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Wednesday, July 13, 2016

(1)-केला: 🍌 ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्षा करता है,अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है।


(1)-केला: 🍌
ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्षा करता है,अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है।
(2)-जामुन: 🌑
केन्सर की रोक थाम,हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है।डायबीटीज में अति लाभदायक।
(3)-सेवफ़ल: 🍎
हृदय की सुरक्षा करता है, दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है.
(4)-चुकंदर:-🍐
वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्छरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्षा करता है।
(5)-पत्ता गोभी: 🍏
बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है,वजन घटाने में सहायक है। केंसर में फ़ायदेमंद है।
(6)-गाजर:-
नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मेँ सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्षा करता है।
(7)- फ़ूल गोभी:-🍈
हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है।
(8)-लहसुन:🍓
कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है
(9)-नींबू:🍊
त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्षा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है।
(10)-अंगूर:🍇
रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्षा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है।
(11)-आम:🍋
केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है।
(12)-प्याज: 🍑
फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है खराब कोलेस्टरोल को घटाता है।
(14)-अलसी के बीज:
मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्षा करता है, पाचन शक्ति को ठीक करता है।
(15)-संतरा:🍈
हृदय की सुरक्षा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है
(16)-टमाटर: 🍎
कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्षा ।
(17)-पानी: ☔🍺
गुर्दे की पथरी नाशक है, वजन घटाने में सहायक है, केसर के विरुद्ध लडता है, त्वचा के चमक बढाता है।
(18)-अखरोट:
मूड उन्नत करन में सहायक है, मेमोरी पावर बढाता है,केंसर से लड सकता है, हृदय रोगों से बचाव करता है, कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है।
(19)-तरबूज:🍉
स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लियेओ हितकारी है, रक्तचाप घटाता है, वजन कम करने में सहायक है।
(20)-अंकुरित गेहूं: 🌾
बडी आंत की केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है, कोलेस्टरोल कम करता है, पाचन सुधारता है।
(21)-चावल:🍚
किडनी स्टोन में हितकारी है, डायबीटीज में लाभदायक है,स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है।
(22)-आलू बुखारा:🍒
हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।
(23)-पाईनएपल:🍍
अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से) ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थि क्छरण रोकता है। पाचन सुधारता है।
(24)-जौ,जई: 🌽
कोलेस्टरोल घटाता है,केंसर से लडता है, डायबीटीज में उपकारी है,,कब्ज प्रतिकारक् है ,त्वचा पर शाईनिंग लाता है।
(25)-अंजीर:
रक्त चाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,वजन घटाने में सहायक है।
(26)-शकरकंद:🍠
आंखों की रोशनी बढाता है,मूड उन्नत करता है, हड्डिया बलवान बनाता है, केंसर से लडता है ।
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Tuesday, July 12, 2016

एक दिन पड़ोस का हरयाणवी छोरा आ के बोल्या- ” रे चाचा, अपनी इस्त्री देदे… ”


जज: तू तीसरी बार अदालत आया है, तने शर्म कोनी आती?
आदमी: तू तो रोज़ आवे है, तने तो डूब के मर जाना चाहिए ।
😄😄😄😄😄😄😄😄
ग्राहक: थारी भैंस की एक आंख तो खराब सै, फेर भी तू इसके 25 हज़ार रुपये मांगन लाग्र्या सै?
आदमी: तन्नै भैंस दूध खात्तर चाहिए या नैन-मटक्का करन खात्तर..?????
😄😄😄😄😄😄😄😄
हज़्ज़ाम: ताऊ, बाल छोटे करने है के…?
ताऊ: बड़े कर सके है के !!
😝😝😝😍😍😍
😜😜😜 एक दिन पड़ोस का हरयाणवी छोरा आ के बोल्या-
” रे चाचा, अपनी इस्त्री देदे… ”
चाचा ने अपनी जनानी की ओर इशारा करया और बोला- ” ले जा, वा बैठी.. ”
छोरा चुप चाप देखन लाग्या…
बोला- ” चाचा यो नहीं, कपडे वाली..”
चाचा बोल्या- ” भले मानस, यो तन्ने बगेर कपड़े दिखे है के ??? ”
छोरा गुस्से में चीखा- ” रा चाचा
बावला ना बन, करंट वाली इस्त्री..”
चाचा- ” बावले, हाथ ते लगा के देख…जे ना मारे करंट, फेर कहिये…”
😂😂😂😂😂😂
👳„ताऊ मास्टर से -” मेरा छोरा
पढाई मै कैसा सै ?”
😎मास्टर -“चौधरी यू समझ ले,……आर्यभट्ट ने जीरो की खोज इसके खातिर ही करी थी



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THE MENU AT A DAHI CHOLEY CHAAT SHOP ---VERY FUNNY READ TILL END. .

THE MENU AT A DAHI CHOLEY CHAAT SHOP ---VERY FUNNY READ TILL END. .

1) Chaat-- Rs.10
2) Special chaat - Rs.12
3) Very Special chaat - Rs. 15.
4) Extra Special chaat- Rs. 18.
5) Double Extra Special chaat- Rs. 20.
6) Sunday Special chaat - Rs. 25 (Sunday only).

To check each and every chaat for its different taste, I started eating everyday a different one. . . . .

But soon I discovered that each and every one had the same taste of Chaat.

Finally one day I asked him the reason for the same taste?
💷 💵 💴

Chatwala said: chaat cost. . . . Rs 10

Special chaat means spoons washed ... 🍴

Very Special chaat means spoon and plates both washed ... 🍛🍴

Extra Special chaat means washing hands before putting the Chaat in washed plates & served with washed spoons... 👏

Double Extra Special chaat means clean drinking water is provided separately ... 💧

Chaat wala now looking at my face ....

Then I asked What is Sunday Special?

Chaatwala said :

"Sunday ... I take bath...!!"




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एक दंतकथा , सावधानी से समजें :- *कालिदास बोले :-* माते पानी पिला दीजिए बङा पुण्य होगा.

एक दंतकथा , सावधानी से समजें :-

*कालिदास बोले :-* माते पानी पिला दीजिए बङा पुण्य होगा.

*स्त्री बोली :-* बेटा मैं तुम्हें जानती नहीं. अपना परिचय दो. मैं अवश्य पानी पिला दूंगी।

*कालिदास ने कहा :-* मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें.

*स्त्री बोली :-* तुम मेहमान कैसे हो सकते हो ? संसार में दो ही मेहमान हैं. पहला धन और दूसरा यौवन. इन्हें जाने में समय नहीं लगता. सत्य बताओ कौन हो तुम ?
.
(अब तक के सारे तर्क से पराजित हताश तो हो ही चुके थे)
*कालिदास बोले :-* मैं सहनशील हूं. अब आप पानी पिला दें।

*स्त्री ने कहा :-* नहीं, सहनशील तो दो ही हैं. पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है. उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है, दूसरे पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं. तुम सहनशील नहीं. सच बताओ तुम कौन हो ?

(कालिदास लगभग मूर्च्छा की स्थिति में आ गए और तर्क-वितर्क से झल्लाकर बोले)
*कालिदास बोले :-* मैं हठी हूं.
.
*स्त्री बोली :-* फिर असत्य. हठी तो दो ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं. सत्य कहें ब्राह्मण कौन हैं आप ?

(पूरी तरह अपमानित और पराजित हो चुके थे)
*कालिदास ने कहा :-* फिर तो मैं मूर्ख ही हूं.
.
*स्त्री ने कहा :-* नहीं तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो. मूर्ख दो ही हैं. पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है, और दूसरा दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए ग़लत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।
.
(कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे.)

*वृद्धा ने कहा :-* उठो वत्स ! (आवाज़ सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थी, कालिदास पुनः नतमस्तक हो गए.)
.
*माता ने कहा :-* शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार. तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा.
.
कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*सीख:-* विद्वत्ता पर कभी घमण्ड न करें, यही घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है।


🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏




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"जीत की खातिर एक जूनून चाहिए, जिसमें हो ऊबाल ऐसा एक खून चाहिए. ये आसमां भी आयेगा जमीन पर, बस इरादों में ऐसी एक गूंज चाहिए." "विचारों और शब्दों" की ताकत

"जीत की खातिर एक जूनून चाहिए, जिसमें हो ऊबाल ऐसा एक खून चाहिए.
ये आसमां भी आयेगा जमीन पर, बस इरादों में ऐसी एक गूंज चाहिए."
"विचारों और शब्दों" की ताकत
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क्या हमें ये पता है कि हमारे "विचारों या शब्दों" में कितनी ताकत होती है ?
जी हाँ हम जो भी बोल दें वो पूरे होकर ही रहते हैं, क्या ये बात हम जानते हैं ?
बिलकुल सही, हमारे "विचारों या शब्दों" में इतनी ताकत होती है कि जो एक बार हमारे मुँह से निकला उसे "पूरा होना ही होना" है.
पर प्रश्न उठता है तो फिर हमारी कही हुई हर बात पूरी क्योँ नहीं होती.
इसका सिर्फ और सिर्फ 1 ही कारण है -
हम स्वयं ही अपने "विचारों और शब्दों" को काट देते हैं जैसे हम आकाश में पतंग उड़ाते समय खुद ही पतंग की डोर को काट दें तो पतंग कहीं ब्रम्हाण्ड में विलीन हो जाती है उसी तरह हमारे विचारों और शब्दों को हम स्वयं ही "क्या" का कट मार कर ब्रम्हाण्ड में विलीन होने के लिए छोड़ देते हैं.
नहीं तो इंसान कोई बात "विचारे या बोले" वो पूरी न हो, ऐसा हो नहीं सकता.
मित्रों हमारी आदत होती है कि हम कुछ सोचते या बोलते हैं और उसके तुरंत बाद अपने पर ही शक करने लगते हैं जैसे :-
(1) मैं अपनी क्लास में top करूँगा,ये सोच लिया.
अब अगले ही मिनट से सोचने लगेंगे, "क्या" मैं अपनी क्लास में top कर सकता हूँ. बस मित्रों हमने अपने विचार को "क्या" का कट लगा कर ब्रम्हाण्ड में छोड़ दिया. अब यकीन मानिये मैं क्लास में top कर ही नहीं सकता.
(2) मैं अपने ऑफिस में सबसे बढ़िया employee बनूगा,ये सोच लिया.
अब अगले ही मिनट से सोचने लगेंगे, "क्या" मैं सबसे बढ़िया employee बन सकता हूँ. बस मित्रों हमने अपने विचार को "क्या" का कट लगा कर ब्रम्हाण्ड में छोड़ दिया. अब यकीन मानिये मैं सबसे बढ़िया employee नहीं बन सकता.
(3) मैं अपने business में top में रहूँगा, ये सोच लिया.
अब अगले ही मिनट से सोचने लगेंगे, "क्या" मैं business में top में पहुंचूंगा. बस मित्रों हमने अपने विचार को "क्या" का कट लगा कर ब्रम्हाण्ड में छोड़ दिया. अब यकीन मानिये मैं business में top में नहीं पहुँच सकता.
मित्रों इसी तरह के जितने भी विचार हमें आते हैं, हम उनमें "क्या" का कट लगा कर ब्रम्हाण्ड में विलीन होने के लिए छोड़ देते हैं. हमारे अधिकतर कामों में असफल होने का यही एकमात्र राज़ है.
मित्रों, सबसे पहले अपने ऊपर यकीन रखिये की ये काम "होगा ही होगा" और इस काम को "होना ही होना" है, कोई भी ताकत इसको नहीं रोक सकती, मित्रों ध्यान रहे उस विचार पर "क्या" का कट कतई मत लगाइएगा, वर्ना वो विचार ब्रम्हाण्ड में स्वतः ही विलीन हो जायेंगे, उसके बाद कोई भी ताकत उनको नहीं रोक सकती.
इसमें हमें स्वामी विवेकानंद जी की बात को किसी भी हाल में याद रखना होगा :-
"एक विचार लो. उस विचार को अपना जीवन बना लो. उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो, अपने मस्तिस्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, इसके बाद हमारा सोचा हुआ कोई भी विचार और बोले हुए शब्द पूरे न हो, ऐसा हो नहीं सकता.




