापा ने उसके गाल पर
जोरदार थप्पड़ मार दिया
बच्चा कमजोर था थप्पड़ की मार से
ही बेहोश हो गया,
और अस्पताल में उसकी मौत हो गयी
पिता को अपनी गलती पर
पछतावा हो रहा था,
अचानक उनकी नजर कार के उस स्क्रेच पर
पड़ी
गौर से देखा तो कार पर अंग्रेजी में
लिखा था -I love u papa.
(प्यार रिश्तों से करना चाहिए चीजों से
नहीं,क्योकि चीज़े आती रहती है-
जाती रहती है)

 

नौजवान आदमी एक किसान की बेटी

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एक नौजवान आदमी एक किसान की बेटी से
शादी की इच्छा लेकर किसान के पास गया.
किसान ने उसकी ओर देखा और कहा, " युवक,
खेत में जाओ. मैं एक एक करके तीन बैल छोड़ने
वाला हूँ.
अगर तुम तीनों बैलों में से किसी भी एक की पूँछ
पकड़ लो तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर
दूंगा."
नौजवान खेत में बैल की पूँछ पकड़ने
की मुद्रा लेकर खडा हो गया.
किसान ने खेत में स्थित घर
का दरवाजा खोला और एक बहुत ही बड़ा और
खतरनाक बैल उसमे से निकला.
नौजवान ने ऐसा बैल पहले कभी नहीं देखा था.
उससे डर कर नौजवान ने निर्णय लिया कि वह
अगले बैल का इंतज़ार करेगा और वह एक तरफ
हो गया जिससे बैल उसके पास से होकर निकल
गया.
दरवाजा फिर खुला.
आश्चर्यजनक रूप से इस बार पहले से
भी बड़ा और भयंकर बैल निकला.
नौजवान ने सोचा कि इससे तो पहला वाला बैल
ठीक था. फिर उसने एक ओर होकर बैल
को निकल जाने दिया.
दरवाजा तीसरी बार खुला. नौजवान के चहरे पर
मुस्कान आ गई. इस बार एक छोटा और
मरियल बैल निकला. जैसे ही बैल नौजवान के
पास आने लगा, नौजवान ने उसकी पूँछ पकड़ने
के लिए मुद्रा बना ली ताकि उसकी पूँछ
सही समय पर पकड़ ले. पर उस बैल की पूँछ
थी ही नहीं....................
कहानी से सीख......
जिन्दगी अवसरों से भरी हुई है. कुछ सरल हैं
और कुछ कठिन. पर अगर एक बार अवसर
गवां दिया तो फिर वह अवसर
दुबारा नहीं मिलेगा. अतः हमेशा प्रथम अवसर
को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए.
 

जिंदगी हमारे कामों का ही प्रतिबिंब है

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एक पिता अपने बेटे के साथ पहाड़ों की सैर पर
निकला। अचानक बेटा गिर गया। चोट लगने पर
उसके मुंह से निकला , ' आह !!!'
तुरंत पहाड़ों में से कहीं - से आवाज आई - '
आह !!!'
बेटा अचरज में रह गया। उसने फौरन पूछा - तुम
कौन हो ?
सामने से वही सवाल आया , ' तुम कौन हो ?'
बेटा चिल्लाया , ' मैं तुम्हारी तारीफ करता हूं !'
पहाड़ों से जवाब आया , ' मैं तुम्हारी तारीफ
करता हूं !'
अपनी बात की नकल करते देखकर बेटा गुस्से में
चिल्लाया , ' डरपोक !'
जवाब मिला , ' डरपोक !'
उसने पिता की ओर देखा और पूछा , ' यह
क्या हो रहा है ?'
पिता ने मुस्कुराते हुए कहा , ' बेटा , जरा ध्यान
दो। '
इसके बाद पिता चिल्लाया , ' तुम चैंपियन हो !'
जवाब मिला , ' तुम चैंपियन हो !'
बेटे को हैरानी हुई लेकिन वह कुछ समझ
नहीं सका।
इस पर पिता ने उसे समझाया , ' लोग इसे गूंज
( इको ) कहते हैं , लेकिन वास्तव में यह
जिंदगी है। '
यह आपको हर चीज़ वापस लौटाती है , जो आप
कहते हैं या करते हैं। हमारी जिंदगी हमारे
कामों का ही प्रतिबिंब है। अगर आप दुनिया में
ज्यादा प्यार पाना चाहते हैं
तो अपने दिल में ज्यादा प्यार पैदा करें। अगर
अपनी टीम में ज्यादा काबिलियत चाहते हैं
तो अपनी काबिलियत को बढ़ाएं। यह संबंध
जिंदगी के हर पहलू , हर चीज में नजर आता है।


