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Monday, April 22, 2013

Hindi Jokes

Hindi Jokes


डॉक्टर ने एक पागल से पूछा: तुम छत से क्यों लटक रहे हो?

पागल: मैं एक बल्ब हूं.

डॉक्टर: तुम जल क्यों नही रहे?

पागल: बेवकूफ ये इंडिया है, अभी लाइट गई हुई है.
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संता की बीवी: Santa Banta Jokes in Hindi

शादी के कुछ दिन बाद संता अपने दोस्त बंता को बता रहा था.

संता : मेरी बीवी इतना मजाक करती है की क्या बताऊं.

बंता : कैसे?

संता : कल मैंने उसकी आंखों पर हाथ रख कर पूछा मैं कौन? तो बोली दूध वाला
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एक बार संता ने अपने बेटे की शादी की.

बहू विदाई के बाद घर आ गई तब संता की पत्नी (सास) ने कहा- बेटी आज से मुझे मां और अपने ससुर को पापा कहना.

शाम को संता का बेटा (पति) के आने पर पत्नी बोली, मां भैया आ गए
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सेक्रेटरी: नेताजी, आपने जूता फैक्ट्री का उद्घाटन करने से क्यों इनकार किया?
नेताजी : पिछले चुनाव का एक्सपीरियंस है. जूते-चप्पल जितने कम बनें, उतना ही अच्छा है.
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भाग्य बदलते देर नहीं लगती !


Hindi Stories : भाग्य बदलते देर नहीं लगती !


एक मछुआरा था । उस दिन सुबह से शाम तक नदी में जाल डालकर मछलियाँ पकड़ने की कोशिश करता रहा , लेकिन एक भी मछली जाल में न फँसी ।

जैसे -जैसे सूरज डूबने लगा , उसकी निराशा गहरी होती गयी । भगवान का नाम लेकर उसने एक बार और जाल डाला । पर इस बार भी वह असफल रहा . पर एक वजनी पोटली उसके जाल में अटकी । मछुआरे ने पोटली निकला और टटोला तो झुंझला गया और बोला -' हाय ये तो पत्थर है !फिर मन मारकर वह नाव में चढा ।
बहुत निराशा के साथ कुछ सोचते हुए वह अपने नाव को आगे बढ़ता जा रहा था और मन में आगे के योजनाओं के बारे में सोचता चला जा रहा था । सोच रहा था 'कल दुसरे किनारे पर जाल डालूँगा । सबसे छिपकर ...उधर कोई नही जाता ....वहां बहुत सारी मछलियाँ पकड़ी जा सकती है ...  '
मन चंचल था तो फिर हाथ कैसे स्थिर रहता ? वह एक हाथ से उस पोटली के पत्थर को एक -एक करके नदी में फेंकता जा रहा था । पोटली खाली हो गयी । जब एक पत्थर बचा था तो अनायास ही उसकी नजर उसपर गयी तो वह स्तब्ध रह गया । उसे अपने आँखों पर यकीन नही हो रहा था , यह क्या ! ये तो ‘नीलम ’ था |
मछुआरे के पास अब पछताने के अलावा कुछ नही बचा था | नदी के बीचोबीच अपनी नाव में बैठा वह सिर्फ अब अपने को कोस रहा था ।
प्रकृति और प्रारब्ध ऐसे ही न जाने कितने नीलम हमारी झोली में डालता रहता है जिन्हें पत्थर समझ हम ठुकरा देते हैं।

Hindi Stories : चतुर कौआ और साँप


Hindi Stories : चतुर कौआ और साँप


एक नदी के किनारे बरगद का एक वृक्ष था| उस वृक्ष पर घोंसला बनाकर एक कौआ रहता था| वृक्ष की कोटर में एक सर्प रहता था| जब भी मादा कौआ अन्डे देती थी , वह सर्प उन्हें खा जाता था| कौआ बड़ा दुखी था| वह सर्प की दुष्टता के लिए उसे दण्ड देना चाहता था| वह सोचता रहता था कि उस काले भयंकर सर्प से कैसे छुटकारा पाया जाये|

नदी के तट पर एक सुन्दर घाट बना हुआ था| जहाँ पूर्णिमा के दिन राजकुमारी नदी में स्नान करने आती थी| एक दिन कौआ बरगद के पेड़ पर दुखी मन से बैठा हुआ था| उसी समय उसने देखा कि राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ नदी में स्नान करने आ रही हैं| 