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बड़े बड़े रेस्तराँ में पकवानो के नाम 'अंग्रेजी' में रखकर यह साबित किया जाता है क़ि " जब तक हम जैसे समझदार बेवकूफ रहेंगे ये होशियार कभी भूखे नहीं मरेंगे...अब देखिये कुछ डिश के नाम

बड़े बड़े रेस्तराँ में पकवानो के नाम 'अंग्रेजी' में रखकर यह साबित किया जाता है क़ि " जब तक हम जैसे समझदार बेवकूफ रहेंगे ये होशियार कभी भूखे नहीं मरेंगे...अब देखिये कुछ डिश के नाम

रोसेटो अल्जफर्नो :और ये डिश है भात और लाल साग मिला हुआ..दाम 375 रूपये।

नाचोस विथ सालसा..यह है नमकीन खस्ता..कच्चे टमाटर की चटनी के साथ दाम 195 रूपये..अब खस्ता और टमाटर चटनी बोलने से कोई 195 रूपये तो नहीं देगा न.."कच्चे टमाटर की चटनी के साथ खस्ता खा रहा हूँ" बोलने में शर्म आती है.

सिनोमिना सुफले : सूजी का हलवा है दाम 175...

चावल के मांड़ को भी 'राइस सूप विथ लेमन ग्रास' बोलकर 150 में परोस देते है और ये कूल ड्यूड बड़े इतरा कर बोलते हैं "I am having rice soup with NACHOS WITH SALSA....LOL!!! "अब यह कोई थोड़े ही बोलेगा क़ि माँड़ पी रहें हैं खस्ता के साथ।

एक डिश है 'इन्चीलाडा'...ये सब्जी से भरे हुए पराठा को कहते हैं...200 रूपये का..

'सतुआ' बोलोगे तो लोग गंवार बोल बड़ी हीन दृष्टि से देखेंगे लेकिन 'Gram juice with pepper' बोलने से स्टैंडर्ड बढ़ जायेगा..

कुकर में उबला हुआ 5 रूपया के भुट्टे को 50 रूपया में 'स्वीट कॉर्न' बोलकर बेच देते हैं और लोग भी शान से खाते हैं….अंग्रेजी और अंग्रेज़ियत के आधुनिक गुलाम.




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महाभारत का युद्ध चल रहा था। अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे। जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता,


महाभारत का युद्ध चल रहा था।
 अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे।

 जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता,
कर्ण का रथ दूर तक पीछे चला जाता।

 जब कर्ण का बाण छूटता,
तो अर्जुन का रथ सात कदम पीछे चला जाता।

 श्रीकृष्ण ने अर्जुन की प्रशंसा के स्थान पर
 कर्ण के लिए हर बार कहा...
कितना वीर है यह कर्ण?

जो उनके रथ को सात कदम पीछे धकेल देता है।

 अर्जुन बड़े परेशान हुए।
 असमंजस की स्थिति में पूछ बैठे...

हे वासुदेव! यह पक्षपात क्यों?
मेरे पराक्रम की आप प्रशंसा नहीं करते...
एवं मात्र सात कदम पीछे धकेल देने वाले कर्ण को बारम्बार वाहवाही देते है।

श्रीकृष्ण बोले-अर्जुन तुम जानते नहीं...

तुम्हारे रथ में महावीर हनुमान...
एवं स्वयं मैं वासुदेव कृष्ण विराजमान् हैं।

यदि हम दोनों न होते...
तो तुम्हारे रथ का अभी अस्तित्व भी नहीं होता।

 इस रथ को सात कदम भी पीछे हटा देना कर्ण के महाबली होने का परिचायक हैं।

अर्जुन को यह सुनकर अपनी क्षुद्रता पर ग्लानि हुई।

 इस तथ्य को अर्जुन और भी अच्छी तरह तब समझ पाए जब युद्ध समाप्त हुआ।

प्रत्येक दिन अर्जुन जब युद्ध से लौटते...
श्रीकृष्ण पहले उतरते,
फिर सारथी धर्म के नाते अर्जुन को उतारते।

अंतिम दिन वे बोले-अर्जुन...
तुम पहले उतरो रथ से व थोड़ी दूर जाओ।

भगवान के उतरते ही रथ भस्म हो गया।

अर्जुन आश्चर्यचकित थे।
भगवान बोले-पार्थ...
तुम्हारा रथ तो कब का भस्म हो चुका था।

भीष्म,

कृपाचार्य,

द्रोणाचार्य



कर्ण के

 दिव्यास्त्रों से यह नष्ट हो चुका था।
 मेरे संकल्प ने इसे युद्ध समापन तक जीवित रखा था।

 अपनी श्रेष्ठता के मद में चूर अर्जुन का अभिमान चूर-चूर हो गया था।

अपना सर्वस्व त्यागकर वे प्रभू के चरणों पर नतमस्तक हो गए।
अभिमान का व्यर्थ बोझ उतारकर हल्का महसूस कर रहे थे...

गीता श्रवण के बाद इससे बढ़कर और क्या उपदेश हो सकता था, कि सब भगवान का किया हुआ है।
 हम तो केवल निमित्त मात्र है।
 काश, हमारे अंदर का अर्जुन इसे समझ पायें।
💐👏

घमंड जीवन में कष्ट ही देता है
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏



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*_A DINNER DATE_* एक दिन अचानक मेरी पत्नी मुझसे बोली - "सुनो, अगर मैं तुम्हे किसी और के साथ डिनर और फ़िल्म के लिए बाहर जाने को कहूँ तो तुम क्या कहोगे"।

*_A DINNER DATE_*



एक दिन अचानक मेरी पत्नी मुझसे बोली - "सुनो, अगर मैं तुम्हे किसी और के साथ डिनर और फ़िल्म के लिए बाहर जाने को कहूँ तो तुम क्या कहोगे"।
मैं बोला - " मैं कहूँगा कि अब तुम मुझे प्यार नहीं करती"।
उसने कहा - "मैं तुमसे प्यार करती हूँ, लेकिन मुझे पता है कि यह औरत भी आपसे बहुत प्यार करती है और आप के साथ कुछ समय बिताना उनके लिए सपने जैसा होगा"।


वह अन्य औरत कोई और नहीं मेरी माँ थी। जो मुझ से अलग अकेली रहती थी। अपनी व्यस्तता के कारण मैं उन से मिलने कभी कभी ही जा पाता था।


मैंने माँ को फ़ोन कर उन्हें अपने साथ रात के खानेे और एक फिल्म के लिए बाहर चलने के लिए कहा।


"तुम ठीक तो हो,ना। तुम दोनों के बीच कोई परेशानी तो नहीं" माँ ने पूछा


मेरी माँ थोडा शक्की मिजाज़ की औरत थी। उनके लिए मेरा इस किस्म का फ़ोन मेरी किसी परेशानी का संकेत था।
" नहीं कोई परेशानी नहीं। बस मैंने सोचा था कि आप के साथ बाहर जाना एक सुखद अहसास होगा" मैंने जवाब दिया और कहा 'बस हम दोनों ही चलेंगे"।


उन्होंने इस बारे में एक पल के लिए सोचा और फिर कहा, 'ठीक है।'


शुक्रवार की शाम को जब मैं उनके घर पर पहुंचा तो मैंने देखा है वह भी दरवाजे पर इंतजार कर रही थी। वो एक सुन्दर पोशाक पहने हुए थी और उनका चहेरा एक अलग सी ख़ुशी में चमक रहा था।

कार में माँ ने कहा " 'मैंने अपनी friends को बताया कि मैं अपने बेटे के साथ बाहर  खाना खाने के लिए जा रही हूँ। वे काफी प्रभावित थी"।


हम लोग माँ की पसंद वाले एक रेस्तरां पहुचे जो बहुत सुरुचिपूर्ण तो नहीं मगर  अच्छा और आरामदायक था। हम बैठ गए, और मैं मेनू देखने लगा। मेनू पढ़ते हुए मैंने आँख उठा कर देखा तो पाया कि वो मुझे ही देख रहीं थी और एक उदास सी मुस्कान उनके होठों पर थी।


'जब तुम छोटे थे तो ये मेनू मैं तुम्हारे लिए पढ़ती थी' उन्होंने कहा।

'माँ इस समय मैं इसे आपके लिए पढना चाहता हूँ,' मैंने जवाब दिया।


खाने के दौरान, हम में एक दुसरे के जीवन में घटी हाल की घटनाओं पर चर्चा होंने लगी। हम ने आपस में इतनी ज्यादा बात की, कि पिक्चर का समय कब निकल गया हमें पता ही नही चला।


बाद में वापस घर लौटते समय माँ ने कहा कि अगर अगली बार मैं उन्हें बिल का पेमेंट करने दूँ, तो वो मेरे साथ दोबारा डिनर के लिए आना चाहेंगी।
मैंने कहा "माँ जब आप चाहो और बिल पेमेंट कौन करता है इस से क्या फ़र्क़ पड़ता है।
माँ ने कहा कि फ़र्क़ पड़ता है और अगली बार बिल वो ही पे करेंगी।


"घर पहुँचने पर पत्नी ने पूछा" - कैसा रहा।
"बहुत बढ़िया, जैसा सोचा था उससे कही ज्यादा बढ़िया" - मैंने जवाब दिया।



इस घटना के कुछ दिनबाद, मेरी माँ का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। यह इतना अचानक हुआ कि मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पाया ।