 

Saturday, December 14, 2013

भावनाए , विचार और प्यार

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भावनाए , विचार और प्यार

एक बार सभी तरह की भावनाए और विचार एक island
पर छुट्टिया मनाने गए.

सभी अपने अपने स्वाभाव के
अनुसार समय बिता रहे थे. और सभी खुश थे. तभी अचानक,
एक बहुत ही भयंकर तूफ़ान की चेतावनी आई. और
सभी को island ख़ाली करने के लिए, जाने के लिए कहा गया.

चारो और अफरा तफरी मच गयी. सभी सहम गए थे और
अपनी अपनी boats की तरफ भागे. island
की सारी क्षतिग्रस्त boats को भी जल्दी से ठीक कर
लिया गया. पर ‘प्यार’ को जाने की इच्छा नहीं थी. उसे
तो अभी बहुत कुछ करना था . पर जैसे जैसे, तूफ़ान पास
आने लगा. ‘प्यार’ को भी समझ आया की अब
जाना चाहिए. पर तब तक देर हो चुकी थी. एक
भी boat नहीं थी. ‘प्यार’ मदद के लिए इधर उधर नज़रे
दौड़ाने लगा.

तभी ‘सम्रद्धि’ वहाँ से अपनी आलिशान boat से गुजरी.
‘प्यार’ ने उसे पुकारा, “सम्रद्धि, क्या तुम मुझे
अपनी boat में ले सकती हो?”
“नहीं”, सम्रद्धि ने कहा, “मेरी boat
पूरी कीमती चीजों से भरी पड़ी हैं, सोना चांदी. इसमें
तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं हैं.”

थोड़ी देर बाद अपनी सुन्दर सी boat में अहंकार वहाँ से
निकला. ‘प्यार’ ने फिर से आवाज लगायी, “क्या तुम
मेरी मदद कर सकते हो अहंकार? मैं यहाँ फस गया हूँ.
please, मुझे अपने साथ ले लों.”
अहंकार ने कहा, “ नहीं, मैं तुम्हे अपने साथ नहीं ले
जा सकता, तुम्हारे गंदे पैरो से मेरी boat में मिट्टी लग
जाएगी.”

फिर ‘दुः’ख वहाँ से गुज़रा. फिर से ‘प्यार’ ने आवाज
लगायी. पर फिर से न ही मिला. “नहीं मैं तुम्हे अपने
साथ नहीं ले जा सकता. मैं इतना दुखी हूँ. मैं अकेला रहन
चाहता हूँ.”

तभी वहाँ से ‘ख़ुशी’ गुजरी. पर वो अपने आप में इतनी खुश
थी की उसे होश ही नहीं था, उसे किसी और की परवाह
ही नहीं थी. वो तो बस खुश थी.

‘प्यार’ इधर उधर देखने लगा. फिर वो उदास बैठ गया.
तभी किसी की आव़ाज आई, “आओ ‘प्यार’, मैं तुम्हे अपने
साथ ले चलता हूँ.” ‘प्यार’ देख नहीं पाया की आखिर
कौन इतना अच्छा हैं, जो उसकी मदद कर रहा है. पर
वो boat पर चढ़ गया. अब ‘प्यार’ की जान में जान आई.
की आखिर वो एक सुरक्षित जगह पर पहुँच सकेगा.