घाट पहुँच कर उन्होंने अपने वस्त्र आदि सामान रख दिए| राजकुमारी ने अपना मोतियों का हार भी उतार कर वहीँ रख दिया और अपनी सखियों के साथ नदी में स्नान करने लगी| कौआ को तुरन्त एक तरकीब सूझी| वह बरगद की डाली से काव-काव करता हुआ उड़ा| और राजकुमारी के मोतियों के हार को चोंच से पकड़ कर पेड़ की उस कोटर में डाल दिया जहाँ काला सर्प रहता था| राजकुमारी की एक सहेली ने यह सब देख लिया | शीघ्र ही स्नान करने के बाद राजकुमारी और उनकी सखियाँ हार लेने के लिए बरगद के वृक्ष के पास पहुँची| परन्तु वृक्ष के कोटर में काले भयंकर साँप को देखकर डर गयीं| राजकुमारी ने निश्चय किया कि वह महल पहुँच कर सैनिकों को भेज देंगी और वे सर्प को मारकर कोटर से मोतियों का हार निकाल लेंगे| ठीक ऐसा ही हुआ सैनिकों से कोटर से हार निकालने के लिए सर्प को मार दिया और राजकुमारी को हार सौप दिया|

इस प्रकार कौवे ने अपनी चतुरता से अपने शत्रु से बदला ले लिया और बिना किसी भय की प्रसन्नतापूर्वक रहने लगे



Hindi Stories : बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय ..


Hindi Stories : बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय ..


एक बार की बात है किसी गाँव में एक ब्राह्मण रहता था वह हर रोज भिक्षा माँगने निकल जाता था| एक दिन वह भिक्षा माँगने के लिए घर से बाहर निकला तो देखता है कि एक नेवली अपने बच्चे को जन्म दे कर मर गई, और नेवली के बच्चा वहाँ काँप रहा था| ब्राह्मण को दया आ गई और उसे अपने घर उठा ले गया| ब्राह्मण की पत्नी यह देख कर उसपे भड़क गई की यह नेवला मेरे बच्चे को नुकसान न पहुँचा दे| लेकिन फिर भी वह अपने बच्चे के साथ नेवले को भी पालन पोषण की, दोनों बड़े हुए और साथ साथ खेलने कूदने लगे|

एक बार ब्राह्मण का बच्चा सो रहा था ब्राह्मण की पत्नी ब्राह्मण से बोल के गई की मै पानी ले ने जा रही हूँ बच्चे को देखते रहना कुछ दूर जाने के बाद ब्राह्मण भी उठा और भिक्षा माँगने के लिए चल दिया तभी बच्चे के पास एक साँप आकर खड़ा हो गया यह देख कर नेवले ने साँप से खूब लड़ा और उसे मार डाला और उसके मुँह  में साँप का खून लग गया था और वो यह दिखाने के लिए ब्राह्मण के पत्नी के पास गया पत्नी खून देख कर डर गयी और पानी की मटका नेवले के ऊपर पटक दिया और भाग कर गई तो देखी की बच्चे के पास एक साँप मरा पड़ा हुआ था और इधर नेवला भी मर गया था जिससे वह फुट फुट कर रोने लगी |

सच कहा गया है की बिना सोचे समझे, बिना देखे दिखाए कोई भी काम नहीं करना चाहिए

Hindi Poems : माँ कह एक कहानी


Hindi Poems : माँ कह एक कहानी


"माँ कह एक कहानी।"
बेटा समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?

"कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटी
कह माँ कह लेटी ही लेटी, राजा था या रानी?
माँ कह एक कहानी।"

"तू है हठी, मानधन मेरे, सुन उपवन में बड़े सवेरे,
तात भ्रमण करते थे तेरे, जहाँ सुरभी मनमानी।"
"जहाँ सुरभि मनमानी! हाँ माँ यही कहानी।"

वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिमबिंदु झिले थे,
हलके झोंके हिले मिले थे, लहराता था पानी।"
"लहराता था पानी, हाँ हाँ यही कहानी।"

"गाते थे खग कल कल स्वर से, सहसा एक हँस ऊपर से,
गिरा बिद्ध होकर खर शर से, हुई पक्षी की हानी।"
"हुई पक्षी की हानी? करुणा भरी कहानी!"