माँ की मौत के कुछ समय बाद, मुझे एक लिफाफा मिला जिसमे उसी रेस्तरां की एडवांस पेमेंट की रसीद के साथ माँ का एक ख़त था जिसमे माँ ने लिखा था " मेरे बेटे मुझे पता नहीं कि मैं तुम्हारे साथ दोबारा डिनर पर जा पाऊँगी या नहीं इसलिए मैंने दो लोगो के खाने के अनुमानित बिल का एडवांस पेमेंट कर दिया है। अगर मैं नहीं जा पाऊँ तो तुम अपनी पत्नी के साथ भोजन करने जरूर जाना।
उस रात तुमने कहा था ना कि क्या फ़र्क़ पड़ता है।  मुझ जैसी अकेली रहने वाली बूढी औरत को फ़र्क़ पड़ता है, तुम नहीं जानते उस रात तुम्हारे साथ बीता हर पल मेरे जीवन के सबसे बेहतरीन समय में एक था।
भगवान् तुम्हे सदा खुश रखे।
I love you".
तुम्हारी माँ


*उस पल मुझे अपनों को समय देने और उनके प्यार को महसूस करने का महत्त्व मालूम हुआ।*


*_जीवन में कुछ भी आपके अपने परिवार से भी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है।_*

ना व्हाट्सएप

ना फेसबूक

ना मोबाइल

ना लैपटॉप

और

ना ही टीवी।


*अपने परिजनों को उनके हिस्से का समय दीजिए क्योंकि आपका साथ ही उनके जीवन में खुशियाँ का आधार है।*

*_इस मेसेज को उन सब व्यक्तियों के साथ शेयर कीजिए_*

*जिनके बूढ़े माता पिता हो*

*जिनके छोटे बच्चे हो*

और

*_जिनको प्यार करने वाला और उनका इंतज़ार कोई हो..._




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*प्रेरणा वो नही,* *जिसने 20 हजार मजदुरो से'* *अपनी प्रेमिका के लिए महल बनवाया,* *और हाथ कटवा दिये!*


*प्रेरणा वो नही,*  
  *जिसने 20 हजार मजदुरो से'*
   *अपनी प्रेमिका के लिए महल बनवाया,*
    *और हाथ कटवा दिये!*

     *प्रेरणा उन से लो*
      *जिन्होने माता_पिता के एक वचन के लिए*
       *14 वर्ष का वनवास काट लिया!*

                जय श्री राम👈🏻



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*आज एक नई सीख़ मिली* जब अँगूर खरीदने बाजार गया । पूछा *"क्या भाव है?* बोला : *"80 रूपये किलो ।

*आज एक नई सीख़ मिली*
 जब अँगूर खरीदने बाजार गया ।
पूछा *"क्या भाव है?*
बोला : *"80 रूपये किलो ।"*
पास ही कुछ अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पडे थे ।
मैंने पूछा: *"क्या भाव है" इनका ?"*
वो बोला : *"30 रूपये किलो"*
मैंने पूछा : "इतना कम दाम क्यों..?
वो बोला : "साहब, हैं तो ये भी बहुत बढीया..!!
लेकिन ... *अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।"*
मैं समझ गया कि अपने... *संगठन...समाज* और *परिवार*से अलग होने पर हमारी कीमत......आधे से भी कम रह जाती है।

कृपया अपने *परिवार* एवम् *मित्रो*से हमेशा जुड़े रहे।       *🙏🏻 *सुप्रभात* 🙏🏻




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Sunday, July 10, 2016

पत्नी के जन्मदिन पर पति ने पूछा- तुम्हे क्या गिफ्ट चाहिए? पत्नी की इच्छा नयी कार लेने की थी


पत्नी के जन्मदिन पर पति ने पूछा- तुम्हे क्या गिफ्ट चाहिए?

पत्नी की इच्छा नयी कार लेने की थी
उसने इशारों में कहा- मुझे ऐसी चीज लेकर दो जिस पर मेरे सवार होते ही वो 2 सेकण्ड में 0 से 80 पर पहुँच जाये।
.
.
शाम को ही पति ने उसे वजनकांटा लाकर दे दीया ।
घर में युध्द जैसा माहौल है
😜😝😆😛😂💃💃😷😷😟😟😆😆🙄🙄😳😎😎😀😝😅😅



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एक बार एक संत ने अपने दो भक्तों को बुलाया और कहा आप को यहाँ से पचास कोस जाना है

एक बार एक संत ने अपने दो भक्तों को बुलाया और कहा
आप को यहाँ से पचास कोस जाना है

एक भक्त को एक बोरी खाने के समान से भर कर दी और कहा जो लायक मिले उसे देते जाना

और एक को ख़ाली बोरी दी उससे कहा रास्ते मे जो उसे अच्छा मिले उसे बोरी मे भर कर ले जाए

दोनो निकल पड़े जिसके कंधे पर समान था वो धीरे चल पा रहा था
ख़ाली बोरी वाला भक्त आराम से जा रहा था

थोड़ी दूर उसको एक सोने की ईंट मिली उसने उसे बोरी मे डाल लिया
थोड़ी दूर चला फिर ईंट मिली उसे भी उठा लिया
जैसे जैसे चलता गया उसे सोना मिलता गया और वो बोरी मे भरता हुआ चल रहा था
और बोरी का वज़न। बड़ता गया
 उसका चलना मुश्किल होता गया और साँस भी चढ़ने लग गई
एक एक क़दम मुश्किल होता गया

दूसरा भक्त जैसे जैसे चलता गया रास्ते मै जो भी मिलता उसको बोरी मे से खाने का कुछ समान दे देता गया धीरे धीरे बोरी का वज़न कम होता गया

और उसका चलना आसान होता गया।

जो बाँटता गया उसका मंज़िल तक पहुँचना आसान होता गया

जो ईकठा करता रहा वो रास्ते मे ही दम तोड़ गया

दिल से सोचना हमने जीवन मे क्या बाँटा और क्या इकट्ठा किया हम मंज़िल तक कैसे पहुँच पाएँगे ।

जिन्दगी का कडवा सच...
आप को 60 साल की उम्र के बाद कोई यह नहीं पूछेंगा कि आप का बैंक बैलेन्स कितना है या आप के पास कितनी गाड़ियाँ हैं....

दो ही प्रश्न पूछे जाएंगे ...

1- आप का स्वास्थ्य कैसा है ?

और

2-आप के बच्चे क्या करते हैं ?
।। नमस्कार ।।🙏🏻




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Saturday, July 9, 2016

Must must read *कृपया ध्यानपूर्वक पढ़ें और सभी से इस जानकारी को साझा करें।* यह सन्देश सभी व्यक्ति, जो 'ए सी कार' का उपयोग

Must must read
*कृपया ध्यानपूर्वक पढ़ें और सभी से इस जानकारी को साझा करें।*

यह सन्देश सभी व्यक्ति, जो 'ए सी कार' का उपयोग करते हैं के लिये अति आवश्यक और महत्वपूर्ण है।क्योंकि, यह उनके स्वास्थ्य से सीधा सम्बन्ध रखता है।

*"कार की उपयोग पुस्तिका"* कार  स्टार्ट करने और 'ए सी' चलाने से पहले समस्त शीशों को खोलने का निर्देश देती है जिससे गर्म हवा बाहर निकल जाये। क्यों ?

इसमें कोई भी आश्चर्य की बात नहीं है कि आज कैंसर के कारण पहले की अपेक्षा बहुत मौतें हो रही हैं। अत्यन्त आश्चर्य होता है कि कैंसर की उत्पत्ति किन पदार्थों से हो रही है। एक ऐसा उदाहरण है जो कैंसर की उत्पत्ति के कारणों को बहुत हद तक स्पष्ट करता है।

प्रतिदिन अधिकांश व्यक्ति सर्वप्रथम  'सुबह के समय' और 'अंतिम बार रात' को अपनी कारों का उपयोग करते हैं।

कृपया कार में बैठते ही 'ए सी' को न चलायें। कार में प्रवेश करते ही, *"सबसे पहले शीशों को खोलें"* और कुछ मिनटों के बाद ही 'ए सी' चालू करें।

इसका "कारण", अनुसंधानों से यह पता चला है कि कार का डैश बोर्ड, सीट,'ए सी' की डक्ट्स, वस्तुतः गाड़ी की प्रत्येक पलास्टिक की बनी वस्तुएँ 'विषैली गैस' *"बैन्जीन"* छोड़ती हैं जो कि 'कैंसर' उत्पत्ति का एक बहुत बड़ा तत्व है।

जब भी आप कार खोलें तो कार को स्टार्ट करने से पहले कुछ क्षण के लिये गर्म पलास्टिक की गंध को स्वयम् अनुभव करेंगे।

बैन्जीन, कैंसर कारक होने के साथ - साथ हड्डियों पर विषैला प्रभाव, एनीमिया और स्वास्थय रक्षक सफ़ेद रक्त कणों (यह रोग कारक विषाणुओं को नष्ट करते हैं) में कमी लाती है।अधिक समय के सम्पर्क से ल्युकेमिया और कुछ अन्य प्रकार के कैंसर बढ़ने का पूर्ण ख़तरा है। इसके कारण गर्भवती महिलाओं में गर्भपात हो सकता है।

बन्द स्थान में बैन्ज़ीन का "स्वीकृत" स्तर 50 मिलीग्राम प्रति वर्ग फ़ीट है।

एक कार जोकि एक बन्द जगह पार्क की गई हो और जिसके शीशे बन्द हों में 400-800 मिलीग्राम बैन्ज़ीन का स्तर होगा - *स्वीकृत मात्रा से 8 गुणा अधिक*।

यदि इसको बाहर खुले में पार्क किया गया हो जहाँ पर तापमान 30 अंश सेन्टीग्रेड से अधिक हो तो, बैन्ज़ीन का स्तर 2000-4000 मिलीग्राम होगा, अर्थात *स्वीकृत स्तर से कम से कम 40 गुणा अधिक*।

जो व्यक्ति शीशे बन्द हुई कार में बैठ जाते हैं वस्तुतः वह अत्याधिक मात्रा में विद्यमान विषैली बैन्ज़ीन को साँस के द्वारा अपने शरीर में लेंगे।

बैन्ज़ीन एक विषैला तत्व है जोकि गुर्दे और लीवर पर दुष्प्रभाव डालता है।सबसे ख़तरनाक बात है कि हमारा शरीर इस विषैले तत्व को बाहर करने में नितान्त असमर्थ है।

*अतः कार में बैठने से पहले कुछ समय के लिये इसके दरवाज़े व खिड़कियाँ खोल दें* जिससे  बैठने से पहले ही अन्दर की हवा बाहर निकल जाये (अर्थात हानिकारक विषैली गैसीय तत्व बाहर निकल जाये)

*शिक्षा:* जब कोई व्यक्ति महत्वपूर्ण  तथ्य जिससे आपको लाभ हो बताता है, तो आपकी भी यह नैतिक फ़र्ज़ है कि आप भी इस अमूल्य जानकारी औरों को भी बतायें।



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अम्मा कैंटीन सस्ते में भरपेट खाना--


अम्मा कैंटीन सस्ते में भरपेट खाना--
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता की "अम्मा कैंटीन" गरीबों और मध्य वर्गीय लोगों में काफी लोकप्रिय हो चुकी है.
"अम्मा कैंटीन" हर रोज़ हज़ारों लोगों को बेहद सस्ते में खाना खिलाती है.
चेन्नई के ऐसे ही एक कैंटीन का जायज़ा लिया बीबीसी संवाददाता गीता पांडे ने.