जब ‘प्यार’ boat पर चढा तो उसे ‘ज्ञान’ मिला. उसने
ज्ञान से पूछा, “ ज्ञान, क्या तुम्हे पता हैं की किसने मुझे
अपनी boat पर बैठाया जब कोई और मेरी मदद के लिए
बिलकुल भी तैयार नहीं था?”

‘ज्ञान’ मुस्कुराया और कहा, “ ओह, वो ‘समय’ था”
“पर समय भला मेरी मदद क्यों करेगा?” प्यार सोच में पड़ गया.
‘ज्ञान’ ने एक गहरी मुस्कान ली, और कहा “
क्योंकि केवल समय ही तुम्हारी महानता जानता हैं. और
समय के साथ ही तुम्हारी value पता चलती हैं.

कहानी का आशय यह हैं की जब हम सम्रद्ध होते हैं,
तो हम प्यार पर ध्यान नहीं देते. जब हमारी position
बढ़ जाती हैं, तो हम प्यार को भूल जाते हैं. हम तो सुख
और दुःख में भी प्यार को भूल जाते हैं. पर हमें प्यार
की असली value तो समय के साथ पता चलती हैं. पर
इतना इंतज़ार क्यों करें? क्यों न हम आज ही से प्यार
को अपनी जिंदगी में शामिल कर लें.
दोस्तों आपको हमारी ये कहानी कैसी लगी जरुर बताएं ;
और शेयर करके अपने दोस्तों को भी पड़ने मौका 


 

Monday, December 10, 2012

Chanakya Quotes in Hindi


चाणक्य नीति  हिंदी में  

Chanakya Neeti In Hindi






Chanakya Quotes in Hindi
1) “दूसरो की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी  आयु कम पड़ेगी.”
2)”किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार (सीधा साधा ) नहीं होना चाहिए —सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं.”

Chanakya Quotes:3)”अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे डंस भले ही न दो पर डंस दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए. ”
4)”हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होताहै –यह कडुआ सच है.”

Chanakya Niti in Hindi

5)”कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो —मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ? इसका क्या परिणाम होगा ? क्या मैं सफल रहूँगा ?”
6)”भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये इस पर हमला करदो यानी भय से भागो मत इसका सामना करो .”

Chanakya Quotes in Hindi: 
7)”दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है.”
8)”काम का निष्पादन करो , परिणाम से मत डरो.”
9)”सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है.”
10)”ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ.”
11) “व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से नहीं.”

Chanakya Quotes: Chanakya Quotes in Hindi
12) “ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के हैं उन्हें दोस्त न बनाओ,वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे. सामान स्तर के मित्र ही सुखदाई होते हैं .”
13) “अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो. छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो .सोलह साल से उनके साथमित्रवत व्यवहार
करो.आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है.”
14) “अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण एक सामान उपयोगी है .”
15) “शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है. शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है. शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य दोनों ही कमजोर है.


बाज की उड़ान


बाज की उड़ान 

एक बार की बात है कि एक बाज का अंडा मुर्गी के अण्डों के बीच आ गया. कुछ दिनों  बाद उन अण्डों में से चूजे निकले, बाज का बच्चा भी उनमे से एक था.वो उन्ही के बीच बड़ा होने लगा. वो वही करता जो बाकी चूजे करते, मिटटी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्हीकी तरह चूँ-चूँ करता. बाकी चूजों की तरह वो भी बस थोडा सा ही ऊपर उड़ पाता , और पंख फड़-फडाते हुए नीचे आ जाता . फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा, बाज बड़े शान से बेधड़क उड़ रहा था. तब उसने बाकी चूजों से पूछा, कि-

” इतनी उचाई पर उड़ने वाला वो शानदार पक्षी कौन है?”

तब चूजों ने कहा-” अरे वो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही ताकतवर और विशाल है , लेकिन तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम तो एक चूजे हो!”

बाज के बच्चे ने इसे सच मान लिया और कभी वैसा बनने की कोशिश नहीं की. वो ज़िन्दगी भर चूजों की तरह रहा, और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया.

