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Saturday, December 19, 2015

आओ आज फिर एक बार बचपन में चलें 1. कच्चा पापड़, पक्का पापड़......

आओ आज फिर एक बार बचपन में चलें 
1. कच्चा पापड़, पक्का पापड़......
सबसे ज़्यादा फेमस और हमारे दिल के सबसे नज़दीक । एक बार में 15 बार बोल के दिखाओ तो वीर कहलाओ......
2. फालसे का फासला.........
चैलेंज है कि 20 बार बिना रुके बोल कर दिखाओ........
3. पीतल के पतीले में पपीता पीला पीला........
मुस्कुरा क्या रहे हो, 13 बार इसे बोल कर दिखाओ.......
4. पके पेड़ पर पका पपीता पका पेड़ या पका पपीता........
मेरी जीभ तो लगभग फ्रैक्चर होते-होते बची है.......
5. ऊंट ऊंचा, ऊंट की पीठ ऊंची. ऊंची पूंछ ऊंट की......
क्यों बच्चू नानी याद आ गई.....
6. समझ समझ के समझ को समझो, समझ समझना भी एक समझ है. समझ समझ के जो न समझे, मेरे समझ में वो ना समझ है......
मैं तो इसे बोलने की कोशिश भी नहीं करूंगा.......
7. दूबे दुबई में डूब गया.......
अच्छा ठीक है. ज़्यादा ख़ुश मत हों. ये आपकी फूलती सांसों को आराम देने के लिए था.........
8. चंदु के चाचा ने चंदु की चाची को, चांदनी चौक में, चांदनी रात में, चांदी के चम्मच से चटनी चटाई.......
अब चाहे तुम जो कुछ भी करना, मगर अपने बाल मत नोंचना.......
9. जो हंसेगा वो फंसेगा, जो फंसेगा वो हंसेगा.........
आपको ये आसान लग रहा है. जरा इसे 10 बार से ज़्यादा बार बोल कर दिखाइए.......😋😋
10. खड़क सिंह के खड़कने से खड़कती हैं खिड़कियां, खिड़कियों के खड़कने से खड़कता है खड़क सिंह......
अब मेरे तो पूरे बदन में खड़कन हो रही है.......😴😴
11. मर हम भी गए, मरहम के लिए, मरहम ना मिला. हम दम से गए, हमदम के लिए, हमदम ना मिला......😎😎
बोलो-बोलो मुंह मत चुराओ.....
12. तोला राम ताला तोल के तेल में तल गया, तला हुआ तोला तेल के तले हुए तेल में तला गया......
ऐसे क्या देख रहे होे.......
13. डाली डाली पे नज़र डाली, किसी ने अच्छी डाली, किसी ने बुरी डाली, जिस डाली पर मैने नज़र डाली वो डाली किसी ने तोड़ डाली......
तो फ़िर 5 बार लगातार बोलो तो जानूं ।
14. पांच आम पंच चुचुमुख-चुचुमुख, पांचों मुचुक चुचुक पंच चुचुमुख.......😈😈
वो क्या है न कि यह मेरा फेवरेट है और यदि आप इसको 10 बार बिना लड़खड़ाए बोल दोगो न,
तो आपका इनाम पक्का




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Friday, October 28, 2011

पाउस ये रे ये रे पाउसा - सुन्दर बचपन

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In the memory of indian childhood days - Born in India

पुरानी यादे ताज़ा करो achhi kavitaayein Hindi Poems,
हिंदी कविताएँ
(Chilhood Days Golden Old Days ) 
सुन्दर बचपन (Childhood Hindi Poems Which you miss) / flash back of childhood


पाउस-

ये रे ये रे पाउसा

तुला देतो पैसा

पैसा ज्हाला खोटा

पाउस आला मोठा,

ये रे ये रे सर्री

माझे मडके भरी

सर्र आली धाउन

मडके गेले वाहून
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chubby cheeks-

chubby cheeks,
dimple chin,
rosy lips,
teeth within,
curly hair,
very fair,
eyes r blue,
lovely too,
teachers pet , is that u?
yes yes yesssss
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अकड़ बकड़ बाम्बे बो
अस्सी नब्बे पूरे सो
सुई मे लागा तागा
जान निकल भागा
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अपर के हीरो
पढने मे जीरो
प्राईमरी के बच्चे
पढने मे अच्छे
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Baba black sheep hav u any wool,
yes sir ,yes sir three bags full
one for my master ,one for the dame
n one for the li'll boy who lives down d lane........
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2 little dicky birds

2 littile dicky birds sat up on a wall
one named petre other mamed paul
fly away peter
fly away paul
come back peter
come back paul
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GOD'S LOVE.

god's love is so wonder ful,
god's love is so wonder ful,
god's love is so wonder ful,
ohh wonderful love.

its so high we cnt get under it,
its so deep we cnt get over it,
its so wide we cnt around it,
ohh wonderful love
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teddy bear teddy bear,
turn around.
teddy bear teddy bear,
touch the ground.
teddy bear teddy bear,
polish ur shoes.
teddy teddy bear,
off to school
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अक्कड़ बक्कड़ बाम्बे बो
अस्सी नब्भे पूरे सौ
सौ में लगी बिल्ली
बिल्ली भागी दिल्ली
बोले शेख चिल्ली
खेले डंडा गिल्ली
गिल्ली गई टूट
बच्चे गए रूठ
बच्चों को मनाएंगे
रस मलाई खायेंगे
रस मलाई अच्छी
हमने खायी मच्छी
मच्छी में काँटा
पड़ेगा ज़ोर से चांटा
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अक्कड़ बक्कड़ बाम्बे बो
अस्सी नब्भे पूरे सौ
सौ में लगा धागा
चोर निकलके भागा

राजा की बेटी कैसी है?
दुल्हन सज कर बैठी है

चाय गरम... बिस्कुट नरम,
पीने वाला बेशरम !