गर्मी की एक दोपहर मैं चेन्नई से बाहर पल्लावरम के 'अम्मा कैंटीन' में लंच करने के लिए लोगों के साथ कतार में खड़ी हो गई.
आज का मेनू है गर्म सांभर चावल और दही चावल. सांभर चावल पांच रुपये का है और दही चावल केवल तीन रुपये का.

किसी भी रेस्तरां में इस मेनू की जो क़ीमत होगी उससे ये बहुत कम है.
मुझे काफी भूख लगी थी इसलिए मैंने एक-एक प्लेट दोनों चीज़ें खरीदीं और खाने के लिए एक टेबल पर चली गई.
अगर आप अच्छे खाने के शौक़ीन हैं तो ये जगह आपके लिए नहीं है.

गर्मी और उमस परेशान कर सकती है और मेरे जैसे उत्तर भारतीय के लिए सांभर चावल ज्यादा ही मसालेदार है.

लेकिन वहां खाने वाले दूसरे लोग जैसे गरीब मजदूर, घरों में काम करने वाली, कॉलेज जाने वाले और दफ्तरों में काम करने वाले साधारण लोग शिकायत नहीं कर रहे हैं.
खाना काफी मात्रा में दिया जाता है और ज़्यादातर लोग इसे बहुत स्वादिष्ट कहते हैं.
लक्ष्मी, जो आसपास के घरों में काम करती हैं, रोज़ इसी कैंटीन से खाना खाती हैं.

वो कहती हैं, "पहले, मेरे मालिक मुझे बचा-खुचा खाना देते थे, लेकिन अब मैं यहां ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के लिए रोज़ आती हूं. 20 रुपये से भी कम में मैं तीन समय का खाना खा सकती हूं."

खुशी से आगे वो कहती हैं, "ये खाना बहुत अच्छा है. मुझे सारे व्यंजन अच्छे लगते हैं. मेरा पेट भर जाता है और मैं खुश हूं." मेनू में क्या है ?
· सुबह का नाश्ता (7 बजे से 10 बजे तक) - इडली, एक रुपये और पोंगल राइस, पांच रुपये
· दोपहर का लंच (12 बजे से 3 बजे तक) - सांभर चावल, लेमन राइस, करी पत्ता चावल, पांच रुपये और दही चावल, तीन रुपये
· रात का डिनर (5 बजे से 7:30 बजे तक) - दो चपाती दाल के साथ, तीन रुपये

मजदूरी का काम करने वाले पंजाब से आए राजू को उनके साथी पहली बार इस कैंटीन में लाए थे.
वो कहते हैं, "मैं रोज़ 400 रुपये कमाता हूं. इन कैंटीन्स के आने से पहले मैं रोज़ खाने पर कम से कम 150 रुपये खर्च करता था. अब मैं केवल 20 रुपये खर्च करता हूं."

इन कैंटीन्स को 2013 में चेन्नई में जयललिता ने शुरू किया जिन्हें सभी अम्मा कहते हैं और इसी से कैंटीन का नाम भी पड़ा.
इसका मकसद लोगों को सस्ते में खाना खिलाना है.

आज पूरे राज्य में 300 से ज्यादा ऐसे कैंटीन बने हैं जिनमें से आधे अकेले चेन्नई में ही हैं. ये हर रोज़ साधारण ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर सर्व करते हैं.
एआईएडीएमके की प्रवक्ता सीआर सरस्वथी कहती हैं, "खाना साफ़ सुथरे और अच्छे तरीके से बनाया जाता है और ये स्वादिष्ट भी है."
वो कहती हैं, "हमारी मुख्यमंत्री ने इन कैंटीन्स की शुरुआत की जिससे अच्छा और सस्ता खाना लोगों को मिल सके. इससे हज़ारों महिलाओं को रोज़गार भी मिला है. महिलाएं ही इन कैंटीन्स को चलाती हैं, खाना बनाने से लेकर साफ-सफाई करने और खाना परोसने तक."
इस स्कीम से मुख्यमंत्री जयललिता को भी फायदा पहुंचा है.

इन कैंटीन्स ने गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग परिवारों के खाने के खर्च को काफी कम कर दिया है और महिलाओं को खाना बनाने और बर्तन धोने से भी आज़ादी मिली है.
इन कृतज्ञ लोगों ने बदले में जयललिता को अपने कीमती वोट दिए.
स्कीम के लागू होने के एक साल बाद जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके ने 2014 लोकसभा चुनावों में 39 सीटों में से 37 सीटें जीतीं.
इस साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में जीतक उनकी पार्टी दोबारा सत्ता में आई और विश्लेषक मानते हैं कि ये कैंटीन जीत के कारणों में से एक है.

Source- गीता पांडे
बीबीसी संवाददाता



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There was a beautiful girl named Rexona and a hand some boy named Cinthol, Rexona & cinthol fell in love with each other.

There was a beautiful girl named Rexona and a hand some boy named Cinthol, Rexona & cinthol fell in love with each other. Rexona parents were Hamam & Margo, cinthol parents were wheel & Nirma, Rexona was very excited to make cinthol his "Life Boy".

They wished to marry and approach their aunt 501 who mannages to convince them. Rexona & cinthol were very happy in thier love they fixed their marrige at " Fair & lovely " garden opposite to Santoor theatre, Medimix city.

They invited their friends Lux, Dove, Dettol, Savlon, Tide, Fa, Jo and others, Rexona and cinthol got married and lived Happily in their Dream land "PEARS"

and after 1 year they got a baby boy ..

Is bacche ne puri community ki waat laga di....


Usaka naam.....


PATANJALI !!!😂




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Thursday, July 7, 2016

स्म्रति ईरानी के डिमोशन / छोटा मंत्री बनाये जाने पर जे डी यु सांसद ने कर दी आपत्ति जनक टिपण्णी, बताया जा रहा है की स्म्रति के ख़राब कामकाज की वजह से अमित शाह नाराज चल रहे थे, और इसी के चलते छोटा कम महत्व का विभाग दे दिया गया

स्म्रति ईरानी के डिमोशन / छोटा मंत्री बनाये जाने पर जे डी यु सांसद ने कर दी आपत्ति जनक टिपण्णी,
बताया जा रहा है की स्म्रति के ख़राब कामकाज की वजह से अमित शाह नाराज चल रहे थे, और इसी के चलते छोटा कम महत्व का विभाग दे दिया गया 



 अली अनवर ने स्मृति ईरानी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. अनवर ने कहा था किकि ‘अच्छा हुआ स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दिया गया है, कम से कम तन ढकने के काम आएगा.’

नई दिल्ली. मोदी सरकार में मंत्री स्मृति ईरानी का पोर्टफोलियो बदले जाने पर जेडीयू सांसद अली अनवर ने बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है। अनवर से जब स्मृति का मंत्रालय बदने जाने पर पूछा गया तो उन्होंने कहा- अच्छा हुआ स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दिया गया है, कम से कम तन ढकने के काम आएगा।’ ‘आप’ नेता कुमार विश्वास ने ट्वीट कर बिना नाम लिए अनवर के बयान को अनैतिक बताया है। दूसरी ओर, स्मृति ने बुधवार को टेक्सटाइल मिनिस्ट्री ज्वॉइन की। इस दौरान एक सवाल के जवाब में कहा- कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...। क्या कहा अली अनवर ने....
 
 
बुधवार को एक चैनल ने जेडीयू के राज्यसभा सांसद अली अनवर से स्मृति ईरानी का मंत्रालय बदले जाने पर सवाल किया। 


- जवाब में अली ने कहा, “अच्छा हुआ स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दिया गया है, कम से कम तन ढकने के काम आएगा। वे विवाद ही पैदा कर रही थीं।”


- बाद में अली अनवर ने सफाई भी दी। हालांकि उनकी पार्टी की तरफ से इस मसले पर कुछ नहीं कहा गया है। 
- अनवर के बयान को आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास ने असभ्य-अशालीन व निन्दनीय टिप्पणी बताया है। उन्होंने कहा- राजनैतिक असहमति में "नैतिक" मर्यादा भूलना ज़्यादा अनैतिक होता है। 
आखिर क्यों बदला गया स्मृति का मंत्रालय?
 
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरएसएस और बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह की नाराजगी की वजह से स्मृति का मंत्रालय बदला गया है। 
- रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल बेंगलुरु में बीजेपी की नेशनल एग्जीक्यूटिव मीटिंग में बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह की स्मृति से नाराजगी साफतौर पर नजर आई थी। 
- शाह स्मृति की परफॉर्मेंस से खुश नहीं थे। शाह और आरएसएस को लगता था कि स्मृति के साथ जुड़ने वाले विवादों की वजह से मिनिस्ट्री के काम पर असर पड़ता है। 
- कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया था कि स्मृति आरएसएस को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही थीं। हालांकि आरएसएस ने कभी खुले तौर पर इसका जिक्र नहीं किया। 
- सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह को लगता था कि स्मृति ने कई विवादों को ठीक तरह से डील नहीं किया। इसकी वजह से सरकार को दिक्कतें भी हुईं। 
 

 
ईरानी से जुड़े ये 10 विवाद भी बताए जा रहे पोर्टफोलियो बदले जाने की वजह

 
1- डिग्री विवाद 
 
स्मृति ईरानी के मंत्री बनते ही सबसे पहले उनकी डिग्री पर सवाल उठाए गए। आरोप लगा कि उन्होंने दो अलग-अलग चुनाव में अपनी डिग्री की अलग-अलग जानकारी दी। 
 
2- रोहित वेमुला और जेएनयू मामला
 
हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की खुदकुशी और जेएनयू में कन्हैया कुमार वाले मामले में ईरानी अपोजीशन के निशाने पर आ गईं। उन्हें संसद में बयान तक देना पड़ा। ज्यादा जोश दिखाने पर अपोजीशन ने उन्हें “आंटी नेशनल’ तक कहा। 
 
3- संस्कृत में हो आईआईटी 
 
ईरानी ने कुछ दिन पहले IIT की पढ़ाई संस्कृत में कराने की सलाह दी थी। इस फैसले पर उनका खूब विरोध हुआ। संस्कृत को प्रमोट करने के लिए उन्होंने एक कमेटी भी बनाई थी।
 
4- डीयू ग्रेजुएट कोर्स विवाद
 
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में चार साल के ग्रेजुएट डिग्री कोर्स को तीन साल करने का आदेश दिया। स्मृति के मंत्री बनते ही UGC ने यह आदेश दिया था। हालांकि, विवाद बढ़ा तो आदेश वापस ले लिया गया।
 