चौंक उन्होंने उसे उठाया, नया जन्म सा उसने पाया,
इतने में आखेटक आया, लक्ष सिद्धि का मानी।"
"लक्ष सिद्धि का मानी! कोमल कठिन कहानी।"

"माँगा उसने आहत पक्षी, तेरे तात किन्तु थे रक्षी,
तब उसने जो था खगभक्षी, हठ करने की ठानी।"
"हठ करने की ठानी! अब बढ़ चली कहानी।"

हुआ विवाद सदय निर्दय में, उभय आग्रही थे स्वविषय में,
गयी बात तब न्यायालय में, सुनी सब ने जानी।"
"सुनी सब ने जानी! व्यापक हुई कहानी।"

राहुल तू निर्णय कर इसका, न्याय पक्ष लेता है किसका?"
"माँ मेरी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे तो क्यों न उसे उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी।"
"न्याय दया का दानी! तूने गुनी  कहानी।"
                                                                         - मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित

Hindi Poems : खग उड़ते रहना


खग उड़ते रहना


खग उड़ते रहना जीवन भर !
भूल गया है तू अपना पथ , और नहीं पंखो में भी गति ,
किन्तु लौटना पीछे पथ पर , अरे मौत से भी है बदतर |

खग उड़ते रहना जीवन भर !
मत डर प्रलय-झकोरो से तू ,बढ़ आशा-हलकोरों से तू ,
क्षण में अरि–दल मिट जायेगा, तेरे पंखो से पिसकर |
खग उड़ते रहना जीवन भर !

यदि तू लौट पड़ेगा थककर अंधड़ काल-बवंडर से डर ,
प्यार तुझे करने वाले ही ,देखेंगे तुझको हँस हँस कर |
खग उड़ते रहना जीवन भर !

और मिट गया चलते-चलते मंजिल पथ तय करते-करते,
खाक चढ़ाएगा जग , उन्नत भाल और आँखों पर |
खग उड़ते रहना जीवन भर !

                                                                            गोपाल दास नीरज द्वारा रचित ..

Hindi Jokes ka Adda

Hindi Jokes ka Adda


एक दिन दो लड़कियां बस में सीट के लिए झगड़ रही थीं.
झगडा रुकने का नाम नहीं ले रहा था
तब बस कंडक्टर ने दिमाग लड़ाया वह बोला – आप में से जो उम्र से ज्यादा है वह इस सीट पर बैठ जाए.
झगड़ा रोककर दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा.
और वह सीट खाली की खाली ही रह गयी. 




संता ने अपने बेटे की शादी की.
बहू विदाई के बाद घर आ गई तब संता की पत्नी (सास) ने कहा- बेटी आज से मुझे मां और अपने ससुर को पापा कहना.
शाम को संता का बेटा (पति) के आने पर पत्नी बोली, मां भैया आ गए. 




पत्नी: आज हमारी शादी की सालगिरह है, चलो मुर्गा बनाते हैं.
पति: हां, लेकिन अपनी गलती की सजा बेचारे मुर्गे को क्यूं दे रही हो

टीचर (क्लास मे पढाते हुए), "बच्चो आयकर, बिक्रीकर, भूमिकर से मिलता झुलता कोइ और शब्द बताओ।"

निशु, "सर, एक नही तीन शब्द सुने, सुनील गावासकर, सचिन तैंदुलकर और दिलीप वेंगसरकर।"



मनु,"डेडी, ज्यादा काबिल कौन है मैं या आप?"डैडी, " मै, क्योकि मैं एक तो तुम्हारा बाप हुँ, दुसरे उम्र मे भी तुम से बडा हुँ और मेरा तजुर्बा भी तुम से ज्यादा है।"मनु, "फ़िर तो आप जानते होगें कि अमेरिका की खोज किस ने की थी? "डैडी, "कोलम्बस ने की थी"मनु, "कोलम्बस के बाप ने क्यों नही की, उसका तजुर्बा तो कोलम्बस से कही ज्यादा होगी?"