 दोस्तों , हममें से बहुत से लोग  उस बाज की तरह ही अपना असली potential जाने बिना एक second-class ज़िन्दगी जीते रहते हैं, हमारे आस-पास की mediocrity हमें भी mediocre बना देती है.हम में ये भूल जाते हैं कि हम आपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी हैं. हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं है,पर फिर भी बस एक औसत जीवन जी के हम इतने बड़े मौके को गँवा देते हैं.

आप चूजों  की तरह मत बनिए , अपने आप पर ,अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिए. आप चाहे जहाँ हों, जिस परिवेश में हों, अपनी क्षमताओं को पहचानिए और आकाश की ऊँचाइयों पर उड़ कर  दिखाइए  क्योंकि यही आपकी वास्तविकता है.

Motivational Hindi Stories- एक गिलास दूध


Motivational Hindi Stories- एक गिलास दूध


एक बार एक लड़का अपने स्कूल की फीस भरने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक कुछ सामान बेचा करता था, एक दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे बड़े जोर से भूख भी लग रही थी. उसने तय किया कि अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा, उससे खाना मांग लेगा. दरवाजा खटखटाते ही एक लड़की ने दरवाजाखोला, जिसे देखकर वह घबरा गया और बजाय खाने के उस...ने पानी का एक गिलास पानी माँगा.लड़की ने भांप लिया था कि वह भूखा है, इसलिए वह एक........बड़ा गिलास दूध का ले आई. लड़के ने धीरे-धीरे दूध पी लिया." कितने पैसे दूं?" लड़के ने पूछा." पैसे किस बात के?" लड़की ने जवाव मेंकहा." माँ ने मुझे सिखाया है कि जब भी किसी पर दया करो तो उसके पैसे नहीं लेने चाहिए."" तो फिर मैं आपको दिल से धन्यबाद देताहूँ."जैसे ही उस लड़के ने वह घर छोड़ा, उसे न केवल शारीरिक तौर पर शक्ति मिल चुकीथी , बल्कि उसका भगवान् और आदमी पर भरोसा और भी बढ़ गया था.

सालों बाद वह लड़की गंभीर रूप से बीमार पड़ गयी. लोकल डॉक्टर ने उसे शहरके बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया. विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड केल्ली को मरीज देखने के लिए बुलाया गया. जैसे ही उसने लड़की के कस्वे का नाम सुना, उसकी आँखों में चमक आ गयी. वहएकदम सीट से उठा और उस लड़की के कमरे में गया. उसने उस लड़की को देखा, एकदम पहचान लिया और तय कर लिया कि वह उसकी जान बचाने के लिए जमीन-आसमान एक कर देगा..उसकी मेहनत और लग्न रंग लायी और उस लड़की कि जान बच गयी. डॉक्टर ने अस्पताल के ऑफिस में जा कर उस लड़की के इलाज का बिल लिया. उस बिल के कौने में एक नोट लिखा और उसे उस लड़की के पास भिजवा दिया लड़की बिल का लिफाफा देखकर घबरा गयी, उसे मालूम था कि वह बीमारी से तो वह बचगयी है लेकिन बिल कि रकम जरूर उसकी जान लेलेगी. फिर भी उसने धीरे से बिल खोला, रकम को देखा और फिर अचानक उसकी नज़र बिल के कौने में पेन से लिखे नोट पर गयी, जहाँ लिखा था," एक गिलास दूध द्वारा इस बिल का भुगतान किया जा चुकाहै." नीचे डॉक्टर होवार्ड केल्ली के हस्ताक्षर थे.ख़ुशी और अचम्भे से उस लड़की के गालोंपर आंसूटपक पड़े उसने ऊपर कि और दोनों हाथ उठा कर कहा," हे भगवान! आपकाबहुत-बहुत धन्यवाद, आपका प्यार इंसानों के दिलों और हाथों द्वारा न जाने कहाँ- कहाँ फैल चुका है.