5- जर्मन की जगह संस्कृत पढ़ाने का मामला
 
HRD मंत्रालय ने फैसला किया कि “केंद्रीय विद्यालयों’ में जर्मन भाषा की जगह संस्कृत को थर्ड लैंग्वेज बनाया जाए। विरोध हुआ तो यह फैसला भी वापस ले लिया गया।
 
6- आईआईएम बिल
 
HRD मिनिस्ट्री द्वारा लाए गए IIM बिल-2015 का भी जमकर विरोध हुआ। इस बिल को IIM की ऑटोनोमी के लिए खतरा बताया गया। बाद में तय हुआ कि इस बिल में बदलाव किया जाएगा।
 
7- आईआईटी डायरेक्टर का इस्तीफा
 
IIT-दिल्ली के डायरेक्टर आरके शेवगांवकर ने रिटायरमेंट से 2 साल पहले दिसंबर 2014 में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मृति ईरानी IIT के कामकाज में बेवजह दखल देती हैं।
 
8- काकोदकर के आरोप
 
न्यूक्लियर साइंटिस्ट अनिल काकोदकर ने IIT-मुंबई बोर्ड के चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसके लिए भी HRD मंत्रालय के दखल को जिम्म्दार बताया।
 
9- वेज-नॉनवेज के लिए अगल कैंटीन का मामला
 
IIT कैंटीन में विवाद में भी ईरानी का नाम आया। तब एजुकेशन मिनिस्ट्री ने IIT को वेजेटेरियन छात्रों के लिए अलग कैंटीन बनाने का निर्देश जारी किया था।
 
10- डियर विवाद

ईरानी की बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी से ट्विटर पर हुई तकरार चर्चा में रही। ईरानी को चौधरी का डियर कहना पसंद नहीं आया। ईरानी ने ऑब्जेशन लिया, तो सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ही आड़े हाथों ले लिया।




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स्म्रति ईरानी के डिमोशन / छोटा मंत्री बनाये जाने पर जे डी यु सांसद ने कर दी आपत्ति जनक टिपण्णी, बताया जा रहा है की स्म्रति के ख़राब कामकाज की वजह से अमित शाह नाराज चल रहे थे, और इसी के चलते छोटा कम महत्व का विभाग दे दिया गया

स्म्रति ईरानी के डिमोशन / छोटा मंत्री बनाये जाने पर जे डी यु सांसद ने कर दी आपत्ति जनक टिपण्णी,
बताया जा रहा है की स्म्रति के ख़राब कामकाज की वजह से अमित शाह नाराज चल रहे थे, और इसी के चलते छोटा कम महत्व का विभाग दे दिया गया 



 अली अनवर ने स्मृति ईरानी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. अनवर ने कहा था किकि ‘अच्छा हुआ स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दिया गया है, कम से कम तन ढकने के काम आएगा.’

नई दिल्ली. मोदी सरकार में मंत्री स्मृति ईरानी का पोर्टफोलियो बदले जाने पर जेडीयू सांसद अली अनवर ने बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है। अनवर से जब स्मृति का मंत्रालय बदने जाने पर पूछा गया तो उन्होंने कहा- अच्छा हुआ स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दिया गया है, कम से कम तन ढकने के काम आएगा।’ ‘आप’ नेता कुमार विश्वास ने ट्वीट कर बिना नाम लिए अनवर के बयान को अनैतिक बताया है। दूसरी ओर, स्मृति ने बुधवार को टेक्सटाइल मिनिस्ट्री ज्वॉइन की। इस दौरान एक सवाल के जवाब में कहा- कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...। क्या कहा अली अनवर ने....
 
 
बुधवार को एक चैनल ने जेडीयू के राज्यसभा सांसद अली अनवर से स्मृति ईरानी का मंत्रालय बदले जाने पर सवाल किया। 


- जवाब में अली ने कहा, “अच्छा हुआ स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दिया गया है, कम से कम तन ढकने के काम आएगा। वे विवाद ही पैदा कर रही थीं।”


- बाद में अली अनवर ने सफाई भी दी। हालांकि उनकी पार्टी की तरफ से इस मसले पर कुछ नहीं कहा गया है। 
- अनवर के बयान को आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास ने असभ्य-अशालीन व निन्दनीय टिप्पणी बताया है। उन्होंने कहा- राजनैतिक असहमति में "नैतिक" मर्यादा भूलना ज़्यादा अनैतिक होता है। 
आखिर क्यों बदला गया स्मृति का मंत्रालय?
 
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरएसएस और बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह की नाराजगी की वजह से स्मृति का मंत्रालय बदला गया है। 
- रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल बेंगलुरु में बीजेपी की नेशनल एग्जीक्यूटिव मीटिंग में बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह की स्मृति से नाराजगी साफतौर पर नजर आई थी। 
- शाह स्मृति की परफॉर्मेंस से खुश नहीं थे। शाह और आरएसएस को लगता था कि स्मृति के साथ जुड़ने वाले विवादों की वजह से मिनिस्ट्री के काम पर असर पड़ता है। 
- कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया था कि स्मृति आरएसएस को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही थीं। हालांकि आरएसएस ने कभी खुले तौर पर इसका जिक्र नहीं किया। 
- सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह को लगता था कि स्मृति ने कई विवादों को ठीक तरह से डील नहीं किया। इसकी वजह से सरकार को दिक्कतें भी हुईं। 
 

 
ईरानी से जुड़े ये 10 विवाद भी बताए जा रहे पोर्टफोलियो बदले जाने की वजह

 
1- डिग्री विवाद 
 
स्मृति ईरानी के मंत्री बनते ही सबसे पहले उनकी डिग्री पर सवाल उठाए गए। आरोप लगा कि उन्होंने दो अलग-अलग चुनाव में अपनी डिग्री की अलग-अलग जानकारी दी। 
 
2- रोहित वेमुला और जेएनयू मामला
 
हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की खुदकुशी और जेएनयू में कन्हैया कुमार वाले मामले में ईरानी अपोजीशन के निशाने पर आ गईं। उन्हें संसद में बयान तक देना पड़ा। ज्यादा जोश दिखाने पर अपोजीशन ने उन्हें “आंटी नेशनल’ तक कहा। 
 
3- संस्कृत में हो आईआईटी 
 
ईरानी ने कुछ दिन पहले IIT की पढ़ाई संस्कृत में कराने की सलाह दी थी। इस फैसले पर उनका खूब विरोध हुआ। संस्कृत को प्रमोट करने के लिए उन्होंने एक कमेटी भी बनाई थी।
 
4- डीयू ग्रेजुएट कोर्स विवाद
 
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में चार साल के ग्रेजुएट डिग्री कोर्स को तीन साल करने का आदेश दिया। स्मृति के मंत्री बनते ही UGC ने यह आदेश दिया था। हालांकि, विवाद बढ़ा तो आदेश वापस ले लिया गया।
 
5- जर्मन की जगह संस्कृत पढ़ाने का मामला
 
HRD मंत्रालय ने फैसला किया कि “केंद्रीय विद्यालयों’ में जर्मन भाषा की जगह संस्कृत को थर्ड लैंग्वेज बनाया जाए। विरोध हुआ तो यह फैसला भी वापस ले लिया गया।
 
6- आईआईएम बिल
 
HRD मिनिस्ट्री द्वारा लाए गए IIM बिल-2015 का भी जमकर विरोध हुआ। इस बिल को IIM की ऑटोनोमी के लिए खतरा बताया गया। बाद में तय हुआ कि इस बिल में बदलाव किया जाएगा।
 
7- आईआईटी डायरेक्टर का इस्तीफा
 
IIT-दिल्ली के डायरेक्टर आरके शेवगांवकर ने रिटायरमेंट से 2 साल पहले दिसंबर 2014 में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मृति ईरानी IIT के कामकाज में बेवजह दखल देती हैं।
 
8- काकोदकर के आरोप
 
न्यूक्लियर साइंटिस्ट अनिल काकोदकर ने IIT-मुंबई बोर्ड के चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसके लिए भी HRD मंत्रालय के दखल को जिम्म्दार बताया।
 
9- वेज-नॉनवेज के लिए अगल कैंटीन का मामला
 
IIT कैंटीन में विवाद में भी ईरानी का नाम आया। तब एजुकेशन मिनिस्ट्री ने IIT को वेजेटेरियन छात्रों के लिए अलग कैंटीन बनाने का निर्देश जारी किया था।
 
10- डियर विवाद

ईरानी की बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी से ट्विटर पर हुई तकरार चर्चा में रही। ईरानी को चौधरी का डियर कहना पसंद नहीं आया। ईरानी ने ऑब्जेशन लिया, तो सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ही आड़े हाथों ले लिया।




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Wednesday, July 6, 2016

प्रियमित्रो,अपने इतिहास से परिचित कराती एक सत्य घटना है।कृपया अवश्य पढे । एक बार औरंगजेब के दरबार में एक शिकारी जंगल से पकड़कर एक बड़ा भारी शेर लाया !