मरते समय पति ने अपने पत्नी को सब कुछ सच बताना चाहा । उस ने कहा " मै तुम्हे जीवन भर धोखा देता रहा। सच तो यह है कि दर्जनो औरतों से मेरे नाजायज संबंध थे।"
पत्नी बोली, "मै भी सच बताना चाहूँगी । तुम बीमारी से नही मर रहे मैने तुम्हे धीरे-धीरे असर करने वाला जहर दिया है।"




एक बहानेबाज कर्मचारी का दादा उस के दफ़तर में जा कर उस के बाँस से बोला, " इस दफ़तर मे सुनिल नाम का व्यक्ति कार्य करता है, मुझे उस से मिलना है, वह मेरा पोता है।"बाँस ने मुस्करा कर कहा, " मुझे अफ़सोस है, आप देर से आए है, वह आप के अर्थी को कंधा देने के लिए छुट्टी लेकर जा चुका है।




Saturday, April 20, 2013

Laugh India Laugh हँसने की बारी!




संक्षिप्त समाचार! 
एक प्रेस रिपोर्टर को समाचार बड़े विस्तार के साथ लिखकर भेजने की आदत थी। उसके संपादक ने उसे कहा कि वह समाचार कम से कम शब्दों में लिखकर भेजा करे। अगली बार प्रेस रिपोर्टर ने निम्न समाचार भेजा।
स्थानीय तेल कंपनी के एक कर्मचारी ने माचिस जलाकर यह देखने के लिए पेट्रोल है या नहीं, पेट्रोल की टंकी में झाँका। पेट्रोल था। आयु पच्चीस वर्ष।
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घोर कलयुग!

मुल्ला नसरुद्दीन पर अदालत में मुकदमा था कि उसने गाँव के सबसे सीधे-सादे आदमी को लूट लिया। मजिस्ट्रेट ने कहा कि नसरुद्दीन थोड़ी तो शर्म खाते। तुम्हें गाँव में कोई और लूटने को न मिला। यह सीधा-सादा आदमी, यह जो गाँव का सबसे सीधा-सादा आदमी है, यह एक नमूना है सतयुग का, इसको तुमने लूटा?
नसरुद्दीन ने कहा - मालिक, आप भी क्या बात करते हैं। इसको मैं न लूटूँ, तो किसको लूटूँ? यह भी भर लुट सकता है इस गाँव में, बाकी तो सब पहुँचे हुए लोग हैं। मेरी भी मजबूरी समझो। मैं और किसको लूटूँ? और तो मुझे ही लूट लेंगे। यह एक ही बचा मेरे लिए तो। यह तो मेरे धन्यभाग कि एक सतयुगी भी है, नहीं तो मेरा तो किसी पर उपाय ही न चलेगा।
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हिसाब बराबर! 

बनिया और जाट काम से दूसरे गाँव जा रहे थे। 
जाट को बनिये के 2000 रुपए चुकाने थे, पर वह टालमटोल करता रहता था। सुनसान रास्ता आया तो सामने से कुछ लुटेरे आते दिखाई पड़े। लुटेरों ने दूर से ही कड़क कर उन्हें ललकारा। 
जाट ने जल्दी से अपनी धोती की फेंट में से नोटों की गड्‍डी निकालकर बनिये को थमाते हुए कहा - लाला जी, ये 1800 रुपए सँभाल लो। अब 200 ही रह गए।
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प्रेम में प्रथम! 
लल्लू एक लड़की के प्रेम में था। सभी प्रेमी अपने प्रेम की प्रशंसा करते हैं। उस लड़की से कह रहा था कि सुबह उठते ही तेरा नाम लेता हूँ।' तो उस लड़की ने कहा, 'यही तो तुम्हारा छोटा भाई कहता है।' 
लल्लू बोला - लेकिन एक बात ख्याल रखना, मैं उससे पहले सोकर उठता हूँ



संता भीड़ भरी सड़क पर आड़ी-तिरछी कार चला रहा था, तभी पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
संता ने कहाः मैं कार चलाना सीख रहा हूं…
पुलिसः बिना किसी इंस्ट्रक्टर के?
संताः कॉरेस्पांडेंस कोर्स है, सर जी!

* एक नौजवान जोड़ा किसी हिल स्टेशन में हनीमून के लिये गया। होटल में खाने के रेट वगैरह तय हो गये।

संयोग कुछ ऐसा हुआ कि वे रोज बाहर घूमने जाते तो रात का खाना बाहर ही खाकर आते । तथा इस दौरान वे होटल में मना भी नहीं कर पाते कि वे रात का खाना नहीं खायेंगे।





Thursday, April 11, 2013