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Poshampa bhai poshampa
Daakiye ne kya kiya
100 rupaye ki ghadi churayi
50 rupaye ki rabdi khayi
Ab to jail mein jaana padega
jail ki roti khani padegi
jail ka paani peena padega....
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Akkad bakkad bambey bo..
Assi nabbey pure sau..
Sau mein lagaa taiga..
Chor nikal ke bhaagaa..
Raja ki beti soti thi ..
Phool maala piroti thi..
Rail chali chuk chuk ..
Hamne khaya biscuit..
Biscuit nikla kharab..
Hamne pii sharab..
Sharab nikli kachchi..
Hamne khayi machhi ..
Machhi mein nikla kaanta..
Hamne Maara chanta..
Chante mein nikla khoon..
Jaldi karo telephone..
Telephone mein taar nahi..
Hum tumhare yaar nahi..
Yaar gaya dilli ..
dilli se laaya billli..
Billi ne maara panja ..
yaar ho gaya ganja!!
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From - 7jokes- 7 Jokes A Day Keeps Doctor Away

Saturday, August 27, 2011

childhood, flash back of childhood, Hindi Poems, बचपन, हिंदी कविताएँ

Hindi Poems, हिंदी कविताएँ

मानस पटल पर हमेशा अंकित - अच्छी कविता / सुन्दर बचपन


आजकल की चकाचौंध में कुछ भूले बिसरे पल
- सुन्दर सी चीज़ें
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बड़े सवेरे मुर्गा बोला,चिड़ियों ने अपना मुँह खोला,
आसमान में लगा चमकने ,लाल-सोने का गोला लाल,
ठंडी हवा बही सुखदायी
सब बोले दिन निकला भाई.
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निश्चय रहा अब मेरा
आदर्श विद्यार्थी बनूंगा सब लोगों का प्यारा बनकर
मैं प्यार सभी को दूँगा
हिस्से की जिम्मेदारियाँ
मैं हमेशा निभाऊंगा
हो जाने पर ही पूरा
काम मैं दम लूंगा
समय की कद्र करना
मैं कभी नहीं भूलूंगा
सब लोगों का प्यारा बनकर
मैं प्यार सभी को दूँगा
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हिन्दुस्तान
हाथों में गीता रखेंगे, सीनों में कुरआन रखेंगे,
मेल बढ़ाए जो आपस में, वही धर्म ईमान रखेंगे
शंख बजे भाईचारे का, अमन की एक अज़ान रखेंगे,
काबा और काशी भी होगा, पहले हिन्दुस्तान रखेंगे..

Hindi Poems, हिंदी कविताएँ

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अयोध्यासिह उपाध्यायहरिऔध


खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य प्रियप्रवास’ के रचियता अयोध्यासिह उपाध्यायहरिऔध’(15 अप्रैल, 1965-16 मार्च, 1947) का साहित्यकाल  हिन्दी के तीन युगों भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग और छायावादी युग तक है। उन्होंने पर्याप् मात्रा में बाल साहित् का भी सृजन किया-

 

बाल साहित्य

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एक तिनका - अयोध्यासिह उपाध्याय (Ek Tinka - Ayodhya Singh Upadhyaya 'Hariodh')

मैं घमडों में भरा ऐंठा हुआ
एक दिन जब था मुडेरे पर खड़ा,
अचानक दूर से उड़ता हुआ
एक तिनका आख में मेरी पड़ा।
मैं झिझक उट्ठा, हुआ बेचैन-सा
लाल होकर आख भी दुखने लगी,
मूठ देने लोग कपड़े की लगे
ऐंठ बेचारी दबे पावों भागी।
जब किसी ढब से निकल तिनका गया
तब समझ ने यों मुझे ताने दिए,
ऐंठता तू किसलिए इतना रहा
एक तिनका है बहुत तेरे लिए।
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एक बूंद

ज्यों निकल कर बादलों की गोद से
थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी,
सोचने फिर-फिर यही जी में लगी
हाय क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।
मैं बचूँगी या मिलूँगी धूल में,
चू पड़ूँगी या कमल के फूल में।
बह गई उस काल एक ऐसी हवा
वो समदर ओर आई अनमनी,
एक सुदर सीप का मुँह था खुला
वो उसी में जा गिरी मोती बनी।
लोग यों ही हैं झिझकते सोचते
जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर,
कितु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें
बूँद लौं कुछ और ही देता है कर।
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जागो प्यारे

उठो लाल अब आँखें खोलो,
पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।
बीती रात कमल-दल फूले,
उनके ऊपर भौंरे झूले।
चिड़ियाँ चहक उठी पेड़ों पर,
बहने लगी हवा अति सुदर।
नभ में न्यारी लाली छाई,
धरती ने प्यारी छवि पाई।
भोर हुआ सूरज उग आया,
जल में पड़ी सुनहरी छाया।
ऐसा सुदर समय खोओ,
मेरे प्यारे अब मत सोओ।

 

चंदा मामा

चंदा मामा दौड़े आओ,
दूध कटोरा भर कर लाओ।
उसे प्यार से मुझे पिलाओ,
मुझ पर छिड़क चाँदनी जाओ।
मैं तैरा मृग छौना लूँगा,
उसके साथ हँसूँ खेलूँगा।
उसकी उछल कूछ देखूँगा,
उसको चाटूँगा चूमूँगा।