प्रियमित्रो,अपने इतिहास से परिचित कराती एक सत्य घटना है।कृपया अवश्य पढे ।
एक बार औरंगजेब के दरबार
में एक शिकारी जंगल से
पकड़कर एक बड़ा भारी
शेर लाया !
लोहे के पिंजरे में बंद शेर
बार-बार दहाड़ रहा था !
बादशाह कहता था... इससे
बड़ा भयानक शेर दूसरा नहीं मिल
सकता ! दरबारियों ने
हाँ में हाँ मिलायी.. किन्तु वहाँ मौजूद
राजा यसवंत सिंह
जी ने कहा - इससे भी अधिक
शक्तिशाली शेर मेरे पास है !
क्रूर एवं अधर्मी औरंगजेब को बड़ा क्रोध
हुआ ! उसने
कहा तुम अपने शेर को इससे लड़ने
को छोडो..
यदि तुम्हारा शेर हार
गया तो तुम्हारा सर काट
लिया जायेगा ...... !
दुसरे दिन किले के मैदान में
दो शेरों का मुकाबला देखने
बहुत बड़ी भीड़
इकट्ठी हो गयी ! औरंगजेब बादशाह
भी ठीक समय पर आकर अपने सिंहासन
पर बैठ
गया !
राजा यशवंत सिंह अपने दस वर्ष के पुत्र
पृथ्वी सिंह के
साथ आये ! उन्हें देखकर बादशाह ने
पूछा-- आपका शेर
कहाँ है ? यशवंत सिंह बोले- मैं अपना शेर
अपने साथ
लाया हूँ ! आप केवल लडाई
की आज्ञा दीजिये !
बादशाह की आज्ञा से जंगली शेर
को लोहे के बड़े
पिंजड़े में
छोड़ दिया गया ! यशवंत सिंह ने अपने
पुत्र को उस पिंजड़े
में घुस जाने को कहा !
बादशाह एवं
वहां के लोग हक्के-
बक्के रह गए ! किन्तु दस वर्ष
का निर्भीक बालक
पृथ्वी सिंह पिता को प्रणाम करके
हँसते-हँसते शेर के
पिंजड़े में घुस गया ! शेर ने पृथ्वी सिंह
की ओर देखा !
उस तेजस्वी बालक के नेत्रों
में देखते ही एकबार तो वह
पूंछ दबाकर पीछे हट गया..
लेकिन सैनिकों द्वारा
भाले की नोक से उकसाए
जाने पर शेर क्रोध में दहाड़
मारकर पृथ्वी सिंह पर टूट पड़ा !
वार बचा कर वीर बालक एक ओर
हटा और
अपनी तलवार खींच ली !
पुत्र को तलवार निकालते हुए देखकर
यशवंत सिंह ने पुकारा - बेटा, तू यह
क्या करता है ? शेर के पास तलवार है
क्या जो तू उसपर तलवार चलाएगा ?
यह
हमारे हिन्दू-धर्म की शिक्षाओं के
विपरीत है और
धर्मयुद्ध नहीं है !
पिता की बात सुनकर पृथ्वी सिंह ने
तलवार फेंक
दी और
निहत्था ही शेर पर टूट पड़ा ! अंतहीन
से दिखने वाले
एक
लम्बे संघर्ष के बाद आख़िरकार उस छोटे
से बालक ने शेर
का जबड़ा पकड़कर फाड़ दिया और फिर
पूरे शरीर
को चीर
दो टुकड़े कर फेंक दिया !
भीड़ उस वीर
बालक
पृथ्वी सिंह
की जय-जयकार करने लगी ! अपने..
और
शेर के
खून से
लथपथ पृथ्वी सिंह जब पिंजड़े से बाहर
निकला तो पिता ने
दौड़कर अपने पुत्र को छाती से
लगा लिया !
तो ऐसे थे हमारे पूर्वजों के कारनामे..
जिनके मुख-मंडल
वीरता के ओज़ से ओतप्रोत रहते थे !
और आज हम क्या बना रहे हैं
अपनी संतति को..
सारेगामा लिट्ल चैंप्स के नचनिये.. ?
आज समय फिर से मुड़ कर इतिहास के
उसी औरंगजेबी काल की ओर
ताक
रहा है.. हमें
चेतावनी देता हुआ सा.. कि ज़रुरत है
कि हिन्दू अपने
बच्चों को फिर से वही हिन्दू संस्कार
दें..
ताकि वक़्त पड़ने पर वो शेर से भी भिड़
जाये..!!!!!जगन्नाथ रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाऐ ।आपका दिन मंगलमय हो जय,जय,श्रीराधे🙏🙏🙏



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संता : हैलो, आप फ्लिपकार्ट से बोल रहे है?? फ्लिपकार्ट girl : यस सर.. ☺☺

संता   :  हैलो, आप फ्लिपकार्ट से बोल रहे है??

फ्लिपकार्ट girl :  यस सर.. ☺☺

संता  :   आज मेरी पत्नी की डिलिवरी हुई है और उसने एक लड़के को जन्म दिया है  .

फ्लिपकार्ट girl :  ख़ुशी की बात है , पर इसमें हम आपकी क्या सेवा कर सकते है

संता   :  कुछ नहीं , मैं आपको अपना अकॉउंट नम्बर देता हूँ , आप उसमे कैश रुपये जमा करवा दीजिये .

फ्लिपकार्ट girl : हेल्लो सर!  कैसा कैश .. ???

संता   :  अरे आपकी कम्पनी ने इत्ते बड़े बड़े विज्ञापन बोर्ड लगाये है ना ??!!
"कैश ओन डिलिवरी"

फ्लिपकार्ट girl : (बेहोश)

😂😂😂😬😬😬




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एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से फोन पर बात करते समय पूँछ बैठी: ... बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या फुर्सत ही नहीं मिलती?

एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से फोन पर बात करते समय पूँछ बैठी: ... बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या फुर्सत ही नहीं मिलती?
बेटे ने माँ को बताया - "माँ, मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ ...
मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूँ ...
विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन... क्या आपने उसके बारे में सुना है ?"
उसकी माँ मुस्कुरा कर बोली - “मैं डार्विन के बारे में जानती हूँ, बेटा ... मैं यह भी जानती हूँ कि तुम जो सोचते हो कि उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में सनातन-धर्म के लिए बहुत पुरानी खबर है...“
“हो सकता है माँ !” बेटे ने भी व्यंग्यपूर्वक कहा ...
“यदि तुम कुछ होशियार हो, तो इसे सुनो,” उसकी माँ ने प्रतिकार किया...
... “क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है ? विष्णु के दस अवतार ?”
बेटे ने सहमति में कहा "हाँ! पर दशावतार का मेरी रिसर्च से क्या लेना-देना?"
माँ फिर बोली: लेना-देना है मेरे लाल... मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम और मि. डार्विन क्या नहीं जानते हैं ?
पहला अवतार था मत्स्य अवतार, यानि मछली | ऐसा इसलिए कि जीवन पानी में आरम्भ हुआ | यह बात सही है या नहीं ?”
बेटा अब और अधिक ध्यानपूर्वक सुनने लगा |
उसके बाद आया दूसरा कूर्म अवतार, जिसका अर्थ है कछुआ, क्योंकि जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया 'उभयचर (Amphibian)' | तो कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर विकास को दर्शाया |
तीसरा था वराह अवतार, जंगली सूअर, जिसका मतलब जंगली जानवर जिनमें बहुत अधिक बुद्धि नहीं होती है | तुम उन्हें डायनासोर कहते हो, सही है ? बेटे ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई |
चौथा अवतार था नृसिंह अवतार, आधा मानव, आधा पशु, जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों तक विकास |
पांचवें वामन अवतार था, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था | क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है ? क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे, होमो इरेक्टस और होमो सेपिअंस, और होमो सेपिअंस ने लड़ाई जीत ली |"
बेटा दशावतार की प्रासंगिकता पर स्तब्ध हो रहा था जबकि उसकी माँ पूर्ण प्रवाह में थी...
छठा अवतार था परशुराम - वे, जिनके पास कुल्हाड़ी की ताकत थी, वो मानव जो गुफा और वन में रहने वाला था | गुस्सैल, और सामाजिक नहीं |
सातवां अवतार था मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति, जिन्होंने समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार |
आठवां अवतार था जगद्गुरु श्री कृष्ण, राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी जिन्होंने ने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि सामाजिक ढांचे में कैसे रहकर फला-फूला जा सकता है |
नवां अवतार था भगवान बुद्ध, वे व्यक्ति जो नृसिंह से उठे और मानव के सही स्वभाव को खोजा | उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की |
और अंत में दसवां अवतार कल्कि आएगा, वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो | वह मानव जो आनुवंशिक रूप से अति-श्रेष्ठ होगा |
बेटा अपनी माँ को अवाक होकर सुनता रहा |
अंत में बोल पड़ा "यह अद्भुत है माँ, भारतीय दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण है |"
...पुराण अर्थपूर्ण हैं | सिर्फ आपका देखने का नज़रिया होना चाहिए धार्मिक या वैज्ञानिक ?
जय मातादी




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*कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैं।


*कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैं।*
*जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।*

*कटा जब शीश सैनिक का तो हम खामोश रहते हैं।*
*कटा एक सीन पिक्चर का तो सारे बोल जाते हैं।।*

*नयी नस्लों के ये बच्चे जमाने भर की सुनते हैं।*
*मगर माँ बाप कुछ बोले तो बच्चे बोल जाते हैं।।*

*बहुत ऊँची दुकानों में कटाते जेब सब अपनी।*
*मगर मज़दूर माँगेगा तो सिक्के बोल जाते हैं।।*

*अगर मखमल करे गलती तो कोई कुछ नहीँ कहता।*
*फटी चादर की गलती हो तो सारे बोल जाते हैं।।*

*हवाओं की तबाही को सभी चुपचाप सहते हैं।*
*च़रागों से हुई गलती तो सारे बोल जाते हैं।।*

*बनाते फिरते हैं रिश्ते जमाने भर से हम अक्सर।*
*मगर घर में जरूरत हो तो रिश्ते बोल जाते हैं।।*



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एक बहुत बड़े दानवीर हुए रहीम


एक बहुत बड़े दानवीर हुए रहीम ।🌹🙏
उनकी ये एक खास बात थी के जब वो दान देने के लिए हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी नज़रें नीचे झुका लेते थे ।🌹🙏
ये बात सभी को अजीब लगती थी..के ये रहीम कैसे दानवीर है ये दान भी देते है और इन्हें शर्म भी आती है  ।🌹🙏

ये बात जब कबीर जी तक जब पहुंची तो उनोहने रहीम को चार पंक्तिया लिख कर भेजी जिसमे लिखा था🌹🙏

ऐसी देनी देन जु
कित सीखे हो सेन
ज्यों ज्यों कर ऊंचो करें
त्यों त्यों नीचे नैन ।🙏🌹

इसका मतलब था के रहीम तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो । जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते है वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यू झुक जाते है ।

रहीम ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था के जिसने भी सुना वो रहीम का भक्त हो गया इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नही दिया । रहीम ने जवाब में लिखा

🌹🙏के देंन हार कोई और है
भेजत जो दिन रैन
लोग भरम हम पर करें
तासो नीचे नैन ।।🌹🙏

मतलब देने वाला तो कोई और है वो मालिक है वो परमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है । परन्तु लोग ये समझते है के मै दे रहा हु रहीम दे रहा है ये विचार कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखे नीचे झुक जाती है ।🌹🙏

सच में मित्रो ये ना समझी ये मेरे पन का भाव यदि इंसान के अंदर से मिट जाये तो वो जीवन को और बेहतर जी सकता है ।
धन्यवाद ।

🙏🌹WAHEGURU Ji🙏  🌹



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Tuesday, July 5, 2016

Seventh Pay Commussion की पीड़ा सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

Seventh Pay Commussion की पीड़ा सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

===========================
सातवें वेतन आयोग की सौगात
===========================
किसी को चुपड़ी चार मिली है
किसी को केवल भात मिली
सातवें वेतन की मोदी जी
ये कैसी सौगात मिली
लम्बा अरसा बीत गया
इस वेतन की तैयारी में
जैसे कोई सजनी देख रही
साजन की बाट अटारी में
लेकिन जब साजन आये तो
आँखों से नीर बहाया है
ये कैसी वेतन वृद्धि है कोई
समझ नहीं कुछ पाया है
है यही तुम्हारे अच्छे दिन तो
इनको वापिस ले जाओ
केवल इतिहास को दोहरा कर
बस वेतन वृद्धि दे जाओ
मन करता छोड़ नौकरी को
मैं भी अब चाय बनाऊँगा
फिर मोदी जी की तरह एक दिन
घूम विदेश में आऊँगा
चाँद पूर्णिमा का आया है
या फिर काली रात मिली
सातवें वेतन की मोदी जी
ये कैसी सौगात मिली
अरुण जेटली जी तुमने ये
कैसा नियम निकाला है
वेतन वृद्धि ही गलफांस बना
जैसे कोई विषधर काला है
सड़कों पर जाने को तुमने
अब कैसी ये मजबूरी की
वेतन वृद्धि दी सबको या
सबको बस मजदूरी दी
इतिहास को शर्मसार करके
उन साठ साल को भुला दिया
मर भी न सकें जी भी न सकें
इस मीठे जहर को पिला दिया
कोई चाहे कुछ भी बोले
मेरे मन बस में एक पीड़ा है
ये वेतन वृद्धि नहीं ऊँट के
मुँह में थोड़ा जीरा है
विश्वास बहुत था लोगो पर
ये तो केवल घात मिली
सातवें वेतन की मोदी जी
ये कैसी सौगात मिली
वेतन वृद्धि नहीं मिले बस
इतना काम करा दो तुम
आटे दाल के भावों को बस
फिर से आधे ला दो तुम
हर कर्मचारी के बच्चों को
अच्छी शिक्षा दिलवा दो तुम
रहने को आवास सभी को
बिना शुल्क मिलवा दो तुम
रेलगाड़ी के डिब्बे में
जनरल डिब्बे बढ़वा दो तुम
A C बस में सफर कर सके
मासिक पास बना दो तुम
इतने काम करा दो सबको
तब समझेंगे दिन अच्छे
कर्मचारी भी खुश होंगे
कहलाओ हितैषी तुम सच्चे
वादे पूरे कर तो या फिर
समझेंगे बस बात मिली
सातवें वेतन की मोदी जी
ये कैसी सौगात मिली




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Sunday, July 3, 2016

Classic example of How investment is better than consumption

*_"Classic example of How investment is better than consumption! "_*

How Many People are riding *ROYAL ENFIELD BIKE* ? or wish to ride i t ?


Look at the company`s growth

*Eicher Motors* (Makers of Royal Enfield).

Share Price on September 2001 = *_Rs. 17.50_*
Price of Royal Enfield bike in 2001 was Rs.55000/-

If any one would have bought the shares of Eicher Motors instead of a bike than he would have got *3143* shares ((Rs. 55000/ Rs 17.50 (share Price) = 3143 Shares))


Eicher Motor`s Share Price as on 30th June 2016 is *Rs. 20,158* Total Value as 3143 x 20,158= *6.4 crore*
*
_55000/- is worth 6.4 Crore in 15 Years._*

Now he could hv bought *_Rolls Royce._*




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Saturday, July 2, 2016

कक्षा में शिक्षक ने पूछा : गांव और शहर में क्या अन्तर है ....??


कक्षा में शिक्षक ने पूछा : गांव और शहर में क्या अन्तर है ....??
एक बालक नें बहुत सुन्दर उत्तर दिया : इतना ही अन्तर है कि गांव में कुत्ते आवारा घूमते हैं और गौमाता पाली जाती है .....
और शहर में कुत्ता पाला जाता है और गौमाता आवारा घुमती हैं ...
.........जीवन का कडवा सच........
अनाथ आश्रम में बच्चे मिलतें हैं गरीबो के...!
और...
वृद्धाश्रम में बुजुर्ग मिलतें हैं अमीरों के...!
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
वक्त के साथ सब बदल जाता है
पुराने ज़माने में जिसे ........
👍ठेंगा कहते थे,उसे आज
👍like कहते है।।।।।।।



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Friday, July 1, 2016

मिस आयशा एक छोटे से शहर के प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5 की शिक्षक थीं। उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा "आई लव यू ऑल" बोला करतीं।


मिस आयशा एक छोटे से शहर के प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5 की शिक्षक थीं।
उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा "आई लव यू ऑल" बोला करतीं। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं कहती । वह कक्षा के सभी बच्चों से उतना प्यार नहीं करती थीं।
कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो मिस आयशा को एक आंख नहीं भाता। उसका नाम तारिक था। तारिक मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आजाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान। । । व्याख्यान के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता।
मिस आयशा के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता तो लग जाता..मगर उसकी खाली खाली नज़रों से उन्हें साफ पता लगता रहता.कि तारिक शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हे.धीरे धीरे मिस आयशा को तारिक़ से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही तारिक मिस आयशा की आलोचना का निशाना बनने लगता। सब बुराई उदाहरण तारिक के नाम पर किये जाते. बच्चे उस पर खिलखिला कर हंसते.और मिस आयशा उसको अपमानित कर के संतोष प्राप्त करतीं। तारिक ने हालांकि किसी बात का कभी कोई जवाब नहीं दिया था।
मिस आयशा को वह एक बेजान पत्थर की तरह लगता जिसके अंदर महसूस नाम की कोई चीज नहीं थी। प्रत्येक डांट, व्यंग्य और सजा के जवाब में वह बस अपनी भावनाओं से खाली नज़रों से उन्हें देखा करता और सिर झुका लेता । मिस आयशा को अब इससे गंभीर चिढ़ हो चुकी थी। पहला सेमेस्टर समाप्त हो गया और रिपोर्ट बनाने का चरण आया तो मिस आयशा ने तारिक की प्रगति रिपोर्ट में यह सब बुरी बातें लिख मारी । प्रगति रिपोर्ट माता पिता को दिखाने से पहले हेड मिसटरेस के पास जाया करती थी। उन्होंने जब तारिक की रिपोर्ट देखी तो मिस आयशा को बुला लिया। "मिस आयशा प्रगति रिपोर्ट में कुछ तो प्रगति भी लिखनी चाहिए। आपने तो जो कुछ लिखा है इससे तारिक के पिता इससे बिल्कुल निराश हो जाएंगे।" "मैं माफी माँगती हूँ, लेकिन तारिक एक बिल्कुल ही अशिष्ट और निकम्मा बच्चा है । मुझे नहीं लगता कि मैं उसकी प्रगति के बारे में कुछ लिख सकती हूँ। "मिस आयशा घृणित लहजे में बोलकर वहां से उठ आईं।
हेड मिसटरेस ने एक अजीब हरकत की। उन्होंने चपरासी के हाथ मिस आयशा की डेस्क पर तारिक की पिछले वर्षों की प्रगति रिपोर्ट रखवा दी । अगले दिन मिस आयशा ने कक्षा में प्रवेश किया तो रिपोर्ट पर नजर पड़ी। पलट कर देखा तो पता लगा कि यह तारिक की रिपोर्ट हैं। "पिछली कक्षाओं में भी उसने निश्चय ही यही गुल खिलाए होंगे।" उन्होंने सोचा और कक्षा 3 की रिपोर्ट खोली। रिपोर्ट में टिप्पणी पढ़कर उनकी आश्चर्य की कोई सीमा न रही जब उन्होंने देखा कि रिपोर्ट उसकी तारीफों से भरी पड़ी है। "तारिक जैसा बुद्धिमान बच्चा मैंने आज तक नहीं देखा।" "बेहद संवेदनशील बच्चा है और अपने मित्रों और शिक्षक से बेहद लगाव रखता है।" "
अंतिम सेमेस्टर में भी तारिक ने प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया है। "मिस आयशा ने अनिश्चित स्थिति में कक्षा 4 की रिपोर्ट खोली।" तारिक़ ने अपनी मां की बीमारी का बेहद प्रभाव लिया। .उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा है। "" तारिक की माँ को अंतिम चरण का कैंसर हुआ है। । घर पर उसका और कोई ध्यान रखनेवाला नहीं है.जिसका गहरा प्रभाव उसकी पढ़ाई पर पड़ा है। ""
तारिक की माँ मर चुकी है और इसके साथ ही तारिक के जीवन की रमक और रौनक भी। । उसे बचाना होगा...इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। "मिस आयशा के दिमाग पर भयानक बोझ तारी हो गया। कांपते हाथों से उन्होंने प्रगति रिपोर्ट बंद की । आंसू उनकी आँखों से एक के बाद एक गिरने लगे.अगले दिन जब मिस आयशा कक्षा में दाख़िल हुईं तो उन्होंने अपनी आदत के अनुसार अपना पारंपरिक वाक्यांश "आई लव यू ऑल" दोहराया। मगर वह जानती थीं कि वह आज भी झूठ बोल रही हैं। क्योंकि इसी क्लास में बैठे एक उलझे बालों वाले बच्चे तारिक़ के लिए जो प्यार वह आज अपने दिल में महसूस कर रही थीं..वह कक्षा में बैठे और किसी भी बच्चे से हो ही नहीं सकता था । व्याख्यान के दौरान उन्होंने रोजाना दिनचर्या की तरह एक सवाल तारिक पर दागा और हमेशा की तरह तारिक ने सिर झुका लिया। जब कुछ देर तक मिस आयशा से कोई डांट फटकार और सहपाठी सहयोगियों से हंसी की आवाज उसके कानों में न पड़ी तो उसने अचंभे में सिर उठाकर उनकी ओर देखा। अप्रत्याशित उनके माथे पर आज बल न थे, वह मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने तारिक को अपने पास बुलाया और उसे सवाल का जवाब बताकर जबरन दोहराने के लिए कहा।
तारिक तीन चार बार के आग्रह के बाद अंतत:बोल ही पड़ा। इसके जवाब देते ही मिस आयशा ने न सिर्फ खुद खुशान्दाज़ होकर तालियाँ बजाईं बल्कि सभी से भी बजवायी.. फिर तो यह दिनचर्या बन गयी। मिस आयशा हर सवाल का जवाब अपने आप बताती और फिर उसकी खूब सराहना तारीफ करतीं। प्रत्येक अच्छा उदाहरण तारिक के कारण दिया जाने लगा । धीरे-धीरे पुराना तारिक सन्नाटे की कब्र फाड़ कर बाहर आ गया। अब मिस आयशा को सवाल के साथ जवाब बताने की जरूरत नहीं पड़ती। वह रोज बिला त्रुटि उत्तर देकर सभी को प्रभावित करता और नये नए सवाल पूछ कर सबको हैरान भी। उसके बाल अब कुछ हद तक सुधरे हुए होते, कपड़े भी काफी हद तक साफ होते जिन्हें शायद वह खुद धोने लगा था। देखते ही देखते साल समाप्त हो गया और तारिक ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया यानी दूसरी क्लास । विदाई समारोह में सभी बच्चे मिस आयशा के लिये सुंदर उपहार लेकर आए और मिस आयशा की टेबल पर ढेर लग गये । इन खूबसूरती से पैक हुए उपहार में एक पुराने अखबार में बद सलीके से पैक हुआ एक उपहार भी पड़ा था। बच्चे उसे देखकर हंस पड़े। किसी को जानने में देर न लगी कि उपहार के नाम पर ये तारिक लाया होगा। मिस आयशा ने उपहार के इस छोटे से पहाड़ में से लपक कर उसे निकाला। खोलकर देखा तो उसके अंदर एक महिलाओं की इत्र की आधी इस्तेमाल की हुई शीशी और एक हाथ में पहनने वाला एक बड़ा सा कड़ा था जिसके ज्यादातर मोती झड़ चुके थे। मिस आयशा ने चुपचाप इस इत्र को खुद पर छिड़का और हाथ में कंगन पहन लिया। बच्चे यह दृश्य देखकर हैरान रह गए। खुद तारिक भी। आखिर तारिक से रहा न गया और मिस आयशा के पास आकर खड़ा हो गया। । कुछ देर बाद उसने अटक अटक कर मिस आयशा को बताया कि "आज आप में से मेरी माँ जैसी खुशबू आ रही है।"
समय पर लगाकर उड़ने लगा। दिन सप्ताह, सप्ताह महीने और महीने साल में बदलते भला कहां देर लगती है? मगर हर साल के अंत में मिस आयशा को तारिक़ से एक पत्र नियमित रूप से प्राप्त होता जिसमें लिखा होता कि "इस साल कई नए टीचर्स से मिला।। मगर आप जैसा कोई नहीं था।" फिर तारिक का स्कूल समाप्त हो गया और पत्रों का सिलसिला भी। कई साल आगे गुज़रे और मिस आयशा रिटायर हो गईं। एक दिन उन्हें अपनी मेल में तारिक का पत्र मिला जिसमें लिखा था:
"इस महीने के अंत में मेरी शादी है और आपकी अलावा शादी की बात मैं नहीं सोच सकता। एक और बात .. मैं जीवन में बहुत सारे लोगों से मिल चुका हूं।। आप जैसा कोई नहीं है.........डॉक्टर तारिक
साथ ही विमान का आने जाने का टिकट भी लिफाफे में मौजूद था। मिस आयशा खुद को हरगिज़ न रोक सकती थीं। उन्होंने अपने पति से अनुमति ली और वह दूसरे शहर के लिए रवाना हो गईं। ऐन शादी के दिन जब वह शादी की जगह पहुंची तो थोड़ी लेट हो चुकी थीं। उन्हें लगा समारोह समाप्त हो चुका होगा.. मगर यह देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रही कि शहर के बड़े डॉ, बिजनेसमैन और यहां तक कि वहां मौजूद निकाह पढाने वाले भी थक गये थे. कि आखिर कौन आना बाकी है...मगर तारिक समारोह में निकाह के बजाय गेट की तरफ टकटकी लगाए उनके आने का इंतजार कर था। फिर सबने देखा कि जैसे ही यह पुरानी शिक्षक आयशा ने गेट से प्रवेश किया तारिक उनकी ओर लपका और उनका वह हाथ पकड़ा जिसमें उन्होंने अब तक वह सड़ा हुआ सा कंगन पहना हुआ था और उन्हें सीधा मंच पर ले गया। माइक हाथ में पकड़ कर उसने कुछ यूं बोला "दोस्तो आप सभी हमेशा मुझसे मेरी माँ के बारे में पूछा करते थे और मैं आप सबसे वादा किया करता था कि जल्द ही आप सबको उनसे मिलाउंगा।।।.......

.यह मेरी माँ हैं
- ------------------------- "
_________________

!!
प्रिय दोस्तों आप सब शिक्षक हो ... इस सुंदर कहानी को सिर्फ शिक्षक और शिष्य के रिश्ते के कारण ही मत सोचिएगा । अपने आसपास देखें, तारिक जैसे कई फूल मुरझा रहे हैं जिन्हें आप का जरा सा ध्यान, प्यार और स्नेह नया जीवन दे सकता है.



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सफलता का रहस्य


सफलता का रहस्य

एक आठ साल का लड़का गर्मी की छुट्टियों में अपने दादा जी के पास गाँव घूमने आया। एक दिन वो बड़ा खुश था, उछलते-कूदते वो दादाजी के पास पहुंचा और बड़े गर्व से बोला, ” जब मैं बड़ा होऊंगा तब मैं बहुत सफल आदमी बनूँगा। क्या आप मुझे सफल होने के कुछ टिप्स दे सकते हैं?”

दादा जी ने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया, और बिना कुछ कहे लड़के का हाथ पकड़ा और उसे करीब की पौधशाला में ले गए। वहां जाकर दादा जी ने दो छोटे-छोटे पौधे खरीदे और घर वापस आ गए।वापस लौट कर उन्होंने एक पौधा घर के बाहर लगा दिया और एक पौधा गमले में लगा कर घर के अन्दर रख दिया।

“क्या लगता है तुम्हे, इन दोनों पौधों में से भविष्य में कौन सा पौधा अधिक सफल होगा?”, दादा जी ने लड़के से पूछा। लड़का कुछ क्षणों तक सोचता रहा और फिर बोला, ” घर के अन्दर वाला पौधा ज्यादा सफल होगा क्योंकि वो हर एक खतरे से सुरक्षित है जबकि बाहर वाले पौधे को तेज धूप, आंधी-पानी, और जानवरों से भी खतरा है…”

दादाजी बोले, ” चलो देखते हैं आगे क्या होता है !”, और वह अखबार उठा कर पढने लगे।कुछ दिन बाद छुट्टियाँ ख़तम हो गयीं और वो लड़का वापस शहर चला गया।

इस बीच दादाजी दोनों पौधों पर बराबर ध्यान देते रहे और समय बीतता गया। ३-४ साल बाद एक बार फिर वो अपने पेरेंट्स के साथ गाँव घूमने आया और अपने दादा जी को देखते ही बोला, “दादा जी, पिछली बार मैं आपसे successful होने के कुछ टिप्स मांगे थे पर आपने तो कुछ बताया ही नहीं…पर इस बार आपको ज़रूर कुछ बताना होगा।”
दादा जी मुस्कुराये और लडके को उस जगह ले गए जहाँ उन्होंने गमले में पौधा लगाया था। अब वह पौधा एक खूबसूरत पेड़ में बदल चुका था। लड़का बोला, ” देखा दादाजी मैंने कहा था न कि ये वाला पौधा ज्यादा सफल होगा…”

“अरे, पहले बाहर वाले पौधे का हाल भी तो देख लो…”, और ये कहते हुए दादाजी लड़के को बाहर ले गए, बाहर एक विशाल वृक्ष गर्व से खड़ा था! उसकी शाखाएं दूर तक फैलीं थीं और उसकी छाँव में खड़े राहगीर आराम से बातें कर रहे थे।

“अब बताओ कौन सा पौधा ज्यादा सफल हुआ?”, दादा जी ने पूछा।
“…ब..ब…बाहर वाला!….लेकिन ये कैसे संभव है, बाहर तो उसे न जाने कितने खतरों का सामना करना पड़ा होगा….फिर भी…”, लड़का आश्चर्य से बोला।

दादा जी मुस्कुराए और बोले, “हाँ, लेकिन challenges face करने के अपने rewards भी तो हैं, बाहर वाले पेड़ के पास आज़ादी थी कि वो अपनी जड़े जितनी चाहे उतनी फैला ले, आपनी शाखाओं से आसमान को छू ले…बेटे, इस बात को याद रखो और तुम जो भी करोगे उसमे सफल होगे- अगर तुम जीवन भर safe option choose करते हो तो तुम कभी भी उतना नहीं grow कर पाओगे जितनी तुम्हारी क्षमता है, लेकिन अगर तुम तमाम खतरों के बावजूद इस दुनिया का सामना करने के लिए तैयार रहते हो तो तुम्हारे लिए कोई भी लक्ष्य हासिल करना असम्भव नहीं है! लड़के ने लम्बी सांस ली और उस विशाल वृक्ष की तरफ देखने लगा…वो दादा जी की बात समझ चुका था, आज उसे सफलता का एक बहुत बड़ा सबक मिल चुका था!

दोस्तों, भगवान् ने हमें एकmeaningful life जीने के लिए बनाया है। But unfortunately, अधिकतर लोग डर-डर के जीते हैं और कभी भी अपने full potential को realize नही कर पाते। इस बेकार के डर को पीछे छोडिये…ज़िन्दगी जीने का असली मज़ा तभी है जब आप वो सब कुछ कर पाएं जो सब कुछ आप कर सकते हैं…वरना दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ तो कोई भी कर लेता, इसलिए हर समय play it safe के चक्कर में मत पड़े रहिये…जोखिम उठाइए… risk लीजिये और उस विशाल वृक्ष की तरह अपनी life को large बनाइये!



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Thursday, June 30, 2016

वेगुनाह जानवरो की कुर्बानी से कौन-सी दुआ कुबूल होती है? बॉलिवुड एक्टर इरफान खान

वेगुनाह जानवरो की कुर्बानी से कौन-सी दुआ कुबूल होती है?
बॉलिवुड एक्टर इरफान खान

on June 30, 2016, 9:18 a.m.
नई दिल्ली(30 जून): बॉलिवुड एक्टर इरफान खान ने ऐसा बयान दिया है जिसपर विवाद हो सकता है। अपनी आने वाली फिल्म 'मदारी' के प्रमोशनल इवेंट में ईद-उल-जुहा को लेकर इरफान खान ने कहा है कि कुर्बानी का मतलब अपनी कोई अजीज चीज कुर्बान करना होता है। ये नहीं कि बाजार से आप कोई दो बकरे खरीद लाए और उनको कुर्बान कर दिया।
इरफान इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि आपको उन बकरों से कोई लेना-देना नहीं है तो वो कुर्बानी कहां से हुई? इससे कौन-सी दुआ कुबूल होती है?

अगर वास्तव में कोई दुआ कबूल होती तो आज सभी मुस्लिम देश तंगहाली और आतंकबाद का शिकार ना होकर खुशहाली में जी रहे होते ....

हर आदमी अपने दिल से पूछे कि किसी और की जान लेने से उसको कैसे पुण्य मिल जाएगा? बुधवार को इरफान ने यह भी कहा कि हमारे जो भी त्योहार हैं, उनका मतलब हमें वापस से समझना चाहिए कि वे किसलिए बनाए गए हैं। सौभाग्य है कि एेसे देश में रह रहा हूं जहां हर धर्म का सम्मान होता है।
वहीं सलमान और दूसरे सेलिब्रिटीज के दिए जाने वाले बयानों को लेकर इरफान ने कहा कि सेलिब्रिटी भी इंसान हैं। आप उसे महान आत्मा मत समझिए। उससे भी गलती हो सकती है। उन्हें सीरियसली नहीं लेना चाहिए।
इरफान ने कहा कि अपना हीरो उन्हें बनाएं जो बिना स्वार्थ के कुर्बानी देकर लोगों की मदद करे।
इरफान ने इवेंट में मंत्रियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस तरह मदारी डमरू बजाकर वादा करता था कि सांप और नेवले की लड़ाई दिखाएगा, लेकिन कभी दिखाता नहीं, ऐसे ही वादे मंत्री करते हैं, पर पूरा नहीं कर पाते। इरफान ने कहा कि जो लोग इस्लाम को बदनाम करते हैं या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं, उनके खिलाफ फतवा जारी होना चाहिए।




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